{"_id":"a5000ae572ba79f1a27b5d9bd8074430","slug":"arun-jetli-rally-in-amritsar","type":"story","status":"publish","title_hn":"'बड़कें मार वोटें नहीं मिलतीं कैप्टन साहिब'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'बड़कें मार वोटें नहीं मिलतीं कैप्टन साहिब'
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Sat, 05 Apr 2014 08:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अकाली-भाजपा प्रत्याशी अरुण जेटली ने कहा कि किसी को मंदा बोलकर और बड़कें मारकर लोकतंत्र में वोट नहीं मिलते।
विज्ञापन
जेटली ने कहा कि कैप्टन को याद रखना चाहिए कि अब वह लोकतंत्र में जी रहे हैं और वो जमाना लद गया जब राजा-महाराजाओं को मुंह से मंदे शब्द और बेइज्जती करने वाली भाषा की आदत होती थी। जेटली शुक्रवार को फैजपुरा इलाके में आयोजित रैली के दौरान बोल रहे थे।
जेटली ने कहा कि जहां कैप्टन के बोल मंदे हैं वहीं एजेंडे के नाम पर उनके पास कुछ नहीं है। केंद्र की कांग्रेस सरकार को दस साल हो चुके हैं लेकिन कैप्टन साहिब की पार्टी दस साल में अमृतसर के लिए कितनी पर्यटन, उद्योग व व्यापार से जुड़ी योजनाएं लाईं, इसका कोई जिक्र कैप्टन साहब नहीं करते।
विज्ञापन
जेटली ने कहा कि आगे भी कैप्टन और कांग्रेस के पास अमृतसर के लिए कोई विजन या योजना नहीं है, होगा भी कहां से क्योंकि आज से दस दिन पहले कांग्रेस के पास अमृतसर से चुनाव लड़ने लायक उम्मीदवार भी नहीं था। रही बात कैप्टन अमरिंदर सिंह की तो इन्हीं का अखबारों में बयान छपा था कि मैं तो चुनावों से पहले और न ही चुनावों के बाद अमृतसर की सेवा कर सकता हूं।
विज्ञापन
मुझे चुनाव न लड़ाया जाए, लेकिन सोनिया गांधी की घुड़की के बाद बेचारे मजबूरी में चुनाव मैदान में आए। ऐसे मजबूर उम्मीदवार से अमृतसर के विकास की क्या उम्मीद रखी जाए। जेटली ने कहा कि अनमने मन से चुनाव से उतरने की वजह से ही कैप्टन को बात-बात पर गुस्सा आ जाता है और गुस्से में कुछ भी अनाप-शनाप बोल बैठते हैं। बादल साहिब का तो नाम सुनते ही भड़क जाते हैं। जेटली ने कहा कि यह हाल सिर्फ अमृतसर का नहीं है बल्कि पूरे देश में कांग्रेस को डंडे के जोर पर अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने पड़े हैं। कई तो बेचारे अस्पतालों में भर्ती हो गए और कई टिकट मिलने के बाद भी हार के डर से बीच मैदान में भाजपा में शामिल हो गए।