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ऑनलाइन पढ़ाई की बात से उड़ गई थी एसोसिएट प्रोफेसर की नींद, फिर तकनीक से की दोस्ती
Thu, 31 Dec 2020 01:56 PM IST
निवेदिता वर्मा
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 31 Dec 2020 01:56 PM IST
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डॉ. केवल कृष्ण।
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केवल कृष्ण कोरोना की आपदा को अवसर में बदलने वालों में शामिल हैं। वह वरिष्ठ वैज्ञानिकों में से एक हैं। दुनिया के दो फीसदी टॉप वैज्ञानिकों में भी शामिल हुए। उनके 243 पब्लिकेशंस हैं लेकिन तकनीक के मामले में वे थोड़े पीछे थे।
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लॉकडाउन शुरू हुआ और जुलाई में विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाने के आदेश मिल गए। यह बात सुनकर डॉ. केवल कृष्ण तनाव में आ गए। तनाव में नींद भी उड़ गई थी। ऑनलाइन कभी पढ़ाया ही नहीं था। कंप्यूटर पर पावर प्वाइंट आदि भी नहीं बना पाते थे लेकिन उन्होंने ठानी कि इसके लिए कुछ न कुछ करेंगे।
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उन्होंने अपने बेटे-बेटी की मदद से कंप्यूटर पर ऑनलाइन पढ़ाने के टिप्स जाने। अपने विदेशी दोस्तों से भी संपर्क साधा। उसके बाद पीयू से ऑनलाइन पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण पाने के बाद भी डर लग रहा था कि कहीं वह मजाक न बन जाएं। इसके लिए उन्होंने पहले अपने घर पर बेटे-बेटी की कक्षा ली।
28 जुलाई से लेकर 31 जुलाई तक बच्चों को पढ़ाया और उसके बाद विश्वास कुछ जगा तो विद्यार्थियों को पढ़ाना शुरू किया। पहली कक्षा 3 अगस्त को ली। विद्यार्थियों ने सराहना की और उनके सवालों के जवाब दिए। डॉ. केवल कृष्ण कहते हैं कि एक माह बाद तीन अगस्त को खुशी मिली और कुछ नींद भी आई। उसके बाद पावर प्वाइंट बनाने से लेकर मूवी दिखाने, पोस्टर प्रस्तुति आदि बनाने लग गए। आज वह पूरी तरह प्रशिक्षित हो चुके हैं।
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कोरोना काल में तीन माह में उनके 13 रिसर्च पेपर प्रसिद्ध जर्नल्स में प्रकाशित किए। उन्होंने पोस्टमार्टम बिना चीरफाड़ के इमेजिंग तकनीक भी बताई। यह काम उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि तकनीक से नाता दूर-दूर तक नहीं रहा।
सरकारी स्कूल से लेकर वैज्ञानिक बनने तक का सफर
पीयू के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केवल कृष्ण बेहद साधारण परिवार से आते हैं। मुफलिसी में उनका बचपन बीता है। मुल्लांपुर के सरकारी स्कूल में दसवीं तक की पढ़ाई की। उसके बाद बारहवीं सेक्टर- 37 स्थित सरकारी स्कूल से की। पीयू से बीएससी, एमएससी की और फिर पीएचडी की। उसके बाद अपने ही विभाग में वे शिक्षक बन गए।