फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Atal Bihari Vajpayee Open Letter to Dr. Keshwanand Mamgain, Sada-E-Sarhad Bus

अटल बिहारी वाजपेयी ने इस शख्स को लिखा था एक खुला पत्र, आज भी जीवंत है उनकी एक चीज

Sat, 18 Aug 2018 01:25 PM IST
राजेश शांडिल्य , अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
राजेश शांडिल्य , अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा) Updated Sat, 18 Aug 2018 01:25 PM IST
विज्ञापन
Atal Bihari Vajpayee Open Letter to Dr. Keshwanand Mamgain, Sada-E-Sarhad Bus
Atal Bihari Vajpayee
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक शख्स को एक खुला पत्र लिखा था, जो अभी तक सहेज कर रखा हुआ है। वहीं उनकी एक चीज भी आज तक जीवंत है।
विज्ञापन


हम बात कर रहे हैं कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिला निवासी स्व. लेखक, साहित्यकार, चिंतक, विश्लेषक और हिंदी पत्रकारिता में अमूल्य योगदान देने वाले डॉ. केशवानंद ममगाईं की, जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री ने खुला पत्र लिखा था। मई 1993 में यह पत्र अटल बिहारी वाजपेयी ने भेजा और आज वो ममगाईं परिवार के लिए एक धरोहर बन चुका है। यह पत्र अटलजी और ममगाईं जी के बीच आत्मिक संबंधों दर्शाता है।

दरअसल, साहित्यकार डॉ. ममगाईं ने अटल जी पर एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में लेख लिखा था। इसे पढ़ने के पश्चात अटलजी ने जो लिखा वह कुछ यों था...आपने लेख में मेरे बारे में जो विचार व्यक्त किए हैं, उनमें आत्मीयता अधिक, वास्तविकता कम है। अपनत्व में दोष दिखाई नहीं देता...। यानी जिस लेख में एक लेखक ने अटल जी के व्यक्तित्व को जिस सच्चाई से पिरोया था, उसमें भी अटलजी को वास्तविकता से ज्यादा आत्मीयता और अपनत्व का भाव ही दिखा।
विज्ञापन

अटलजी पंचतत्व में विलीन हुए तो स्व. डॉ. ममगाईं की धर्मपत्नी फफक पड़ी

Atal Bihari Vajpayee Open Letter to Dr. Keshwanand Mamgain, Sada-E-Sarhad Bus
Atal Bihari Vajpayee
गौरतलब है कि राजकीय पुरस्कार बाबू बालमुकुंद गुप्त साहित्य अवार्डी डॉ. केशवानंद ममगाईं ने चार मई 1993 को अटल जी के व्यक्तित्व पर लेख लिखा था। इसके जवाब में 9 मई 1993 तो लिखे पत्र में अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ. ममगाईं का आभार व्यक्त करते हुए उपरोक्त उद्गार पत्र के माध्यम से व्यक्त किए थे। शुक्रवार शाम को जब अटलजी पंचतत्व में विलीन हुए तो इसकी लाइव कवरेज देख स्व. डॉ. ममगाईं की धर्मपत्नी सुशीला देवी फफक पड़ी।  

तब पुस्तक की पहली प्रति अटलजी को ही भेंट की थी
पहली बार अटल जी के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के पश्चात डॉ. ममगाईं ने अपनी पुस्तक हिंदी पत्रकारिता के विकास में हरियाणा की देन...की पहली प्रति अटल जी को भेंट की थी। इस दौरान हुई भेंट को डॉ. ममगाईं के परिवार के सदस्य आज भी याद करते हैं।  

लेखन के दौरान अटल जी के साथ संयोग
यह भी संयोग ही था कि स्व. लेखक, साहित्यकार, चिंतक, विश्लेषक और हिंदी पत्रकारिता में अमूल्य योगदान देने वाले डॉ. केशवानंद ममगाईं ने अटल बिहारी वाजपेयी के संपादन में प्रकाशित दैनिक स्वदेश, राष्ट्रधर्म, पांचजन्य सहित अन्य समाचार पत्र-पत्रिकाओं में संवाददाता एवं लेखक के रूप में कार्य किया था। डॉ. ममगाईं की 1957 में हिंदी की रक्षा आंदोलन में सक्रिय भूमिका रही। तब उन्हें पांच माह कारावास की सजा हुई थी।

आज भी जीवंत है अटल जी द्वारा शुरू कराई गई सदा-ए-सरहद

Atal Bihari Vajpayee Open Letter to Dr. Keshwanand Mamgain, Sada-E-Sarhad Bus
सदा-ए-सरहद बस
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी भले ही पंचतत्व में विलीन हो गए हैं, लेकिन पाकिस्तान से दोस्ताना संबंध बनाए रखने के लिए उनकी ओर से किए समझौते आज भी उनको जमीन से जुड़े नेता होने की गवाही दे रहे हैं। 19 फरवरी 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने भारत-पाक बंटवारे का दर्द कम करने के लिए दिल्ली से लाहौर सदा-ए-सरहद बस सेवा शुरू की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पाकिस्तान टूरिज्म विभाग की बस भारत के लिए रवाना की।

भारत में दिल्ली परिवहन निगम से इस बस को चलाया गया। दोनों बसों से भारत-पाक के मैत्रीपूर्ण संबंध आज भी कायम हैं। दिल्ली से चलने वाली सदा-ए-सरहद बस को इंडो-पाक बस से भी जाना जाता है जोकि दिल्ली लाहौर और लाहौर से बाघा बार्डर, अमृतसर, करतारपुर, सरहिंद, कुरुक्षेत्र क्षेत्रों में चलती है।

1999 में 16 मार्च को कारगिल युद्ध और इसके बाद 2001 में भारतीय संसद हमले के बाद सुरक्षा के लिहाज से कुछ समय के लिए इसे रोक दिया गया था। इसके बावजूद दोनों मुल्कों की आपसी भाईचारक सांझ बस को नहीं रोक पाई और बस आज भी जारी है।

वीरवार को सरहिंद फ्लोटिंग रेस्टोरेंट पर जैसे ही लाहौर से इंडो पाक बस आई यात्रियों ने वाजपेयी के देहांत पर शोक जताया। अयात मिर्जा और फरहान ने कहा कि वह जमीन से जुड़े नेता थे। उन जैसा कोई और नहीं हो सकता। जबसे बस में हमने सफर शुरू किया है हम ट्रेन में नहीं जाते। दो दिन का सफर एक दिन में पूरा हो जाता है। वह चाहते हैं कि देश से ऐसे ही मधुर रिश्ते बने रहें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed