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म्यूजियम में सजेगीं आर्ट स्टूडेंट्स की पेटिंग्स, देखने के लिए पहुंचें

Wed, 21 May 2014 02:17 PM IST
शंकर सिंह /अमर उजाला, चंडीगढ़
शंकर सिंह /अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 21 May 2014 02:17 PM IST
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Arts Students Paintings in Govt Museaum

रघु रॉय, दीवान माना ये कुछ ऐसे नाम हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं। ऐसे ही प्रसिद्ध नामों के बीच गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट के कुछ स्टूडेंट्स को अपनी पेंटिंग्स शेयर करने का मौका मिला।

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दरअसल गवर्नमेंट म्यूजियम ने हाल ही में इंडियन कंटेंपरी सेक्शन में नई पेंटिंग्स को लगाया है, जिसमें से कुछ प्रसिद्ध कलाकारों की हैं तो कुछ गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज के स्टूडेंट्स की। मंगलवार को इन्हीं कॉलेज के स्टूडेंट्स से अमर उजाला ने की खास बातचीत और उनके काम के अनुभव को जाना।
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नाम के अनुरूप आर्ट वर्क

एमएफए प्रथम वर्ष के स्टूडेंट विकास, ग्राफिक्स में स्पेशलाइजेशन कर रहे हैं। विकास का प्रदर्शनी में एक काम शामिल किया गया है। इसका विषय ‘फार फ्रॉम रूट्स’ रखा गया है। नाम के अनुरूप ही विकास ने छह विभिन्न तस्वीरें तैयार की हैं। इन तस्वीरों में एक तरफ पेड़ और एक तरफ उनसे बने दरवाजे व खिड़कियां बनाई हैं।
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विकास ने बताया कि इसमें उन्होंने पेड़ के रूप को दिखाया है, जिसमें इंसानों द्वारा अपने इस्तेमाल के लिए लगातार हो रही पेड़ों की कटाई को दर्शाया गया है। विकास ने कहा कि उनकी यह पेंटिंग्स 15,000 रुपये में म्यूजियम ने खरीदी है।

कैनवास पर खेत खलिहान
एमएफए प्रथम वर्ष के स्टूडेंट राज कुमार के प्रदर्शनी में दो पेंटिंग्स पेश की। गांव की खुशबु लिए ग्राफिक पेंटिंग में राज ने खेत खलिहानों को बेहद ही छोटे कैनवास पर उतारा है। राज के अनुसार वह हिसार जिले के एक गांव के  रहने वाले हैं। इस लिए उनकी पेंटिंग्स में अकसर गांव ही झलकता है।

राज का कहना है कि छोटे कैनवास पर काम करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन ग्राफिकल डिजाइन से यह थोड़ा आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस पेंटिंग में गांव की महिला काम रही है और इसमें उन्होंने उसके पहनावे को कुछ इस तरह से उभारा है कि वह थ्री डी आर्ट भी कह सकते हैं।

राज ने कहा कि इस प्रदर्शनी में उनके  दो काम पिछले साल भी सिलेक्ट हुए थे। इस बार भी उनका काम सिलेक्ट हुआ, जिसकी उन्हें बहुत खुशी है। राज ने कहा कि उनके दो ग्राफिकल पेंटिंग इस बार 5500 और 11500 रुपये में बिकी।

सोच में रच बस गई मां
राजिंदर कौर आर्ट कॉलेज में ही ग्राफिक डिजाइनिंग कर रही हैं। राजिंदर ने बताया कि उनकी मां उनकी सोच में रच बस गई हैं। उनके विषय में अकसर उनकी मां रही हैं। उन्होंने अपनी मां को देखते हुए एक सिलाई मशीन को डिजाइन किया। इस सिलाई मशीन में से धागों की रील बनाई गई है, जिसमें कांटेदार तार लगाई गई है।

राजिंदर ने कहा कि उनकी मां सिलाई मशीन पर काम करती हैं। इस लिए उन्होंने इसका ग्राफिक डिजाइन किया। धागों की रील से निकलती नुकीली कांटेदार तारों के  बारे में राजिंदर कहतीं हैं कि इनसे वह अपनी मां की जिंदगी में आई परेशानियों को दर्शाना चाहती हैं।

वृक्षों की विशाल रेंज

एमएफए द्वितीय वर्ष की स्टूडेंट मानुक ने अपने विषय में वृक्षों की विशाल रेंज दिखाई है। मानुक ने कहा कि उनका पसंदीदा विषय वृक्ष रहा है और पिछले तीन साल से उनका कार्य म्यूजियम के लिए चुना गया है। इस साल उनके दो कार्य चुने गए है। इनमें से एक में उन्हें 20,000 रुपये प्राप्त हुए और दूसरे से चार हजार।


मानुक ने बताया कि म्यूजियम में अगर आपकी आर्ट को जगह मिलती है तो यह अपने आप में एक उपलब्धि है। मानुक ने कहा कि अभी वह स्टूडेंट है और कॉलेज छोड़ने के बाद भी उनकी कला इस म्यूजियम में रहेगी इसकी उन्हें भी खुशी है। 

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