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आशुतोष महाराज मामले में पंजाब सरकार को कड़ी फटकार, दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Tue, 02 Aug 2016 11:15 PM IST
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आशुतोष महाराज
- फोटो : file photo
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जालंधर के नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज के मामले पर मंगलवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बार फिर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस शेखर धवन की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले के दो साल हो चुके हैं और पंजाब सरकार अब तक इसका कोई हल नहीं निकाल सकी है। खंडपीठ ने साफ कर दिया कि अगर पंजाब सरकार ने इस मामले का कोई हल नहीं निकाला तो हाईकोर्ट को ही आदेश देने होंगे।
खंडपीठ ने कहा कि जब आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड घोषित किया जा चुका है तो इस पर पंजाब सरकार अब तक कोई फैसला क्यों नहीं ले पा रही। हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले में कानून-व्यवस्था का हवाला देकर बच नहीं सकती। खंडपीठ ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही खंडपीठ ने पंजाब सरकार को इस मामले का हल निकालने के लिए कुछ और समय देते हुए सुनवाई 16 सितंबर तक स्थगित कर दी।
खुद को आशुतोष महाराज का पुत्र बताने वाले दिलीप झा की ओर से दायर याचिका पर जारी इस मामले की पिछली सुनवाई पर खंडपीठ के समक्ष दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने बताया था कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत एक कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो इस विषय पर विचार-विमर्श कर रही है। संस्थान ने यह भी कहा था कि इस मामले में किसी भी अंतिम निर्णय तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। संस्थान के इस जवाब पर तब खंडपीठ ने आदेश दिए थे कि इस मामले को आपसी बातचीत के जरिए हल कर हाईकोर्ट को सूचित किया जाए। मंगलवार को सुनवाई के दौरान ऐसे किसी हल की जानकारी पंजाब सरकार की ओर से नहीं दी जा सकी।
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उल्लेखनीय है कि इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट दखल नहीं देना चाहता। इसलिए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और अन्य पक्ष मिलकर महाराज के अंतिम संस्कार के विषय में निर्णय लें। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यह तय किया जाए कि महाराज का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ हो। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि जब मेडिकल रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि आशुतोष महाराज क्लीनिकली डेड हैं, तो उनके समाधि में होने की बात क्यों कही जा रही है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सबसे बड़ा सवाल महाराज के सम्मान का है। लिहाजा, यही उचित होगा कि संस्थान आगे आकर कहे कि महाराज का अंतिम संस्कार उचित ढंग से करवाया जाए।
यह है मामला
आशुतोष महाराज को 28 जनवरी, 2014 को डॉक्टरों ने क्लीनिकली डेड घोषित कर दिया था, लेकिन उनके अनुयायियों का आज तक कहना है कि महाराज गहन समाधि में हैं। तभी से उनका शरीर जालंधर में नूरमहल स्थित उनके आश्रम में फ्रिज पर रखा गया है। आश्रम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं।
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खंडपीठ ने कहा कि जब आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड घोषित किया जा चुका है तो इस पर पंजाब सरकार अब तक कोई फैसला क्यों नहीं ले पा रही। हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले में कानून-व्यवस्था का हवाला देकर बच नहीं सकती। खंडपीठ ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही खंडपीठ ने पंजाब सरकार को इस मामले का हल निकालने के लिए कुछ और समय देते हुए सुनवाई 16 सितंबर तक स्थगित कर दी।
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खुद को आशुतोष महाराज का पुत्र बताने वाले दिलीप झा की ओर से दायर याचिका पर जारी इस मामले की पिछली सुनवाई पर खंडपीठ के समक्ष दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने बताया था कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत एक कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो इस विषय पर विचार-विमर्श कर रही है। संस्थान ने यह भी कहा था कि इस मामले में किसी भी अंतिम निर्णय तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। संस्थान के इस जवाब पर तब खंडपीठ ने आदेश दिए थे कि इस मामले को आपसी बातचीत के जरिए हल कर हाईकोर्ट को सूचित किया जाए। मंगलवार को सुनवाई के दौरान ऐसे किसी हल की जानकारी पंजाब सरकार की ओर से नहीं दी जा सकी।
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उल्लेखनीय है कि इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट दखल नहीं देना चाहता। इसलिए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और अन्य पक्ष मिलकर महाराज के अंतिम संस्कार के विषय में निर्णय लें। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यह तय किया जाए कि महाराज का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ हो। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि जब मेडिकल रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि आशुतोष महाराज क्लीनिकली डेड हैं, तो उनके समाधि में होने की बात क्यों कही जा रही है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सबसे बड़ा सवाल महाराज के सम्मान का है। लिहाजा, यही उचित होगा कि संस्थान आगे आकर कहे कि महाराज का अंतिम संस्कार उचित ढंग से करवाया जाए।
यह है मामला
आशुतोष महाराज को 28 जनवरी, 2014 को डॉक्टरों ने क्लीनिकली डेड घोषित कर दिया था, लेकिन उनके अनुयायियों का आज तक कहना है कि महाराज गहन समाधि में हैं। तभी से उनका शरीर जालंधर में नूरमहल स्थित उनके आश्रम में फ्रिज पर रखा गया है। आश्रम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं।