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मुश्किल वक्त में देखा मौका, कोरोना काल में लिख डाले 35 से ज्यादा शोध पेपर

Thu, 31 Dec 2020 11:18 AM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 31 Dec 2020 11:18 AM IST
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Associate professor of PGI wrote 35 research paper during lockdown
डॉ. विशाल शर्मा। - फोटो : फाइल फोटो

कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो मुश्किल वक्त को एक मौके के तौर पर लेते हैं। पीजीआई के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रो. विशाल शर्मा ने कुछ ऐसा ही करके दिखाया है। कोरोना काल में उन्होंने कोरोना, आईबीडी, पेट की टीबी, टेलीमेडिसिन जैसे विषयों पर 35 से ज्यादा शोध पत्र लिख डाले। ये सभी पत्र राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। इस उपलब्धि के लिए उन्हें एसआर नाइक मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया है। 

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प्रो. विशाल ने बताया कि कोरोना में ओपीडी बंद होने से उन्हें जो समय मिला था, उसका इस्तेमाल उन्होंने शोध पत्र लिखने में इस्तेमाल किया। यदि ओपीडी बंद नहीं होती तो ज्यादा से ज्यादा 15 पेपर लिख पाता। शोध पत्र लिखने में उनके विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसरों व उनके रेजिडेंट डॉक्टरों की भी अहम भूमिका रही। 
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दरअसल पीजीआई की ओपीडी में इतनी भीड़ होती है कि आमतौर पर डॉक्टरों को शोध कार्य का समय ही नहीं मिल पाता। कोई साल में छह शोधपत्र लिख पाता है तो कोई दस। हालांकि ओपीडी बंद होने के बावजूद डाक्टरों की रोटेशन के तौर पर कोविड वार्ड में ड्यूटी लगती रही। उन्होंने बताया कि रात में जब घरवाले सो जाते थे, तो वे अपना वक्त शोध कार्य को लिखने में देते थे।


भविष्य के लिए काफी उपयोगी होगा उनका शोध
डॉ. विशाल ने बताया कि उनके शोध भविष्य के लिए काफी उपयोगी होंगे। अपने शोध के दौरान देखा है कि कोरोना का लिवर व पेट से पीड़ित मरीजों पर क्या असर पड़ता है। यदि किसी मरीज को अस्पताल में कम बार बुलाए जांच करानी हो तो क्या तरीके अपनाने चाहिए। ऐसे कई उदाहरण उन्होंने पेश किए हैं, जो चिकित्सा के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएंगे। वे एक किताब भी लिख हैं, जो जल्द ही डॉक्टरों व मरीजों के पास होगी।

पीजीआई देता है प्रेरणा 
डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि पीजीआई देश ही नहीं बल्कि विश्व एक ऐसा संस्थान है, जिसने सिर्फ टैलेंट दिया है। देश-विदेश में हजारों डॉक्टर यहां से निकलकर गए हैं और पीजीआई का नाम रोशन कर रहे हैं। पीजीआई के कई सीनियर डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्होंने पूरे विश्व को चिकित्सा में नई विधाएं दी हैं। यहां की फैकल्टी दिन रात मानवता के लिए काम करती है। ऐसे लोगों को देखकर ही ज्यादा काम करने का मन करता है।

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