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ICSE में इस बेटी ने देश भर में पाया दूसरा स्थान, डॉक्टर बनना चाहती हैं
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
Updated Tue, 30 May 2017 09:26 AM IST
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डॉक्टर बन लोगों की सेवा करना चाहती है अर्वाची सिंधु
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आईसीएसई परीक्षा परिणाम में भी जींद की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। नरवाना रोड स्थित क्राइस्ट राजा स्कूल की 10वीं कक्षा की छात्रा अर्वाची सिंधु ने देश भर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।
इस उपलब्धि पर जहां अर्वाची बहुत खुश है, वहीं परिजन भी बेटी की फूले नहीं समा रहे हैं। अर्वाची सिंधु ने 491 अंक प्राप्त किए हैं। 98.2 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं परीक्षा पास करने वाली अर्वाची के अनुसार वह डॉक्टर बन कर लोगों की सेवा करना चाहती है। अर्वाची के पिता पेशे से चिकित्सक थे और कुछ साल पहले उनका निधन हो गया था।
इसके बाद अर्वाची जींद में अपने नाना के पास रहने लगी। अर्वाची ने क्राइस्ट राजा स्कूल से पढ़ाई कर इस मुकाम को हासिल किया है। मूल रूप से अर्वाची सिंधु हिसार जिले के खांडा गांव की रहने वाली है, लेकिन अपने नाना के पास वह जलालपुर कलां गांव में रह रही है। फिलहाल अर्वाची दिल्ली में 11वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही है।
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नाना-नानी का सर्वाधिक योगदान
अर्वाची के अनुसार उसको इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए उसके नाना सूरजमल जागलान और नानी चंद्र देवी का सबसे अधिक योगदान रहा है।
बेटी पर गर्व
अर्वाची की मां शीला देवी के अनुसार उन्हें अपनी बेटियों पर गर्व है। अर्वाची की बड़ी बहन दिल्ली में 12 मेडिकल संकाय की छात्रा है। शीला देवी के अनुसार बेटियों में हर मुकाम हासिल करने की क्षमता होती है, बस उनको सहयोग की जरूरत होती है।
बेटों से कम नहीं बेटियां
अर्वाची के नाना सूरजमल जालगान के अनुसार बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं हैं। उन्होंने अपनी दोहती को सिर्फ प्रेरित किया है।
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इस उपलब्धि पर जहां अर्वाची बहुत खुश है, वहीं परिजन भी बेटी की फूले नहीं समा रहे हैं। अर्वाची सिंधु ने 491 अंक प्राप्त किए हैं। 98.2 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं परीक्षा पास करने वाली अर्वाची के अनुसार वह डॉक्टर बन कर लोगों की सेवा करना चाहती है। अर्वाची के पिता पेशे से चिकित्सक थे और कुछ साल पहले उनका निधन हो गया था।
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इसके बाद अर्वाची जींद में अपने नाना के पास रहने लगी। अर्वाची ने क्राइस्ट राजा स्कूल से पढ़ाई कर इस मुकाम को हासिल किया है। मूल रूप से अर्वाची सिंधु हिसार जिले के खांडा गांव की रहने वाली है, लेकिन अपने नाना के पास वह जलालपुर कलां गांव में रह रही है। फिलहाल अर्वाची दिल्ली में 11वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही है।
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नाना-नानी का सर्वाधिक योगदान
अर्वाची के अनुसार उसको इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए उसके नाना सूरजमल जागलान और नानी चंद्र देवी का सबसे अधिक योगदान रहा है।
बेटी पर गर्व
अर्वाची की मां शीला देवी के अनुसार उन्हें अपनी बेटियों पर गर्व है। अर्वाची की बड़ी बहन दिल्ली में 12 मेडिकल संकाय की छात्रा है। शीला देवी के अनुसार बेटियों में हर मुकाम हासिल करने की क्षमता होती है, बस उनको सहयोग की जरूरत होती है।
बेटों से कम नहीं बेटियां
अर्वाची के नाना सूरजमल जालगान के अनुसार बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं हैं। उन्होंने अपनी दोहती को सिर्फ प्रेरित किया है।