चंडीगढ़ में पड़ने लगा जनसंख्या का दबाव: सड़क पर उतर रहे रोजाना 200 नए वाहन, तापमान भी 1.7 डिग्री बढ़ा
शहर में प्रदूषण मुक्त ई-वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में प्रशासन पहला कदम उठा चुका है। राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) द्वारा अब सिर्फ ई-रिक्शा और ई-ऑटो को ही पंजीकृत किया जा रहा है और सवारियों को ढोने के लिए परमिट दिए जा रहे हैं। एलपीजी और सीएनजी ऑटो को अब नया परमिट नहीं दिया जा रहा है। साथ ही शहर में चल रहे करीब 6000 सीएनसी-एलपीजी ऑटो को भी धीरे-धीरे ई-रिक्शा और ई-ऑटो से बदलने की तैयारी है।
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पांच लाख लोगों के लिए बसाए गए चंडीगढ़ की जनसंख्या एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2030 तक 20 लाख से अधिक हो जाएगी। शहर में हर दिन लगभग 200 वाहनों का पंजीकरण हो रहा है। बढ़ते वाहनों का असर यह हुआ है कि पिछले सात दशक में शहर का औसत न्यूनतम तापमान 1.78 डिग्री, जबकि अधिकतम तापमान 0.63 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है, जो शहर के लिए खतरे की घंटी है।
वर्ष 1951 में चंडीगढ़ की जनसंख्या सिर्फ 24,261 थी। पिछले छह दशकों (1951 से 2011) में चंडीगढ़ की जनसंख्या 44 गुना बढ़कर 10 लाख से ज्यादा हो गई। प्रशासन के अनुमान के अनुसार, वर्तमान में यह आंकड़ा साढ़े 14 लाख तक पहुंच गया है। तेजी से शहरीकरण और बढ़ते यातायात के कारण अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट (यूएचआईई) से शहर के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। अत्यधिक सर्दी का मौसम नवंबर और दिसंबर से जनवरी में खिसक गया है।
यही नहीं, मानसून का पैटर्न भी बदल गया है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की अलग-अलग स्थिति का एक कारण ये भी है। बढ़ती जनसंख्या भी तापमान में वृद्धि का एक कारण है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, पिछले सात दशकों में शहर का औसत न्यूनतम तापमान 1.78 डिग्री, जबकि अधिकतम तापमान 0.63 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है।
तापमान में थोड़ी सी भी वृद्धि लोगों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकती है, जो बेहद चिंता की बात है। जनसंख्या और वाहनों की संख्या में वृद्धि के अलावा, दशकों से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि हुई है।
हर परिवार के पास दो वाहन
चंडीगढ़ मूलरूप से पांच लाख वाहनों के लिए डिजाइन किया गया था लेकिन एक जनवरी 2000 से 21 अक्तूबर 2021 के बीच साढ़े छह लाख से ज्यादा नए वाहन सड़कों पर उतरे हैं। चंडीगढ़ जैसे छोटे शहर के लिए ये संख्या बहुत ज्यादा है। आलम ये है कि शहर में प्रति परिवार वाहनों की संख्या दो है।
पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या में वृद्धि से वायु गुणवत्ता में कमी आई है और वायु तापमान में वृद्धि हुई है जो लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। बढ़ती जनसंख्या से शहर के बुनियादी ढांचे जिनमें, सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता, शिक्षा, परिवहन और आवास पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है।
क्या केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण करना चाहिए: धर्मपाल
बीते दिनों होटल माउंट व्यू में चंडीगढ़ प्रशासन और यूएनडीपी के दो दिवसीय सम्मेलन में प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने कई चुनौतियां पर चर्चा की थी और लोगों से कुछ सुझाव मांगे थे। उन्होंने पूछा कि सड़कों पर लगातार बढ़ रहे निजी वाहनों के प्रति हमारी नीति क्या होनी चाहिए? क्या हमें चंडीगढ़ में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण करना चाहिए। उन्होंने कार्बन न्यूट्रल का भी जिक्र किया और पूछा कि क्या 2030 तक चंडीगढ़ कार्बन न्यूट्रल बन सकता है, क्योंकि पर्यावरण पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।