{"_id":"612952428ebc3e0e8d6f4984","slug":"artists-with-farmers-boycott-of-films-is-not-right-ronnie-chandigarh-news-pkl424847576","type":"story","status":"publish","title_hn":"कलाकार किसानों के साथ, फिल्मों का बहिष्कार ठीक नहीं : रौनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कलाकार किसानों के साथ, फिल्मों का बहिष्कार ठीक नहीं : रौनी
विज्ञापन
चंडीगढ़। कोरोना के कारण पिछले लगभग डेढ़ साल से पंजाबी फिल्में रिलीज नहीं हुई हैं, क्योंकि सिनेमा हॉल बंद थे। अभी पंजाबी सिनेमा में लगभग 80-90 पंजाबी फिल्में बनकर तैयार पड़ी हैं, इन सबका काम कोरोना महामारी से पहले पूरा हो गया था। अब सिनेमा खुलने पर कुछ लोग फिल्मों के प्रोडक्शन को किसानी आंदोलन के साथ जोड़कर इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि पंजाबी कलाकारों ने शुरुआत से लेकर किसान आंदोलन को पूरा समर्थन दिया है। ये सब बातें नजफ्टा के जनरल सेक्रेटरी और अभिनेता मलकीयत रौनी ने प्रेस वार्ता के दौरान साझा की।
नॉर्थ जोन फिल्म एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने सेक्टर-27 प्रेस क्लब में शुक्रवार को प्रेस वार्ता करके पंजाबी सिनेमा और कलाकारों को आ रही परेशानी को लेकर चर्चा की गई। कार्यक्रम में कलाकारों ने बताया कि जब किसान आंदोलन पंजाब में रेल की पटरी और टोल प्लाजा पर हो रहा था। तब हमने सोशल मीडिया और गीतों के जरिए आंदोलन को दिल्ली तक पहुंचाया और दिल्ली चलो मुहिम में सहयोग दिया। अभी कुछ शरारती तत्व कलाकारों को किसान विरोधी बताकर रिलीज होने वाली फिल्मों का बहिष्कार कर रहे हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। हम पहले भी किसानों के साथ थे और अब भी किसान आंदोलन से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। हमारे बहुत से कलाकार अभी भी दिल्ली धरने पर बैठे हैं।
कार्यक्रम में कंवर ग्रेवाल, जगदीप सिद्धू, देव खरोड़, बीएन शर्मा, राणा जंग बहादुर, हर्फ चीमा, गुरप्रीत भंगू, शविंदर माहल, सीमा कौशल, अश्वनी कुमार शर्मा, नरेश कथूरिया व अन्य सिनेमा से जुड़े लेखक, डायरेक्टर, अभिनेता और गायक पहुंचे।
विज्ञापन
सिनेमा बंद होने से आया रोजी-रोटी का संकट
कलाकारों ने बताया कि लॉकडाउन में सिनेमा से जुड़े नए कलाकारों के साथ स्पॉट ब्वाय, लाइटिंग इत्यादि से जुड़े लोगों के आगे रोजी-रोटी का संकट आ गया था। ऐसे में आंदोलन के साथ कलाकारों ने एकजुट होकर इनका साथ दिया। पंजाबी फिल्म कलाकारों ने पंजाब की लोक-संस्कृति को विश्व तक पहुंचाया है। अभी जब सब ठप्प हो गया है तो इसकी शुरुआत के लिए लोगों के सहयोग की जरूरत है, क्योंकि सिनेमा को सरकार की कोई सहायता नहीं मिलती, कलाकारों का घर लोगों के समर्थन से चलता है।
विज्ञापन
नॉर्थ जोन फिल्म एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने सेक्टर-27 प्रेस क्लब में शुक्रवार को प्रेस वार्ता करके पंजाबी सिनेमा और कलाकारों को आ रही परेशानी को लेकर चर्चा की गई। कार्यक्रम में कलाकारों ने बताया कि जब किसान आंदोलन पंजाब में रेल की पटरी और टोल प्लाजा पर हो रहा था। तब हमने सोशल मीडिया और गीतों के जरिए आंदोलन को दिल्ली तक पहुंचाया और दिल्ली चलो मुहिम में सहयोग दिया। अभी कुछ शरारती तत्व कलाकारों को किसान विरोधी बताकर रिलीज होने वाली फिल्मों का बहिष्कार कर रहे हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। हम पहले भी किसानों के साथ थे और अब भी किसान आंदोलन से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। हमारे बहुत से कलाकार अभी भी दिल्ली धरने पर बैठे हैं।
विज्ञापन
कार्यक्रम में कंवर ग्रेवाल, जगदीप सिद्धू, देव खरोड़, बीएन शर्मा, राणा जंग बहादुर, हर्फ चीमा, गुरप्रीत भंगू, शविंदर माहल, सीमा कौशल, अश्वनी कुमार शर्मा, नरेश कथूरिया व अन्य सिनेमा से जुड़े लेखक, डायरेक्टर, अभिनेता और गायक पहुंचे।
विज्ञापन
सिनेमा बंद होने से आया रोजी-रोटी का संकट
कलाकारों ने बताया कि लॉकडाउन में सिनेमा से जुड़े नए कलाकारों के साथ स्पॉट ब्वाय, लाइटिंग इत्यादि से जुड़े लोगों के आगे रोजी-रोटी का संकट आ गया था। ऐसे में आंदोलन के साथ कलाकारों ने एकजुट होकर इनका साथ दिया। पंजाबी फिल्म कलाकारों ने पंजाब की लोक-संस्कृति को विश्व तक पहुंचाया है। अभी जब सब ठप्प हो गया है तो इसकी शुरुआत के लिए लोगों के सहयोग की जरूरत है, क्योंकि सिनेमा को सरकार की कोई सहायता नहीं मिलती, कलाकारों का घर लोगों के समर्थन से चलता है।