पंजाब के किसानों के सामने नया संकट: खराब हो रही जमीन की सेहत, 2.30 लाख हेक्टेयर भूमि हुई क्षारीय
क्षारीय भूमि को उपजाऊ करने के लिए सिर्फ जिप्सम ही एक बेहतर उपाय है। क्षारीय भूमि में सोडियम की मात्रा ज्यादा होने के कारण भूमि में पोषक तत्व फसलों को नहीं मिल पाते। ऐसी जमीनों के लिए जिप्सम की जरूरत होती है, जिसमें मौजूद कैल्शियम सल्फेट सोडियम कार्बोनेट के साथ मिलकर सोडियम सल्फेट में बदल जाता है और वह पौधों की जड़ों से दूर धरती के नीचे पहुंच जाता है।
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पंजाब में अब जमीन की सेहत भी खराब होने लगी है। 39.67 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में 2.30 लाख हेक्टेयर भूमि ऐसी मिली है, जिसमें अम्ल के मुकाबले क्षारीय गुण ज्यादा मिले हैं। जांच के बाद पता चला है कि भूमि का पीएच 8.5 पहुंच गया है। नमक की मात्रा अधिक होने से जमीन की सतह कठोर हो रही है, जिस कारण से आवश्यकतानुसार पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे फसल की पैदावार में किसानों को परेशानी आ रही है।
1970 की हरित क्रांति ने पंजाब को भारत का अनाज भंडार बना दिया था। देश की भूख मिटाने के लिए पंजाब की कृषि भूमि का इतना दोहन किया गया, जिसकी कीमत आज पंजाब के 18 लाख से अधिक किसानों को भुगतना पड़ रहा है। अधिक फसलों की पैदावार करने के लिए राज्य में अत्यधिक रसायनों और यूरिया के इस्तेमाल के कारण अब जमीन की भी सेहत खराब होने लगी है। हाल ही में यह खुलासा हुआ है कि राज्य में तेजी से जमीन के पीएच में वृद्धि हो रही है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में कुछ ऐसे स्थान हैं जहां पर कृषि का पीएच सामान्य से 1.3 अधिक मिला है। यह आंकड़े राज्य की खेती-किसानी के लिए डराने वाले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि हाल रहा तो जल्द ही भूमि का पीएच 9.0 पहुंच जाएगा, जो जमीन को पूरी तरह से क्षारीय होने का स्तर बताता है।
जिप्सम पर 50% सब्सिडी
पंजाब सरकार ने भी खराब जमीन की सेहत सुधारने के लिए जिप्सम पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देने शुरू कर दी है। पहले चरण में किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर 20 हजार मीट्रिक टन जिप्सम मुहैया करवाई जाएगी। जिप्सम वितरण के लिए कृषि विभाग ने पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है।
किसानों को जिप्सम का लाभ लेने के लिए जिले और ब्लाक स्तर के कृषि अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। किसानों को 340 रुपये प्रति 50 किलो के मूल्य वाला जिप्सम सिर्फ 170 रुपये प्रति 50 किलो के मूल्य पर दिया जाएगा। -मनजीत सिंह बराड़, निदेशक, पंजाब एग्रो।