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...तो अमरनाथ यात्रा के मार्ग में नहीं मिलेंगा लंगर

Thu, 05 Mar 2015 08:44 AM IST
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर Updated Thu, 05 Mar 2015 08:44 AM IST
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anchor institutions angered to amarnath yatra shrine board

श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान बालटाल और चंदनवाड़ी के अलावा अन्य रास्तों पर लंगर लगाने वाली संस्थाएं इस बार श्राइन बोर्ड से नाराज हैं। श्राइन बोर्ड ने इस बार लंगर संस्थाओं पर तमाम शर्तें थोपी हैं।

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शर्तों को पूरा नहीं करने पर पांच हजार से बीस हजार रुपये तक जुर्माना होगा या फिर तीन साल के लिए लंगर लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन सब शर्तों के विरोध में श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन (एसएबीएलओ) ने बैठक कर फैसला लिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी कोई भी लंगर अमरनाथ यात्रा के दौरान नहीं लगेगा।
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आर्गेनाइजेशन के प्रधान विजय ठाकुर व महासचिव राजन गुप्ता ने बताया कि श्राइन बोर्ड ने कई नई शर्तें लागू की हैं, जो लंगरों को प्रभावित करती हैं। इन शर्तों में यात्रा को कामयाब न होने की बोर्ड की नीति साफ नजर आ रही है।
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बोर्ड ने लंगर वालों को राशन और टेंट का अन्य सामान रखने के लिए दस बाय पंद्रह की जगह बेस कैंप बनाने को दी है। जो बेहद कम है। इतनी कम जगह में सेवादार कहां रहेंगे और सामान कहां रखा जाएगा। दो माह तक लंगर लगता है उसके मुताबिक राशन लेकर जाना है। वे राशन इतनी कम जगह पर नहीं रख पाएंगे।

प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को देंगे मांग पत्र

anchor institutions angered to amarnath yatra shrine board

इसके अलावा लंगर वाले रात के समय श्रद्धालुओं को लंगर में सोने नहीं देंगे। बोर्ड ने लंगर वालों को आदेश दिए हैं कि पानी वाला फिल्टर लगाएं। गुप्ता का कहना है कि फिल्टर बिजली के बिना नहीं चलता और उसे पानी का प्रेशर भी चाहिए।

जिन ऊंचाइयों पर लंगर लगे हैं वहां पर बिजली का बोर्ड ने प्रबंध नहीं किया है। लंगर वालों को मिनरल वाटर भी रखने की अनुमति नहीं दी है। लंगर वाले श्रद्धालुओं को दवा भी नहीं दे सकते हैं। इस बार लंगर में सेवा करने वाले सेवादारों को वर्दी पहनाने की बात कही है। लंगर वालों को राशन, मिट्टी के तेल व रसोई गैस पर कोई सब्सिडी तक नहीं दी है।

प्रधान विजय ठाकुर व महासचिव राजन गुप्ता ने कहा कि लंगर समितियां अपनी मांगों संबंधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ को मांगपत्र सौंपेगी। पिछली बार संस्थाओं ने मांगों को लेकर जंतरमंतर पर धरना दिया था। उसके बाद प्रधानमंत्री व गृहमंत्री कार्यालय में मांगपत्र दिया था।

उन्हें कहा गया था कि एक माह में जवाब देंगे लेकिन सात महीने से ज्यादा समय बीत चुका है अब तक दोनों कार्यालय से कोई पत्र नहीं मिला है। आर्गेनाइजेशन ने यात्रा के दौरान सेना और पैरामिलिट्री फोर्स लगाने की मांग की है।

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