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रानी लक्ष्मीबाई जैसी खूबियों वाला हो फौज का कमांडर, ऐसी ही हो मिलिट्री की लीडरशिप
Mon, 21 Dec 2020 03:10 PM IST
निवेदिता वर्मा
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 21 Dec 2020 03:10 PM IST
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मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में चर्चा करते रक्षा विशेषज्ञ।
- फोटो : अमर उजाला
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आज मिलिट्री की लीडरशीप कैसी होनी चाहिए, उसमें क्या खूबियां होनी चाहिए और कैसे वह पूरी सेना को एकजुट करके आगे बढ़े। इस विषय पर मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट के अंतिम दिन चर्चा हुई। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आज फौज के कमांडर में रानी लक्ष्मीबाई जैसे नेतृत्व के गुणों का होना बहुत जरूरी है। साथ ही दुश्मन खेमे की हर जानकारी, ईमानदारी और राह से हटकर सोचना भी कमांडर के गुणों का हिस्सा होना चाहिए।
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एयर मार्शल केके नौवार ने बताया कि ऐतिहासिक महिला फौजी नेता जैसे झांसी की रानी, जोन ऑफ आर्क के तीक्ष्ण बुद्धि और सहृदयता जैसे गुण फौज के कमांडर में होने बहुत जरूरी हैं। कमांडर को दुश्मनों की हथियार प्रणाली के बारे में पूरा ज्ञान होना चाहिए। ईमानदारी, एकसारता, विश्वास, हिम्मत, भावनात्मक पक्ष की जांच, राह से हटकर सोचने का सामर्थ्य होना भी जरूरी है। एयर मार्शल नौवार ने सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस्तेमाल करते हुए ड्रोन जैसे आधुनिक यंत्रों के प्रयोग की महत्ता पर भी जोर दिया।
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घायल होने के बावजूद हौसला बढ़ाया
लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल ने सैन्य कमांडर अलेक्जेंडर द ग्रेट का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत बहादुरी का उस समय प्रदर्शन किया, जब सैनिक किले की दीवार पर चढ़ने से डर रहे थे। अलेक्जेंडर ने घायल होने के बावजूद हौसला बढ़ाया, जो उसके सैनिकों को यह बताने के लिए पर्याप्त था कि सब कुछ ठीक है और वे आगे बढ़ रहे हैं।
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लेफ्टिनेंट जनरल बलराज सिंह नगल ने कहा कि मिलिट्री लीडरशिप सैनिकों, उनके कामों, चरित्र और गुणों से संबंधित है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा सैनिक नेता बनने के लिए पेशेवर ज्ञान, फैसला लेने, अखंडता, नैतिक दिलेरी, शारीरिक दिलेरी, अपने आप के प्रति वफादारी, चरित्र, निर्णय लेने और संचार कौशल जैसे गुण जरूरी हैं।
आज का दौर तकनीक का है
लेफ्टिनेंट जनरल डीडीएस संधू ने पिछली लड़ाई के बारे और भविष्य के दृश्यों पर ध्यान केंद्रित न करने वाली मिलिट्री लीडरशिप पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज का दौर तकनीक का है, इसलिए आधुनिक समय में अगर दुनिया में अस्तित्व बनाए रखना है तो बदलती प्रौद्योगिकी का साथी बनना लाजिमी है। आजकल भारतीय सैनिक अच्छे पढ़े लिखे हैं और वह दशकों पुराने फौजियों की अपेक्षा अलग हैं। उन्होंने जोर दिया कि आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए फौजियों तक सैनिक लीडरशिप को पहुंच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वफादारी, नैतिक हौसला, मौके के मुताबिक अपने आप को ढालना आदि गुण सैनिकों में होने जरूरी हैं। यह गुण सिर्फ एक प्रभावशाली सैनिक लीडरशिप के साथ ही पैदा होते हैं