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अग्निपथ: सेना में जाने को तैयार खड़ी है हरियाणा में बेरोजगारों की फौज, सलाना दो लाख युवा करते हैं तैयारी

Wed, 15 Jun 2022 12:01 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 15 Jun 2022 12:01 AM IST
सार

भारतीय सेना में हर 10वां जवान हरियाणा से है। रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, रोहतक जिले में सबसे अधिक सेना के जवान हैं। इसी प्रकार प्रदेश में सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की संख्या करीब 20 लाख है। 

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Annually two lakh youth prepare for army recruitment in Haryana
सेना भर्ती रैली (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार की ओर से सेना भर्ती में किए गए बदलाव के चलते लांच की गई अग्निपथ भर्ती योजना में जाने के लिए हरियाणा के युवाओं की फौज तैयार खड़ी है। हरियाणा में हर साल सेना में भर्ती के लिए दो लाख से अधिक युवा तैयारी करते हैं। हालांकि, हर साल औसतन छह हजार के करीब युवा सेना में भर्ती होते रहे हैं। नई भर्ती योजना हरियाणा के बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी आस लेकर आई है। भर्ती शुरू होने से उनको न केवल देश सेवा का मौका मिलेगा, बल्कि नौकरी भी मिल सकेगी।  

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पिछले दो साल से अधिक समय से कोरोना काल व अन्य कारणों से सेना की खुली भर्ती नहीं हुई है। इस कारण हरियाणा में दो साल में डेढ़ लाख से अधिक युवा ओवरएज हो चुके हैं। सेना में भर्ती शुरू कराने को लेकर युवा सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन तक चुके हैं। इतना ही नहीं राज्यसभा में भी यह मामला उठाया जा चुका है। 
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पिछले दिनों भिवानी के गांव तालू के 23 वर्षीय पवन ने इसलिए फंदा लगाकर जान दे दी थी कि वह सेना में भर्ती नहीं हो सका और ओवरएज हो गया था। भर्ती को लेकर युवाओं ने पूरे प्रदेश में आंदोलन भी चलाया हुआ है। ऐसे में अग्निपथ भर्ती योजना उनके लिए सेना में भर्ती होने की आस लेकर आई है। गौरतलब है कि भारतीय सेना में हर 10वां जवान हरियाणा से है। रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, रोहतक जिले में सबसे अधिक सेना के जवान हैं। इसी प्रकार प्रदेश में सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की संख्या करीब 20 लाख है। 
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चार साल बाद क्या करेंगे युवा: श्वेता ढुल
नौकरियों को लेकर मुखर सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता ढुल ने केंद्र सरकार की इस योजना पर सवाल उठाए हैं। ढुल का कहना है कि वो चार साल ही जिंदगी के काफी अहम होते हैं, सवाल ये है कि चार साल बाद युवा क्या करेंगे। देश की सुरक्षा का मामला होने के चलते यह और भी गंभीर हो जाता है। इसलिए कम से कम सेना में तो प्रॉपर तरीके से भर्ती होनी चाहिए। अगर सेना में भी ठेका प्रथा शुरू हुई तो सरकारी नौकरी तो कहीं बचेंगी ही नहीं।

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