आशुतोष महाराज केस में एक और नया मोड़
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल जालंधर प्रमुख महेश कुमार झा उर्फ आशुतोष महाराज का बेटा होने का दावा कर रहे दिलीप झा ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर खुद की डीएनए टेस्ट कराने की मांग की थी।
उन्होंने याचिका में कहा था कि डीएनए से सब कुछ साफ हो जाएगा। यदि टेस्ट नहीं हुआ तो वह आशुतोष महाराज का शरीर हासिल करने के अपने हक से महरूम रह जाएंगे। एडवोकेट एसपी सोही के माध्यम से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है।
इसमें कहा गया है कि अदालतों के कई फैसलों में स्पष्ट कहा गया है कि किसी व्यक्ति के उसके पिता से संबंध साबित करने के लिए सबसे विश्वसनीय माध्यम डीएनए टेस्ट है। दिलीप का कहना है कि वह खुद इस टेस्ट की मांग कर रहे हैं और इससे सही जांच हो सकेगी कि वह आशुतोष महाराज का बेटा हैं या नहीं।
कोर्ट के फैसले पर आशुतोष महाराज के शव का फैसला
उल्लेखनीय है कि जस्टिस एमएमएस बेदी की एकल बेंच ने 29 अक्तूबर को सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह भी कहा था कि यदि कोई और तथ्य देना चाहता है तो दे सकता है। इसी कारण दिलीप झा ने अर्जी दाखिल की है। फैसला आने पर तय होगा कि आशुतोष महाराज के शव का पोस्टमार्टम होगा या नहीं और शव किसे सौंपा जाएगा।
आशुतोष महाराज के ड्राइवर पूर्ण सिंह की तरफ से सीनियर एडवोकेट आरएस बैंस ने इस मामले की पैरवी करते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति की मौत पर यदि कोई भी व्यक्ति आशंका जताकर आपराधिक याचिका दायर करता है, तो मौत की जांच जरूरी है।
वहीं, राज्य सरकार और दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के वकीलों ने पूरा जोर इसी बात पर दिया कि पूर्ण सिंह के पास याचिका दायर करने का अधिकार ही नहीं है। संस्थान के वकील ने कहा था कि दिलीप आशुतोष महाराज का बेटा नहीं हैं। इसी कारण दिलीप ने डीएनए टेस्ट करवाने की अर्जी दाखिल की है।