महाराज आशुतोष समाधि में, प्रशासन खामोश

ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर Updated Fri, 31 Jan 2014 06:53 PM IST
Ashutosh Maharaj in meditation, administration silent
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख महाराज आशुतोष अभी भी गहन समाधि में हैं। तीसरे दिन उनके समाधि से वापस आने की बात डेरा प्रबंधकों द्वारा की जा रही थी लेकिन शुक्रवार को डेरे की तरफ से प्रेस वार्ता में बताया गया कि गहन समाधि की कोई समय सीमा नहीं है।

डेरे के प्रवक्ता स्वामी विशालानंद का कहना है कि महाराज जी के चेहरे पर पूरा नूर है। उनका शरीर पूरी तरह से तरोताजा है, यह समाधि की अवस्था में ही होता है।

महाराज आगे भी समाधि में चले जाते हैं लेकिन इस बार यह मामला समाचार की सुर्खियां बनने से काफी फैल गया है। शुक्रवार को डेरे की तरफ से स्वामी विशालानंद व साध्वी जया भारती मीडिया से मुखातिब हुईं।

महाराज जी समाधि से कब लौटेंगे, इस पर स्वामी विशालानंद ने कहा कि यह समय सीमा तय नहीं होती है। यह डेरे के अनुयायियों के लिए रूटीन है।

प्रशासनिक अधिकारियों को डेरे के अंदर न जाने देने व मीडिया को महाराज आशुतोष के दर्शन करवाने की बात पर स्वामी विशालानंद जी ने कहा कि यह गुरु महाराज की इच्छा पर निर्भर है।

आगे भी महाराज आशुतोष की इच्छा के बिना किसी को उनसे मिलाया नहीं जाता था। वे पहले भी मीडिया में नहीं आते थे और डेरे के सिद्धांत के मुताबिक वे अब भी मीडिया में नहीं आएंगे।

स्वामी विशालानंद ने कहा कि महाराज आशुतोष अकसर कमरे की कुंडी लगाकर कई घंटे समाधि में चले जाते थे लेकिन दो दिन पहले जब महाराज आशुतोष समाधि में गए तो कमरे की कुंडी खुली क्यों रखी गई थी?

इस पर डेरा प्रबंधकों ने कहा कि यह वे नहीं बता सकते। स्वामी विशालानंद से जब वीडियोग्राफी करवाकर दिखाने की बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।

स्वामी विशालानंद ने कहा कि डॉ. करतार, डॉ. हरपाल, डॉ अशोक ने चेक किया था। महाराज अभी भी गहन समाधि में है और उनकी नब्ज शून्य है। यह मेडिकल साइंस से ऊपर की अवस्था है, जिसका ज्ञान अध्यात्म में ही है।

वहीं तीसरे दिन भी प्रशासन की चुप्पी बरकरार रही। डिप्टी कमिश्नर या मातहत अधिकारी मीडिया से कन्नी काटते रहे।

डेरे में प्रबंधन व संचालन पर विवाद!
स्वामी विशालानंद ने उन अटकलों का खंडन किया कि डेरे में प्रबंधन व संचालन को लेकर विवाद उठ रहा है। उन्होंने कहा कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान चलाने के लिए एक गवर्निंग बॉडी बनी हुई है। डेरे में दो ही पदवी हैं, एक गुरु महाराज की दूसरी शिष्य की। ऐसे में विवाद का सवाल ही नहीं है।

डेरा नूरमहल के पास बन रहा हेलीपैड
डेरा नूरमहल से चंद किलोमीटर दूर गांव लित्तरां में हेलीपैड बनाए जाने की खबर से डेरा प्रबंधकों ने इसकी जानकारी होने से इंकार किया है।

डेरा प्रबंधकों ने कहा कि हेलीपैड प्रशासन तैयार कर रहा है, इसकी जानकारी डेरे को नहीं है। प्रशासन क्यों हेलीपैड तैयार कर रहा है, यह वे खुद ही बता सकते हैं।

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