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Chandigarh News: काली माता मंदिर में फिर निकलीं प्राचीन आकृतियां
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कालका। प्राचीन श्री काली माता मंदिर में खोदाई के दौरान पुरातात्विक महत्व की आकृतियां निकलने का सिलसिला जारी है। सोमवार को भी खोदाई में कुछ प्राचीन शिलाएं निकलीं। इसकी सूचना मिलते ही आसपास के लोग मंदिर परिसर में एकत्र हो गए और शिलाओं को देखने पहुंचे।
प्राथमिक जांच में ये शिलाएं खंभेनुमा और उनके आधार (बेस) जैसी प्रतीत हो रही हैं। फिलहाल इन्हें सुरक्षित रख लिया गया है। अब पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की टीम इनकी विस्तृत जांच करेगी। अधिकारियों का मानना है कि ये अवशेष 11वीं सदी में यहां मौजूद रहे प्राचीन मंदिर का हिस्सा हो सकते हैं।
सोमवार को मिली नई आकृतियों पर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने कहा कि ये अवशेष भी 11वीं सदी के मंदिर का ही भाग लग रहे हैं। प्राचीन काल में हरियाणा में कई भव्य मंदिर थे। कुरुक्षेत्र को तो मंदिरों का शहर कहा जाता था लेकिन विदेशी आक्रांताओं ने कई मंदिरों को नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मिल रहे ऐसे अवशेष प्राचीन मंदिर स्थापत्य की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं।
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पहले भी मिल चुकी हैं मूर्ति और चक्रनुमा शिलाएं
इससे पहले भी मंदिर में खोदाई के दौरान भगवान शिव की प्राचीन मूर्ति और चक्रनुमा शिलाएं मिली थीं। इन अवशेषों की जांच के लिए पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक ने स्थल का दौरा किया था। जांच के बाद उन्होंने पुष्टि की थी कि ये शिलाएं 11वीं सदी की हैं और प्रतिहार शैली में निर्मित प्रतीत होती हैं। डॉ. परमार ने कहा था कि ये अवशेष भारत की प्राचीन मूर्तिकला और स्थापत्य कला का प्रमाण हैं। इससे संकेत मिलता है कि 11वीं सदी में यहां एक विशाल मंदिर रहा होगा। उन्होंने उस समय यह भी संभावना जताई थी कि खोदाई आगे बढ़ने पर और भी महत्वपूर्ण अवशेष मिल सकते हैं।
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प्राथमिक जांच में ये शिलाएं खंभेनुमा और उनके आधार (बेस) जैसी प्रतीत हो रही हैं। फिलहाल इन्हें सुरक्षित रख लिया गया है। अब पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की टीम इनकी विस्तृत जांच करेगी। अधिकारियों का मानना है कि ये अवशेष 11वीं सदी में यहां मौजूद रहे प्राचीन मंदिर का हिस्सा हो सकते हैं।
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सोमवार को मिली नई आकृतियों पर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने कहा कि ये अवशेष भी 11वीं सदी के मंदिर का ही भाग लग रहे हैं। प्राचीन काल में हरियाणा में कई भव्य मंदिर थे। कुरुक्षेत्र को तो मंदिरों का शहर कहा जाता था लेकिन विदेशी आक्रांताओं ने कई मंदिरों को नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मिल रहे ऐसे अवशेष प्राचीन मंदिर स्थापत्य की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं।
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पहले भी मिल चुकी हैं मूर्ति और चक्रनुमा शिलाएं
इससे पहले भी मंदिर में खोदाई के दौरान भगवान शिव की प्राचीन मूर्ति और चक्रनुमा शिलाएं मिली थीं। इन अवशेषों की जांच के लिए पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक ने स्थल का दौरा किया था। जांच के बाद उन्होंने पुष्टि की थी कि ये शिलाएं 11वीं सदी की हैं और प्रतिहार शैली में निर्मित प्रतीत होती हैं। डॉ. परमार ने कहा था कि ये अवशेष भारत की प्राचीन मूर्तिकला और स्थापत्य कला का प्रमाण हैं। इससे संकेत मिलता है कि 11वीं सदी में यहां एक विशाल मंदिर रहा होगा। उन्होंने उस समय यह भी संभावना जताई थी कि खोदाई आगे बढ़ने पर और भी महत्वपूर्ण अवशेष मिल सकते हैं।