आशुतोष महाराज: अब अतीत पर उठे सवाल
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रवक्ता स्वामी अरविंदानंद ने सवाल खड़ा किया है कि पिछले 30-35 सालों में पुत्र को पिता की याद क्यों नहीं आई? आशुतोष महाराज ने तो अपने परिवार की कभी चर्चा तक नहीं की। वैसे भी सन्यासियों को अपने अतीत से कोई सारोकार नहीं होता।
स्वामी अरविंदानंद ने कहा कि पिछले कई दिनों से आशुतोष महाराज के बारे में कई आधारहीन खबरें सुनने को मिल रही हैं। आशुतोष महाराज का पूरा जीवन अध्यात्मिक जागृति व सामाजिक भलाई को समर्पित है। उनका गहन समाधि में जाना परम विज्ञान का एक हिस्सा है। बेशक आज विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली हो, लेकिन सृष्टि के बहुत सारे रहस्यों से विज्ञान अब भी अनभिज्ञ है।
स्वामी ने कहा कि कई ताकतें डेरे को कमजोर करने की साजिश रच रही हैं। इसी कड़ी का हिस्सा पूर्ण सिंह है, जो खुद को आशुतोष महाराज का पूर्व चालक बता रहा है। हकीकत यह है कि डेरे में कोई नई कार तो दूर पुरानी कार भी नहीं थी।
छह तथ्यों को आधार बनाया क्लीनिकल डेथ का
डेरे के प्रबंधक भले ही आशुतोष महाराज की गहन समाधि का दावा करें, लेकिन जांच करने वाले चिकित्सकों ने क्लीनिकल डेथ का दावा छह तथ्यों को आधार बनाकर किया है। जिन चिकित्सकों ने आशुतोष महाराज का चेकअप किया है, उनका मानना है कि उनके क्लीनिकल डेथ का अहम कारण कार्डिक अरेस्ट है।
अपनी रिपोर्ट में आंखों के सर्जन डॉ. अशोक ने लिखा है कि 29 जनवरी 2014 की आधी रात जब उन्होंने डॉ. करतार कौर के साथ मिलकर आशुतोष महाराज की जांच की तो पता चला कि कार्डिक अरेस्ट के कारण उनकी क्लीनिकल डेथ हो चुकी है। इस बीच रात करीब दो बजे चंडीगढ़ से डॉ. हरपाल भी डेरे पर पहुंचे। बाद में अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों की टीम को भी बुलाया गया, वहां से डॉ. परमिंदर कुमार मोदगिल एंबुलेंस के साथ आ पहुंचे।
उन्होंने चेकअप में पाया कि आशुतोष महाराज की नब्ज गायब थी। ब्लड प्रेशर रिकार्ड नहीं हो रहा था। फेफड़ों की कोई भी मूवमेंट नहीं थी। बॉडी की सारी मूवमेंट नदारद थी। आंखों की पुतली फिक्स हो चुकी थी। इस आधार पर ही यह माना गया कि आशुतोष महाराज की क्लीनिकल डेथ हो चुकी है।
वहीं अपोलो अस्पताल की तरफ से जारी रिपोर्ट के मुताबिक आशुतोष महाराज की हालत के बारे में डेरा दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से रात 12.50 बजे बताया गया। इस पर डॉ. मोदगिल की ड्यूटी लगाई गई। एक बजकर 10 मिनट पर डॉ. मौदगिल को सारे उपकरणों के साथ एंबुलेस सहित रवाना कर दिया गया था। जब वे वहां पहुंचे तो उन्होंने आशुतोष महाराज को क्लीनिकल डेथ घोषित कर दिया।
नूरमहल में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध
आशुतोष महाराज के डेरे की ओर से वीरवार को भी दावा किया गया कि वे अब भी गहन समाधि में हैं। इस बीच नूरमहल में मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। मीडिया कर्मियों को डेरे से एक किमी की दूरी पर ही रोकने का आदेश जारी किया गया है।
इस बीच डेरे के प्रवक्ता स्वामी विशालानंद, स्वामी परमानंद व स्वामी विश्वदेवानंद ने मीडिया कर्मियों से संवाद बंद कर दिया है। डेरे से एक किमी की दूरी पर बैरियर लगाकर मीडिया कर्मियों को यह कहकर रोका जा रहा है कि उन्हें आगे जाने की आज्ञा नहीं है। मीडिया पर प्रतिबंध किसने और क्यों लगाया? इस पर कोई उत्तर देने के लिए तैयार नहीं है।
आशुतोष महाराज के डेरे की तरफ से वीरवार को जारी बयान में एक बार फिर कहा गया कि आश्रम की सारी गतिविधयां सामान्य हैं। सभी साधक व सेवक कार्य व साधना कर रहे हैं। डेरे के प्रवक्ता की तरफ से कहा गया है कि आशुतोष महाराज के अनुयायी साधना में जाकर उनके दर्शन कर रहे हैं। यह उनके करोड़ों भक्तों की आस्था का सवाल है।
भ्रांतियों को नजरअंदाज करने की अपील
सभी अनुयायी अब भी आशुतोष महाराज के समाधि से लौटने का इंतजार कर रहे हैं। डेरे की तरफ से फिर दावा किया गया है कि आशुतोष महाराज के नाम कोई चल अचल संपत्ति नहीं है। सारी संपत्ति डेरे की है। इसका संचालन गवर्निंग बॉडी कर रही है।
मामले की सीबीआई जांच हो : पूर्ण सिंह
खुद को आशुतोष महाराज का पूर्व चालक बताने वाले पूर्ण सिंह का कहना है कि सरकार मामले की सीबीआई जांच करवाए, तो सारा सच सामने आ जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाया है कि जालंधर देहात के एसएसपी जसप्रीत सिंह ने मामले की सूचना एसएमओ को क्यों नहीं दी। या अपने साथ सिविल सर्जन को डेरे पर क्यों नहीं ले गए। यदि स्वास्थ्य विभाग के अफसर वहां जाते तो प्रमाणित तौर पर आशुतोष महाराज का चेकअप करते। इसलिए मामले में सीबीआई जांच जरूरी है।
पूर्ण सिंह के दावे के मुताबिक वह आशुतोष महाराज के साथ 1988 में जुड़ा था। उसी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कहा था कि आशुतोष महाराज को डेरे में ही उनके सेवादारों ने बंधक बनाकर रखा है।
पूर्ण सिंह का कहना है कि पीजीआई के चिकित्सकों का एक दल नूरमहल भेजा जाए। ताकि आशुतोष महाराज की नए सिरे से जांच की जा सके। मीडिया को भी चिकित्सकों के साथ वहां जाना चाहिए, जहां आशुतोष महाराज के शरीर को फ्रिजर में रखा गया है।
पूर्ण सिंह ने कहा कि मामले में वह सुप्रीम कोर्ट तक जाने के लिए तैयार हैं। जब वह आशुतोष महाराज के साथ था, तब उसे 700 रुपये मासिक वेतन मिलता था। चार साल में वह आशुतोष महाराज के काफी राजदार हो गए थे। ऐसी बातें पता चल गई थीं, जिससे आशुतोष महाराज को खतरा महसूस होने लगा। पूर्ण सिंह का कहना है कि नूरमहल का बच्चा-बच्चा जानता है कि चार साल तक मैंने उनकी कार चलाई। वह कार उनको जालंधर के एक व्यक्ति ने गिफ्ट की थी।
उधर, डेरे की तरफ से यह भी कहा गया है कि पूर्ण सिंह नाम का कोई चालक आशुतोष महाराज के साथ कभी नहीं रहा है। वह भ्रांतिया फैला रहा है और पूर्व में वह शपथ पत्र देकर माफी मांग चुका है। यहां तक कि उस पर झूठ बोलकर गुमराह करने के आरोप में केस भी दर्ज कराया जा चुका है।