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बड़खल हुई बेहाल, बच्चे करते यहां मस्ती धमाल
राजकुमार भारद्वाज/अमर उजाला, बड़खल (फरीदाबाद)
Updated Sun, 17 Aug 2014 04:36 PM IST
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कभी दिल्ली और हरियाणा के लोगों के लिए पर्यटन का सबसे बड़ा आकर्षण रही बड़खल झील अब अपनी प्राकृतिक खूबसूरती खोती जा रही है। आसपास लगे मिनरल वाटर संयंत्र, बहुमंजिला भवनों का निर्माण, पहाड़ों पर खनन बड़खल के दुश्मन साबित हुए हैं।
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बड़खल में अब पानी की बूंद नहीं है और यह अब आसपास के बच्चों के लिए क्रिकेट का मैदान है। बीते सात वर्षों से सूखी इस झील में पानी लाने के अब तक के सारे प्रयास विफल हुए हैं। बड़खल झील 1947 में सिंचाई के मकसद से फरीदाबाद के पश्चिम में अरावली की पहाड़ियों में अस्तित्व में आई। झील के साथ स्थित बड़खल गांव के कारण इसका नाम भी यही पड़ गया।
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बड़खल के 67 साल के बुजुर्ग नजीर अहमद के मुताबिक किसी जमाने में यह इलाका एक तरह से बेदखल ही था। यहां पानी के छोटे -छोटे खालों, गड्ढों के साथ अद्भुत हरियाली थी। कुछ ही दूरी पर स्थित सूर्य मंदिर और सूर्य कुंड इसे आकर्षक बनाते थे।
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वर्ष 1966 में हरियाणा बना और राज्य के पर्यटन विभाग ने इस झील को सिंचाई विभाग से अपने अधीन ले लिया। इसके कई वर्ष बाद भी इस झील से बल्लभगढ़ तक के किसानों को फायदा होता था। झील के कारण ही बड़खल एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हुआ। लेकिन झील की देखभाल नहीं हो पाई।
आसपास के पहाड़ों पर हुए खनन से बड़खल में बारिश के आने वाले पानी के सारे मार्ग अवरुद्ध हो गए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक झील से 500 मीटर की दूरी तक भवन निर्माण और खनन पर प्रतिबंध है, लेकिन यहां यह लगातार चलता है।
सात साल से झील में पानी लाने के प्रयास नाकाम
आसपास बनी बहुमंजिला इमारतों में लगे सबमर्सिबल पंपों से जमीन का पानी बेतहाशा तरीके से निकाला जा रहा है। सरकारी तंत्र और पानी के कारोबारियों की सांठगांठ के चलते अरावली की इन पहाड़ियों और झील की तलहटी में मिनरल वाटर के संयत्र लग गए हैं। भूजल स्तर बहुत नीचे चला गया है।
सबमर्सिबल के माध्यम से झील को भरने के तमाम प्रयास असफल हो गए हैं। जितना पानी खींचा जाता है, उससे झील की ही प्यास नहीं बुझ पाती। वैज्ञानिक नरेंद्र खट्टर के मुताबिक इलाके में पानी का संकट न हो इसके लिए खनन, मिनरल वॉटर संयंत्रों और बहुमंजिला भवन निर्माण पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।
सपना ही रहा गया ड्रीम वैली प्रोजेक्ट
पर्यटन निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने गुड़गांव रोड स्थित थर्मल पॉवर से डिस्पोजल राखी मिश्रित पानी को शुद्ध करके झील में लाने की योजना बनाई। लेकिन यह अधर में ही लटक गई। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान भी इस झील में पानी लाने की योजना वाया चंडीगढ़ दिल्ली पहुंची लेकिन कुछ नहीं हुआ।
वर्षा का पानी लाने के लिए अरावली के पहाड़ों की खदानों के चारों ओर रिंग बांध बनाए गए, लेकिन पानी की एक बूंद झील तक नहीं आ पाई। दो करोड़ रुपये का ड्रीम वैली प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। राज्य सरकार ने भूजल स्रोतों का पता लगाया, नहरी पानी को झील में लाने पर विचार हुआ, लेकिन हुआ कुछ नहीं।