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बिजली कर्मचारियों पर हो रहे कार्रवाई के खिलाफ संघर्ष शुरु करने का एलान
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चंडीगढ़। बिजली विभाग के निजीकरण खिलाफ 22 व 23 फरवरी को कर्मचारियों ने हड़ताल की थी और अब यूटी प्रशासन हड़ताल में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। बिजली कर्मचारियों की राष्ट्रीय समन्वय समिति ने प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ संघर्ष शुरू करने का एलान किया है।
इसे लेकर शनिवार को सेक्टर-29 स्थित भकना भवन में कन्वेंशन का आयोजन किया गया। नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर (एनसीसीओईईई) के राष्ट्रीय नेता शैलेन्द्र दुबे की अध्यक्षता में आयोजित इस कन्वेंशन में हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, चंडीगढ़ व जम्मू कश्मीर के बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों के ने हिस्सा लिया। कन्वेंशन का संचालन कमेटी के कन्वीनर प्रशांत नंदी चौधरी ने किया। नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर के नेता सुभाष लांबा की ओर से रखे गए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से हड़ताल को रोकने के लिए लगाए गए एस्मा, हड़ताली कर्मियों के खिलाफ दर्ज किए मुकदमों व चार्जशीट को वापस लेने, नौकरी से बर्खास्त किए गए 17 ठेकाकर्मियों को वापस ड्यूटी पर लेने, वेतनमान संशोधित करने, बंद पड़ी छुट्टियां बहाल करने और चंडीगढ़ में शांति स्थापित करने के लिए बिजली विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई।
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मांगों को स्वीकार नहीं किया तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन होगा तेज
कन्वेंशन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय नेता शैलेन्द्र दुबे, प्रशांत नंदी चौधरी, मोहन शर्मा, अभिमन्यु धनखड़, रमेश शर्मा और पदमजीत सिंह ने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर कन्वेंशन में पारित किए गए प्रस्ताव में शामिल मांगों को स्वीकार नहीं किया तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 28-29 मार्च को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल में करोड़ों का मुनाफा कमाने वाले चंडीगढ़ के बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने और इसको बचाने के लिए संघर्ष कर रहे बिजली कर्मियों के उत्पीडऩ के मामले को देशभर में उठाया जाएगा। कन्वेंशन में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान व सलाहकार धर्मपाल से मुलाकात करने का भी फैसला लिया गया। कन्वेंशन में यूटी पावरमैन यूनियन चंडीगढ़ के प्रधान ध्यान सिंह व महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने संबोधित किया और कर्मचारियों से निर्णायक आंदोलन की तैयारी करने का आह्वान किया।
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इसे लेकर शनिवार को सेक्टर-29 स्थित भकना भवन में कन्वेंशन का आयोजन किया गया। नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर (एनसीसीओईईई) के राष्ट्रीय नेता शैलेन्द्र दुबे की अध्यक्षता में आयोजित इस कन्वेंशन में हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, चंडीगढ़ व जम्मू कश्मीर के बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों के ने हिस्सा लिया। कन्वेंशन का संचालन कमेटी के कन्वीनर प्रशांत नंदी चौधरी ने किया। नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर के नेता सुभाष लांबा की ओर से रखे गए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
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बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से हड़ताल को रोकने के लिए लगाए गए एस्मा, हड़ताली कर्मियों के खिलाफ दर्ज किए मुकदमों व चार्जशीट को वापस लेने, नौकरी से बर्खास्त किए गए 17 ठेकाकर्मियों को वापस ड्यूटी पर लेने, वेतनमान संशोधित करने, बंद पड़ी छुट्टियां बहाल करने और चंडीगढ़ में शांति स्थापित करने के लिए बिजली विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई।
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मांगों को स्वीकार नहीं किया तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन होगा तेज
कन्वेंशन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय नेता शैलेन्द्र दुबे, प्रशांत नंदी चौधरी, मोहन शर्मा, अभिमन्यु धनखड़, रमेश शर्मा और पदमजीत सिंह ने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर कन्वेंशन में पारित किए गए प्रस्ताव में शामिल मांगों को स्वीकार नहीं किया तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 28-29 मार्च को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल में करोड़ों का मुनाफा कमाने वाले चंडीगढ़ के बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने और इसको बचाने के लिए संघर्ष कर रहे बिजली कर्मियों के उत्पीडऩ के मामले को देशभर में उठाया जाएगा। कन्वेंशन में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान व सलाहकार धर्मपाल से मुलाकात करने का भी फैसला लिया गया। कन्वेंशन में यूटी पावरमैन यूनियन चंडीगढ़ के प्रधान ध्यान सिंह व महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने संबोधित किया और कर्मचारियों से निर्णायक आंदोलन की तैयारी करने का आह्वान किया।