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Hindi News ›   Chandigarh ›   Answer sought from administration on Senior Deputy Mayor and Deputy Mayor elections

Chandigarh News: सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव पर प्रशासन से जवाब तलब

Sat, 10 Feb 2024 04:02 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 10 Feb 2024 04:02 AM IST
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Answer sought from administration on Senior Deputy Mayor and Deputy Mayor elections
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन, डीसी, डीजीपी, पीठासीन अधिकारी, मेयर व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया है।आप कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार गुरप्रीत सिंह और निर्मला देवी ने याचिका दाखिल कर बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का चुनाव 30 जनवरी को तय किया गया था। याचिका में आरोप है कि पीठासीन अधिकारी ने मेयर चुनाव के लिए मतदान पूरा होने के बाद मत पत्रों से छेड़छाड़ कर आप और कांग्रेस गठबंधन के 8 वोट अवैध करार दे दिए। ऐसा करके गठबंधन के मेयर पद के लिए उम्मीदवार कुलदीप कुमार को हारा घोषित कर दिया गया। उसी वक्त गठबंधन ने इसका विरोध किया था, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई, जिसके कारण उन्होंने सदन से वाॅकआउट कर दिया था।
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सदन से उनके वाॅकआउट के बाद भाजपा के मेयर ने उनकी गैरमौजूदगी में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव करवा लिया। याची गठबंधन की गैरमौजूदगी में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर भी भाजपा के प्रत्याशियों को विजयी घोषित किया गया, जो पूरी तरह से गलत और अलोकतांत्रिक था।
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याचिका में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव रद्द कर नए सिरे से हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में संपन्न करवाने की मांग की गई है। इसके साथ ही याचिका लंबित रहते मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के सेवाएं देने पर रोक लगाने की अपील की है। इस याचिका की सुनवाई मेयर चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका के साथ 26 फरवरी को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह याचिका काफी हद तक निर्भर होगीः जस्टिस सुधीर
जस्टिस सुधीर सिंह ने मौखिक रूप से यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मनोज सोनकर के मेयर के तौर पर बने रहने पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह याचिका काफी हद तक निर्भर होगी। सवाल यह है कि मेयर चुनाव पर क्या फैसला होगा। अगर सोनकर मेयर बने रहते हैं तो हमारे समक्ष यह सवाल होगा कि क्या विपक्ष के पार्षदों ने वॉकआउट कर अपने मताधिकार को इस्तेमाल न कर अधिकार त्याग दिया। अगर मेयर चुनाव रद्द कर दिया जाता है तो याचिकाकर्ता व अन्य के वोट देने के अधिकार को खत्म करने का सवाल ही नहीं उठता।
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