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साहित्कारों ने कहा, साहित्य सेवा के लिए मिलते हैं अवार्ड, क्यों करेंगे वापस

Mon, 23 May 2016 02:12 AM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 23 May 2016 02:12 AM IST
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awarded famous writers statement on issue of Payback Award
साहित्याकार - फोटो : amar ujala

अवार्ड हमे पहचान दिलाते हैं यह हमे सहित्य की सेवा के लिए दिए जाते हैं। इनको कैसे हम वापस दे सकते हैं। इसकी कल्पना करना भी हमारे लिए बेहद मुश्किल है। यह कहना है कहानीकारों और कवियों का। ये लेखक  चंडीगढ़ सहित्य अकादमी की ओर से आयोजित सालाना सम्मान समारोह में सम्मानित किए गए। इस मौके पर बातचीत में उन्होंने कहा कि  हर लेखक के लिए अवार्ड एक सम्मान की तरह होता है। इसे पाने में वर्षों की मेहनत होती है।

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अवार्ड बहुत मायने रखता है वापिस नही करना
पंजाब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर मंजू ने बताया कि यह मेरा पहला अवॉर्ड है। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है। अभी कुछ समय पहले एक घटना के चलते देश भर के लेखक ों ने अवॉर्ड वापस कर दिए थे। लेकिन मैं  किसी भी परिस्थिति में अवार्ड वापस नहीं करूंगी। यह मेरा खुद का फैसला है जिन लेखको ने अवार्ड वापस किया था वह उनकी अपनी सोच थी। मैं तो अवार्ड की कद्र करती हूं। जिसके लिए में सबसे पहले साहित्य का धन्यवाद करना चाहती हूं क्योंकि  साहित्य की वजह से ही मुझे अवार्ड मिला है। मंजू को अंग्रेजी लेखन के लिए अवार्ड दिया गया है।
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साहित्य सेवा के लिए मिलते हैं अवॉर्ड
सांस्कृ त के लेखक शशिधर शर्मा ने कहा कि मुझे अवार्ड मिलने की बेहद खुशी है। इन्हें कई अवॉर्ड मिल चुके है। शशिधर शर्मा को राजीव गांधी, इंदिरा गांधी से भी अवार्ड मिल चुके हैं।  84 वर्षीय शर्मा ने कहा किसी भी लेखक को अगर अवार्ड मिलता है तो वह उसको साहित्य की सेवा के लिए मिलते हैं। वे पहचान दिलाते हैं। उनको कैसे वापस किया जा सकता हैं।
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 हौसला बढ़ाते हैं अवार्ड
उर्दू की लेखिका रेनू बहल ने कहा कि मेरी नजर में अगर लेखक को अवार्ड मिलता है तो वह लेखक का हौसला बढ़ाने का काम करते हैं। मैं अफसाना और उपन्यास ही लिखती हूं। गजल और शायरी  नहीं लिखती। रेनू ने कहा कि उर्दू पढ़ने वालाें की संख्या कम होती जा रही है। लेकिन मुझे इससे इश्क हो गया है।  रेनू को कई अकादमियों से अवार्ड मिल चुके है। इनमें से दल्ली, बिहार ,शिरोमणी साहित्य अवार्ड आदि शामिल हैं।

न किसी से मांगा न चोरी की
अमरजीत अमर को हिंदी लेखन के लिए अवार्ड दिया गया है। यह मेरा पहला अवार्ड है। मुझे ऐसा लगता है कि बहुत देर बाद किसी ने मुझे और मेरे काम को पहचाना है। मैं 40 साल से साहित्य लेखन से जुड़ा हुआ हूं। साहित्यिक सफर में 700 से ज्यादा हिंदी गजलें और 150 के करीब पंजाबी गजलें लिख चुका हूं। अमरजीत ने कहा कि यह अवार्ड मेरे लिए काफी मायने रखता है। इसके  कभी वापस नहीं करूंगा, क्योंकि यह अवॉर्ड न तो चोरी का है और न ही किसी से मांगा है।


शेक्सपीयर की किताबों का  पंजाबी में अनुवाद
लेखक सुरजीत हंस ने शेक्सपीयर की 39 किताबों का पंजाबी भाषा में अनुवाद किया है। इसके लिए उन्हें साहित्य अकादमी की ओर से अवॉर्ड दिया गया है। इस बारे में उन्होंने कहा के शेक्सपीयर की किताबों का पंजाबी में अनुवाद करने में बीस साल का समय लगा। इसके लिए 2014 में लंदन के मेयर ने भी उनको सम्मानित कर चुके हैं।

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