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Chandigarh News: न्यू चंडीगढ़ में डिपो के लिए पंजाब की मंजूरी का इंतजार, धीमी पड़ी मेट्रो परियोजना की रफ्तार

Fri, 05 Jul 2024 06:42 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jul 2024 06:42 AM IST
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Awaiting Punjab's approval for depot in New Chandigarh, pace of metro project slows down
चंडीगढ़। पंजाब के अधिकारियों की लेटलतीफी की वजह से मेट्रो परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है। न्यू चंडीगढ़ के पड़ौल के पास 21 हेक्टेयर जमीन पर मेट्रो का डिपो बनना है। यूटी प्रशासन के दो बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी पंजाब सरकार की तरफ से डिपो की भूमि के संबंध में जवाब नहीं दिया गया है। अब एक बार फिर प्रशासक के सलाहकार राजीव वर्मा ने पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पड़ौल के पास डिपोभूमि के बारे में पुष्टि की मांग की है ताकि एमआरटीएस परियोजना पर आगे का काम शुरू किया जा सके।पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित की अध्यक्षता में 12 दिसंबर 2023 को युनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (यूएमटीए) की दूसरी बैठक हुई थी। इसमें डिपो भूमि के बारे में निर्णय लिया गया था। तब से चंडीगढ़ प्रशासन पंजाब की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। डिपो भूमि की पुष्टि के लिए ट्राइसिटी के नोडल अधिकारियों के साथ तब से पांच बैठकें हो चुकी हैं। पंजाब की तरफ से जवाब नहीं आने की वजह से डीपीआर का काम भी प्रभावित हुआ है। पड़ौल के पास मौजूद 21 हेक्टेयर की जमीन पर मेट्रो कॉरिडोर 1 और 2 के संचालन और रखरखाव की सुविधा के लिए प्लानिंग की गई है।
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प्रशासन के अधिकारी ने बताया कि पंजाब की तरफ से डिपो के लिए भूमि पर निर्णय लिए बिना और एरिया को चिह्नित किए बिना मेट्रो परियोजना आगे नहीं बढ़ सकती। डिपो परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पंजाब की तरफ से की जा रही देरी से प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ रहा है और लागत भी बढ़ेगा। प्रशासन के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें एक महीने के अंदर पंजाब से डिपो भूमि के लिए पुष्टि उम्मीद है।
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हेरिटेज सेक्टरों में अंडरग्राउंड हो सकती है मेट्रो
शहर में नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा हेरिटेज सेक्टरों और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल कैपिटल कॉम्प्लेक्स से होकर गुजरेगा। पिछले काफी समय से इस बात को लेकर विवाद है कि हेरिटेज सेक्टरों में मेट्रो एलिवेटेड होगी या अंडरग्राउंड। यह तय करने के लिए यूटी प्रशासन और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) के बीच हाल ही में एक बैठक हुई है। इसमें चर्चा हुई कि शहर की विरासत की रक्षा के लिए अंडरग्राउंड नेटवर्क बहुत जरूरी है। हालांकि अभी यह नहीं कह सकते हैं कि यह फाइनल हो चुका है क्योंकि अभी तक बैठक के मिनट्स नहीं जारी किए गए हैं।
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एलिवेटेड नेटवर्क अंडरग्राउंड नेटवर्क से तीन गुना सस्ता
मेट्रो परियोजना के लिए डीपीआर तैयार करने का काम राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस) को दिया गया है। भूमिगत नेटवर्क की लागत एलिवेटेड नेटवर्क की लागत से तीन गुना अधिक है इसलिए राइट्स ने दोनों का मिश्रण प्रस्तावित किया है। राइट्स के अनुमान के अनुसार, एलिवेटेड नेटवर्क की लागत लगभग 45 करोड़ रुपये प्रति किमी है, जबकि भूमिगत नेटवर्क की लागत लगभग 150 करोड़ रुपये प्रति किमी है। अंतर 105 करोड़ प्रति किमी है।

--- पहले चरण में होंगे तीन कॉरिडोर ---
कॉरिडोर-1
न्यू चंडीगढ़ के पारौल से पंचकूला के सेक्टर-28 वाया चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन

कॉरिडोर 2
सुखना लेक से आईएसबीटी जीरकपुर वाया चंडीगढ़ एयरपोर्ट

कॉरिडोर 2 एक्सटेंशन
आईएसबीटी जीरकपुर से पंचकूला के सेक्टर-20

कॉरिडोर 3
अनाज मंडी चौक से ट्रांसपोर्ट लाइट चौक तक
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