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ऑटो गैंगरेप की पीड़िता को न्याय मिलने में देरी हुई, लेकिन अदालत के फैसले से खुश हूं: वसीम मलिक
Thu, 15 Aug 2019 01:33 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Aug 2019 01:33 AM IST
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वसीम मलिक
- फोटो : अमर उजाला
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मैं तो पहले से ही निर्दोष था, चंडीगढ़ पुलिस ने जानबूझ कर झूठे केस में फंसाया और फिर अपनी कहानी को सच साबित करने के लिए कई महीनों तक टॉर्चर किया। यही नहीं, 17 महीने तक जेल में रखा। अब जाकर असली दोषियों को सजा मिली। न्याय में देरी हुई, लेकिन अदालत के फैसले से खुश हूं। यह कहना है वसीम मलिक का, जिन्हें पुलिस ने ऑटो गैंगरेप केस में आरोपी बनाकर डेढ़ साल तक जेल में रखा।
सेक्टर-52 में रहने वाले वसीम मलिक को एक ऐसे गुनाह के लिए 17 महीने जेल में बिताने पड़े, जो उसने किया ही नहीं था। घटना के करीब डेढ़ साल बाद सेक्टर-29 ऑटो गैंगरेप केस में वसीम मलिक को कोर्ट ने बेगुनाह साबित कर दिया था। इस केस में पुलिस ने पहले तो वसीम मलिक को आरोपी बनाया, फिर जब असली गुनाहगार पकड़े गए तो वसीम का नाम केस से हटा दिया।
वसीम मलिक को अपनी बेगुनाही साबित करने में दो साल लग गए। इन दो साल ने उसकी पूरी जिंदगी ही बदलकर रख दी। बेगुनाह साबित करने के लिए वसीम को अपना घर तक बेचना पड़ गया। घर के अलावा उसकी गाड़ी भी बिक गई। पुलिस ने वसीम की कटिंग करवाई, शेविंग करवाई ताकि उसका चेहरा उस आरोपी जैसा लगे जिसने लड़की के साथ रेप किया था। पुलिस ने उसे खूब टॉर्चर किया, उसे खूब पीटा भी गया।
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सेक्टर-52 में रहने वाले वसीम मलिक को एक ऐसे गुनाह के लिए 17 महीने जेल में बिताने पड़े, जो उसने किया ही नहीं था। घटना के करीब डेढ़ साल बाद सेक्टर-29 ऑटो गैंगरेप केस में वसीम मलिक को कोर्ट ने बेगुनाह साबित कर दिया था। इस केस में पुलिस ने पहले तो वसीम मलिक को आरोपी बनाया, फिर जब असली गुनाहगार पकड़े गए तो वसीम का नाम केस से हटा दिया।
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वसीम मलिक को अपनी बेगुनाही साबित करने में दो साल लग गए। इन दो साल ने उसकी पूरी जिंदगी ही बदलकर रख दी। बेगुनाह साबित करने के लिए वसीम को अपना घर तक बेचना पड़ गया। घर के अलावा उसकी गाड़ी भी बिक गई। पुलिस ने वसीम की कटिंग करवाई, शेविंग करवाई ताकि उसका चेहरा उस आरोपी जैसा लगे जिसने लड़की के साथ रेप किया था। पुलिस ने उसे खूब टॉर्चर किया, उसे खूब पीटा भी गया।
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