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परवर्तन निदेशक की ओर से अटैच प्रॉपटी एक करोड़ 20 लाख में बेची, दो भाइयों पर केस दर्ज
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चंडीगढ़। सेक्टर-20 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा अटैच की गई संपत्ति को एक करोड़ 20 लाख रुपये में बेचने के नाम पर 87 लाख रुपये ठग लिये। इस मामले में सेक्टर-19 थाना पुलिस ने दो भाइयों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज आर्थिक अपराध शाखा को जांच सौंप दी है। आरोपियों की पहचान सेक्टर-27 निवासी विनीत गोयल और निशांत गोयल के रूप में हुई है।
पीड़ित अनिल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि विनीत गोयल और निशांत गोयल का सेक्टर-20 की कोठी में बिजनेस है। 7 अप्रैल 2017 को इसी कोठी के ग्राउंड फ्लोर को बेचने के लिए एक करोड़ 20 लाख रुपये में बात हुई। आरोपियों ने कहा था कि इस संपत्ति का किसी तरह का कोई विवाद नहीं चल रहा है। 7 अप्रैल 2017 को आरटीजीएस के जरिए आरोपियों को 10 लाख रुपये दिये। जिसका वाउचर आरोपी निशांत गोयल ने स्वयं भरा था। अनिल ने जब दोनों भाइयों से एग्रीमेंट की कॉपी मांगी तो उन्होंने कहा जब पूरी रकम आ जाएगी तब देंगे। 20 अप्रैल को आरोपियों को 10 लाख, 29 अप्रैल को तीन बार में आरटीजीएस के जरिए 40 लाख, 9 जून को 10 लाख, 15 जून को 18 लाख रुपये दिये। अनिल के अनुसार 7 अप्रैल 2017 से 15 जून 2017 के बीच में उसने आरोपियों को 87 लाख रुपये दिये। सारी रकम आरटीजीसी के जरिए दी गई।
इसके बाद पीड़ित ने आरोपियों से प्रॉपर्टी ट्रांसफर की कॉपी मांगी। लेकिन, उन्होंने बहाने बनाने शुरु कर दिये। पीड़ित को आरोपियों पर शक हुआ तो उसने प्रॉपर्टी के बारे में पता किया। तब पता चला कि इस संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय ने अटैच की हुई थी। जब अनिल ने आरोपियों से रुपये वापस मांगे तो उन्होंने कहा कि रुपये एडवोकेट मुकेश मित्तल के पास रखे हैं। जिसकी कॉल रिकॉर्डिंग भी उसके पास है। इसके बाद अनिल ने संपत्ति या फिर रुपये वापस करने के लिए कहा। लेकिन, आरोपियों ने रुपये देने से इंकार कर दिया। पुलिस ने जांच कर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा भेज दिया है।
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पीड़ित अनिल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि विनीत गोयल और निशांत गोयल का सेक्टर-20 की कोठी में बिजनेस है। 7 अप्रैल 2017 को इसी कोठी के ग्राउंड फ्लोर को बेचने के लिए एक करोड़ 20 लाख रुपये में बात हुई। आरोपियों ने कहा था कि इस संपत्ति का किसी तरह का कोई विवाद नहीं चल रहा है। 7 अप्रैल 2017 को आरटीजीएस के जरिए आरोपियों को 10 लाख रुपये दिये। जिसका वाउचर आरोपी निशांत गोयल ने स्वयं भरा था। अनिल ने जब दोनों भाइयों से एग्रीमेंट की कॉपी मांगी तो उन्होंने कहा जब पूरी रकम आ जाएगी तब देंगे। 20 अप्रैल को आरोपियों को 10 लाख, 29 अप्रैल को तीन बार में आरटीजीएस के जरिए 40 लाख, 9 जून को 10 लाख, 15 जून को 18 लाख रुपये दिये। अनिल के अनुसार 7 अप्रैल 2017 से 15 जून 2017 के बीच में उसने आरोपियों को 87 लाख रुपये दिये। सारी रकम आरटीजीसी के जरिए दी गई।
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इसके बाद पीड़ित ने आरोपियों से प्रॉपर्टी ट्रांसफर की कॉपी मांगी। लेकिन, उन्होंने बहाने बनाने शुरु कर दिये। पीड़ित को आरोपियों पर शक हुआ तो उसने प्रॉपर्टी के बारे में पता किया। तब पता चला कि इस संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय ने अटैच की हुई थी। जब अनिल ने आरोपियों से रुपये वापस मांगे तो उन्होंने कहा कि रुपये एडवोकेट मुकेश मित्तल के पास रखे हैं। जिसकी कॉल रिकॉर्डिंग भी उसके पास है। इसके बाद अनिल ने संपत्ति या फिर रुपये वापस करने के लिए कहा। लेकिन, आरोपियों ने रुपये देने से इंकार कर दिया। पुलिस ने जांच कर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा भेज दिया है।
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