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Chandigarh News: अदालत को गुमराह करने का प्रयास, कंपनी पर एक लाख जुर्माना
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-तथ्य छुपा कर दाखिल की थी कंपनी ने याचिका, हाईकोर्ट ने किया सिरे से खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एक कंपनी की ओर से टेंडर मामले में दाखिल याचिका को एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए खारिज कर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायालय को गुमराह करने के लिए महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। याचिकाकर्ता से उम्मीद की जाती है कि वह स्वच्छ मन, स्वच्छ हृदय और स्वच्छ उद्देश्यों के साथ अदालत आया है।
पटियाला की कंपनी मैसर्स शिवम इंजीनियरिंग एंड फैब्रिक ने एसबीआई के लिए टेंडर में बोली लगाने से रोकने वाले आदेश को रद्द करने की याचिका में मांग की थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वह ठेकेदारों के रूप में सेवाएं प्रदान करने वाली एक अच्छी तरह से स्थापित फर्म है और उसने भारत में विभिन्न स्थानों पर भारतीय स्टेट बैंक की ओर से सौंपे गए विभिन्न कार्यों को निष्पादित करने का भी दावा किया था। हाईकोर्ट ने पाया कि याचिका निविदा की प्रति, अनुबंध कार्य आदेश, कारण बताओ नोटिस आदि और इसके लिए दायर दीवानी मुकदमे को खारिज करने जैसे किसी भी विवरण के बिना दायर की गई थी।
कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग
हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, ताकि यह याचिकाकर्ता जैसे बेईमान वादियों के लिए पर्याप्त निवारक के रूप में काम कर सके। हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है, उसका यह कर्तव्य है कि वह सही भावना के साथ ऐसा करे और वह न्यायालय के समक्ष संपूर्ण तथ्यों का खुलासा करने के लिए बाध्य होता है। ऐसी याचिका जिसमें सद्भावना का अभाव हो और महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया गया हो, वह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और उसे शुरू से ही खारिज किया जाना चाहिए। जब भी कोई व्यक्ति न्याय के न्यायालय में अपने असाधारण अधिकार क्षेत्र के प्रयोग में आता है, तो यह अपेक्षा की जाती है कि ऐसा व्यक्ति न केवल स्वच्छ हाथों से, बल्कि स्वच्छ मन, स्वच्छ हृदय और स्वच्छ उद्देश्यों के साथ उक्त न्यायालय में आएगा। याचिकाकर्ता द्वारा महत्वपूर्ण और भौतिक तथ्यों को छिपाकर न्यायालय को गुमराह करने का स्पष्ट प्रयास किया गया है और इस प्रयास की कड़ी निंदा की जाती है। याचिका को खारिज करते हुए न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एक कंपनी की ओर से टेंडर मामले में दाखिल याचिका को एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए खारिज कर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायालय को गुमराह करने के लिए महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। याचिकाकर्ता से उम्मीद की जाती है कि वह स्वच्छ मन, स्वच्छ हृदय और स्वच्छ उद्देश्यों के साथ अदालत आया है।
पटियाला की कंपनी मैसर्स शिवम इंजीनियरिंग एंड फैब्रिक ने एसबीआई के लिए टेंडर में बोली लगाने से रोकने वाले आदेश को रद्द करने की याचिका में मांग की थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वह ठेकेदारों के रूप में सेवाएं प्रदान करने वाली एक अच्छी तरह से स्थापित फर्म है और उसने भारत में विभिन्न स्थानों पर भारतीय स्टेट बैंक की ओर से सौंपे गए विभिन्न कार्यों को निष्पादित करने का भी दावा किया था। हाईकोर्ट ने पाया कि याचिका निविदा की प्रति, अनुबंध कार्य आदेश, कारण बताओ नोटिस आदि और इसके लिए दायर दीवानी मुकदमे को खारिज करने जैसे किसी भी विवरण के बिना दायर की गई थी।
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कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग
हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, ताकि यह याचिकाकर्ता जैसे बेईमान वादियों के लिए पर्याप्त निवारक के रूप में काम कर सके। हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है, उसका यह कर्तव्य है कि वह सही भावना के साथ ऐसा करे और वह न्यायालय के समक्ष संपूर्ण तथ्यों का खुलासा करने के लिए बाध्य होता है। ऐसी याचिका जिसमें सद्भावना का अभाव हो और महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया गया हो, वह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और उसे शुरू से ही खारिज किया जाना चाहिए। जब भी कोई व्यक्ति न्याय के न्यायालय में अपने असाधारण अधिकार क्षेत्र के प्रयोग में आता है, तो यह अपेक्षा की जाती है कि ऐसा व्यक्ति न केवल स्वच्छ हाथों से, बल्कि स्वच्छ मन, स्वच्छ हृदय और स्वच्छ उद्देश्यों के साथ उक्त न्यायालय में आएगा। याचिकाकर्ता द्वारा महत्वपूर्ण और भौतिक तथ्यों को छिपाकर न्यायालय को गुमराह करने का स्पष्ट प्रयास किया गया है और इस प्रयास की कड़ी निंदा की जाती है। याचिका को खारिज करते हुए न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
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