फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Ashes changed in Creamation Ghaut

...जब श्मशान घाट में बदल गई अस्थियां

Thu, 24 Jul 2014 01:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 24 Jul 2014 01:33 PM IST
विज्ञापन
Ashes changed in Creamation Ghaut

सेक्टर-25 के श्मशान घाट में बुधवार को बड़ी ही अजीब घटना घटी। रामदरबार निवासी नीरज अपने पिता की अस्थियां उठाने के लिए आए थे, लेकिन तनाव में भूल से वह किसी और की अस्थियां ले गए। जिनकी अस्थियां वे लेकर गए, वह पंजाब पुलिस हेडक्वार्टर के एसआई भरपूर सिंह की मां की अस्थियां थी। भरपूर सिंह जब सुबह जब श्मशान पहुंचे तो उन्हें यहां मां की अस्थियां नहीं मिली।

विज्ञापन


उन्होंने फौरन पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर दिया और श्मशान के पंडित से पूछा। काफी मशक्कत के बाद अस्थियों के बारे में पता लगा। श्मशान के पंडित ने फिर नीरज को फोनकर वापस बुलाया, तब कहीं जाकर अस्थियां मिल सकीं। भरपूर सिंह ने इस पूरी घटना के लिए श्मशान घाट के स्टाफ को ही जिम्मेदार ठहराया।
विज्ञापन


भरपूर ने कहा कि वो लोग (नीरज) तो तनाव में थे तो उनसे गलती हो गई, श्मशान के स्टाफ को भी तो पता होना चाहिए कि किसका संस्कार कहा हुआ है। असल में नीरज के पिता का संस्कार 17 नंबर प्लॉट पर हुआ था जबकि भरपूर सिंह की मां का 16 नंबर प्लॉट पर। नीरज ने 16 नंबर प्लॉट की अस्थियां उठा ली थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


हरिद्वार ले जानी थी अस्थियां, अंबाला पहुंच चुके थे

नीरज ने कहा कि तनाव में उन्हें याद नहीं रहा कि पिता का संस्कार किस प्लॉट में हुआ था। दूसरा, श्मशान घाट के स्टाफ ने भी उन्हें सही जानकारी नहीं दी। नीरज ने बताया कि वे पिता की अस्थियां बहाने के लिए हरिद्वार जा रहे थे और ट्रेन पकड़ने के लिए अंबाला भी पहुंच गए थे। सूचना मिलने पर उन्हें अंबाला से लौटना पड़ा। इस कारण उनकी ट्रेन भी छूट गई।

सेवा खूब लेते हैं, पर देखभाल नहीं करते
भरपूर सिंह ने श्मशान घाट के स्टाफ पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे हर किसी से सेवा के नाम पर पैसे मांगते हैं, लेकिन देखभाल कुछ करते नहीं है। भरपूर ने कहा कि ये श्मशान स्टाफ की जिम्मेदारी बनती है कि अस्थियों की सही देखभाल रखे। भरपूर सिंह ने कहा कि उनसे 2200 रुपये लकड़ियों के और 300 रुपये सेवा के ले लिए जबकि नीरज से 2500 रुपये लकड़ियों के और 700 रुपये सेवा के नाम पर लिए थे।


रामदरबार के जो लोग अस्थियां लेने आए थे उन्होंने खुद ही कहा था कि उनके पिता का संस्कार 16 नंबर प्लॉट पर हुआ था। इसलिए हमने उन्हें उसी प्लॉट से अस्थियां चुगने को बोल दिया।
बलदेव, पंडित
श्मशान घाट, सेक्टर-25

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed