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दस वर्षीय बच्ची से दुराचार मामले में बहस पूरी, फैसला आज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Oct 2017 09:11 AM IST
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- फोटो : सांकेतिक चित्र
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देश-विदेश तक चर्चा में आए दस वर्षीय मासूम से दुराचार और उसके बाद बच्ची को जन्म देने के मामले में मंगलवार को फैसला आ सकता है। सोमवार को बचाव और अभियोजन पक्ष में अंतिम बहस पूरी हो गई।
हालांकि अंतिम बहस में बचाव पक्ष की ओर से मामले में पीड़ित बच्ची के माता-पिता की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। साथ ही दोनों की मामले में जिम्मेदारी भी तय करने की अपील की गई। बचाव पक्ष ने खासकर पिता की भूमिका और जिम्म्ेदारी पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट की विशेष देखरेख में चल रहे केस में सोमवार को अंतिम बहस के बाद अब मंगलवार को एडीजे पूनम आर जोशी फैसला सुना सकती हैं।
सोमवार को पहले आरोपी की ओर से बचाव पक्ष के वकील मंजीत सिंह ने 10 वर्षीय बच्ची से दुराचार और उसके गर्भवती बनने पर उसके अभिभावकों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केस के पहले दिन से ही पीड़िता का पिता सामने नहीं आया है। वह न तो पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने गए और न ही अस्पताल में बेटी के उपचार के दौरान सामने आए। वह केस की एक भी सुनवाई के दौरान अदालत में भी नहीं आए। जि दिन उनकी बेटी और पत्नी की गवाही दर्ज हुई उस दिन भी वह कोर्ट में नहीं आए। बचाव पक्ष ने ऐसे गंभीर मुद्दे में उनकी भूमिका और जिम्मेदारी तय करने के लिए अदालत से अपील की।
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हालांकि अंतिम बहस में बचाव पक्ष की ओर से मामले में पीड़ित बच्ची के माता-पिता की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। साथ ही दोनों की मामले में जिम्मेदारी भी तय करने की अपील की गई। बचाव पक्ष ने खासकर पिता की भूमिका और जिम्म्ेदारी पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट की विशेष देखरेख में चल रहे केस में सोमवार को अंतिम बहस के बाद अब मंगलवार को एडीजे पूनम आर जोशी फैसला सुना सकती हैं।
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सोमवार को पहले आरोपी की ओर से बचाव पक्ष के वकील मंजीत सिंह ने 10 वर्षीय बच्ची से दुराचार और उसके गर्भवती बनने पर उसके अभिभावकों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केस के पहले दिन से ही पीड़िता का पिता सामने नहीं आया है। वह न तो पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने गए और न ही अस्पताल में बेटी के उपचार के दौरान सामने आए। वह केस की एक भी सुनवाई के दौरान अदालत में भी नहीं आए। जि दिन उनकी बेटी और पत्नी की गवाही दर्ज हुई उस दिन भी वह कोर्ट में नहीं आए। बचाव पक्ष ने ऐसे गंभीर मुद्दे में उनकी भूमिका और जिम्मेदारी तय करने के लिए अदालत से अपील की।
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इसके अलावा बचाव पक्ष की ओर से वारदात के वक्त को लेकर भी बहस की गई। उनके अनुसार पीड़िता बड़ी बहन के साथ रोजाना सुबह 8 से दो बजे तक स्कूल में रहती थी। उसके पिता भी सुबह नौ से शाम छह बजे तक आफिस में होते थे। वहीं उनकी मां भी घर के साथ ही कोठी में काम करती थी। उनका काम करने का कोई वक्त नहीं था। ऐसे में यह कैसे हो सकता है कि आरोपी आए और वारदात को अंजाम दे जाए।
बचाव पक्ष ने आरोपी पर झूठा केस दर्ज होने की दलील दी। साथ ही कहा कि पीड़िता की मां को जब इसका पता चला था तो वह पहले बेटी को लेकर उसका गर्भपात कराने गई थी। बचाव पक्ष की ओर से पीड़िता की मां की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
वहीं दूसरे आरोपी की ओर से एडवोकेट इंद्रजीत बस्सी ने बहस की। उन्होंने आरोपी के बेकसूर होने की दलील दी। उन्होंने दलील दी कि आरोपी कभी भी बच्ची के माता-पिता की अनुपस्थिति में उनके घर नहीं गया। साथ ही उसने कभी पीड़िता को नहीं धमकाया। वहीं उन्होंने केस में पीड़िता के पिता, बहन और पड़ोसियों को गवाह न बनाए जाने पर पुलिस पर सवाल उठाए।
यह है मामला
इस साल जुलाई में 10 वर्षीय बच्ची के पेट में दर्द होने पर परिजन उसे अस्पताल ले गए। वहां जांच के बाद पता चला कि बच्ची 6 महीने की गर्भवती है। इसके बाद परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। बच्ची ने बताया कि उसके मामा ने ही उससे कई बार गलत काम किया है। पुलिस ने बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और मां की शिकायत के आधार पर आरोपी मामा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं उसकी डीएनए नवजात से मेल न खाने पर पुलिस ने बच्ची की दोबारा काउंसलिंग की। इस पर बच्ची ने छोटे मामा का भी नाम लिया। पुलिस ने बच्ची के दोबारा मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराने के बाद दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया था। उसके और नवजात के डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजे थे। बाद में आई रिपोर्ट में वह पॉजिटिव पाए गए थे।
बचाव पक्ष ने आरोपी पर झूठा केस दर्ज होने की दलील दी। साथ ही कहा कि पीड़िता की मां को जब इसका पता चला था तो वह पहले बेटी को लेकर उसका गर्भपात कराने गई थी। बचाव पक्ष की ओर से पीड़िता की मां की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
वहीं दूसरे आरोपी की ओर से एडवोकेट इंद्रजीत बस्सी ने बहस की। उन्होंने आरोपी के बेकसूर होने की दलील दी। उन्होंने दलील दी कि आरोपी कभी भी बच्ची के माता-पिता की अनुपस्थिति में उनके घर नहीं गया। साथ ही उसने कभी पीड़िता को नहीं धमकाया। वहीं उन्होंने केस में पीड़िता के पिता, बहन और पड़ोसियों को गवाह न बनाए जाने पर पुलिस पर सवाल उठाए।
यह है मामला
इस साल जुलाई में 10 वर्षीय बच्ची के पेट में दर्द होने पर परिजन उसे अस्पताल ले गए। वहां जांच के बाद पता चला कि बच्ची 6 महीने की गर्भवती है। इसके बाद परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। बच्ची ने बताया कि उसके मामा ने ही उससे कई बार गलत काम किया है। पुलिस ने बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और मां की शिकायत के आधार पर आरोपी मामा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं उसकी डीएनए नवजात से मेल न खाने पर पुलिस ने बच्ची की दोबारा काउंसलिंग की। इस पर बच्ची ने छोटे मामा का भी नाम लिया। पुलिस ने बच्ची के दोबारा मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराने के बाद दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया था। उसके और नवजात के डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजे थे। बाद में आई रिपोर्ट में वह पॉजिटिव पाए गए थे।