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'कब तक चलेगी आशुतोष महाराज की समाधि ?'

Fri, 12 Sep 2014 05:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 12 Sep 2014 05:19 PM IST
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Ashutosh Maharaj Case: 'high court Questions from followers'

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल, जालंधर के प्रमुख आशुतोष महाराज का शव हासिल करने की बेटे दिलीप झा की याचिका की सुनवाई के दौरान कुछ अनुयायी हाईकोर्ट को समाधि की परिभाषा समझाने पहुंच गए। जस्टिस एमएमएस बेदी ने कहा कि वह उनकी भावनाओं का आदर करते हैं, लेकिन यह कैसे तय होगा कि समाधि की अवधि कितनी हो सकती है।

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समाधि और मृतक शरीर के मुद्दे पर करीब एक घंटा बहस चली। बेंच के समक्ष संस्थान के अनुयायियों ने कहा कि आशुतोष महाराज पहले भी कुछ दिनों के लिए समाधि में जा चुके हैं और वापस जीवित हो उठे।
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यह दिव्य शक्ति है, जो चली जाती है और शरीर निष्क्रिय हो जाता है, लेकिन दिव्य शक्ति लौटते ही शरीर क्रिया में आ जाता है, लिहाजा महाराज की दिव्य शक्ति लौट सकती है। अनुयायियों ने समाधि के मुद्दे पर रूसी डाक्टर के अध्ययन का हवाला भी दिया, लेकिन बेंच के सवाल पर अनुयायी यह स्पष्ट नहीं कर सके कि यह अध्ययन कितने लोगों पर किया गया था।
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अनुयायियों का मानना है कि डाक्टरी तौर पर मृत घोषित किए जाने का अध्यात्मिकता से कोई लेना-देना नहीं है। बेंच ने टिप्पणी की कि आखिर यह कैसे तय हो सकता है कि समाधि कितनी देर चल सकती है।

'मामले में देरी की गुंजाइश नहीं'

Ashutosh Maharaj Case: 'high court Questions from followers'

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अदालतों का अध्यात्मिकता से कोई लेना-देना नहीं है। मामले केवल कानून के दायरे में रह कर ही निपटाए जा सकते हैं। बेंच ने कहा कि इस मामले में अब देरी की गुंजाइश नहीं है और मामला जल्द निपटाया जाना है। इसके साथ ही मामले को शुक्रवार को भी जारी रखने के फैसले के साथ सुनवाई स्थगित कर दी गई।

दिलीप झा ने अपनी याचिका में कहा है कि आशुतोष महाराज मधुबनी (बिहार) के गांव लखनौर के रहने वाले हैं। वहां के श्रद्धालु चाहते हैं कि शव का अंतिम संस्कार गांव में हो।

उसे पंजाब आने से डर लगता है इसलिए शव प्राप्त करने के लिए उसकी ओर से बिहार के गृह सचिव ने पंजाब के गृह सचिव को शव बिहार पहुंचाने के लिए पत्र भेजा था।

वहां के सांसद ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री से शव बिहार पहुंचाने का आग्रह किया था। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। दिलीप झा ने शव प्राप्त करने और पोस्टमार्टम की मांग की थी।

वापस ले ली थी सुरक्षा

Ashutosh Maharaj Case: 'high court Questions from followers'

आशुतोष महाराज के शव की जेड सुरक्षा वापस लेने के लिए दायर याचिका पर एआईजी (सुरक्षा) परमदीप सिंह संधू ने सरकार की ओर से जवाब दायर किया कि क्लीनिकली डेड घोषित किए जाने के बाद फरवरी में एडीजीपी (इंटेलिजेंस) की अध्यक्षता में सुरक्षा पर पुनर्विचार किया गया था।

इस दौरान आशुतोष महाराज को जेड श्रेणी से बाहर कर दिया गया था, लेकिन केंद्रीय एवं राज्य की चौकसी एजेंसियों की ओर से संगठन की सुरक्षा को चुनौती की रिपोर्ट के मद्देनजर भीतर और बाहर पुलिसकर्मी तैनात हैं।

इस जवाब के साथ हाईकोर्ट ने यह मामला निपटा दिया है।

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