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पकड़ा जाएगा अमृतपाल: हर कदम पपलप्रीत की सलाह पर उठा रहा था, अब चढ़ेगा पुलिस के हत्थे
Mon, 10 Apr 2023 03:16 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 10 Apr 2023 03:16 PM IST
सार
पपलप्रीत सिंह का बब्बर खालसा समेत कई खालिस्तान समर्थक संगठनों से संबंध रहा है। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह पंथक मामलों की अच्छी जानकारी रखता है। देश-विदेश में खालिस्तान समर्थक कई समूहों और नेताओं से पपलप्रीत के संबंध हैं। खालिस्तान का प्रचार करने वाले मीडिया में उसकी अच्छी पैठ है।
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अमृतपाल के साथ पपलप्रीत सिंह।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
18 मार्च से पंजाब पुलिस की गिरफ्त से बाहर अमृतपाल सिंह पर शिकंजा कसने लगा है। पुलिस ने उसके सबसे खास साथी पपलप्रीत सिंह को सोमवार को होशियारपुर से पकड़ लिया है। पपलप्रीत ही अमृतपाल की फरारी का मास्टर माइंड था।
अमृतपाल को उसके चाचा ने सरेंडर करने को कहा था लेकिन पपलप्रीत ने उसे फरार होने को कहा। इसके बाद पपलप्रीत साये की तरह उसके साथ रहा। आखिरी बार मार्च के अंत में पपलप्रीत को होशियारपुर के एक डेरे में देखा गया था। तभी से माना जा रहा था कि अमृतपाल और पपलप्रीत के रास्ते अलग हो चुके हैं। अब पपलप्रीत के गिरफ्त में आने के बाद पुलिस को उम्मीद है कि अमृतपाल भी जल्द शिकंजे में होगा।
यह भी पढ़ें : Operation Amritpal: 23 दिन बाद पंजाब पुलिस को बड़ी कामयाबी, अमृतपाल का साथी पपलप्रीत होशियारपुर से गिरफ्तार
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पपलप्रीत अमृतसर के गांव मरड़ी कलां का रहने वाला है। अमृतपाल के माध्यम से वारिस पंजाब दे को मजबूत कर खालिस्तान का खाका खींचने का पूरा षड्यंत्र उसी ने रचा था। 18 मार्च के बाद अमृतपाल को फरार करवाने में भी उसकी मुख्य भूमिका है। पपलप्रीत हमेशा से विवादों में रहा है।
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अमृतपाल को उसके चाचा ने सरेंडर करने को कहा था लेकिन पपलप्रीत ने उसे फरार होने को कहा। इसके बाद पपलप्रीत साये की तरह उसके साथ रहा। आखिरी बार मार्च के अंत में पपलप्रीत को होशियारपुर के एक डेरे में देखा गया था। तभी से माना जा रहा था कि अमृतपाल और पपलप्रीत के रास्ते अलग हो चुके हैं। अब पपलप्रीत के गिरफ्त में आने के बाद पुलिस को उम्मीद है कि अमृतपाल भी जल्द शिकंजे में होगा।
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पपलप्रीत अमृतसर के गांव मरड़ी कलां का रहने वाला है। अमृतपाल के माध्यम से वारिस पंजाब दे को मजबूत कर खालिस्तान का खाका खींचने का पूरा षड्यंत्र उसी ने रचा था। 18 मार्च के बाद अमृतपाल को फरार करवाने में भी उसकी मुख्य भूमिका है। पपलप्रीत हमेशा से विवादों में रहा है।
बब्बर खालसा की रिपोर्ट प्रकाशित करने पर हुआ था गिरफ्तार
पपलप्रीत पुलिस ने शमशीर-ए-दस्त नाम की एक पत्रिका में बब्बर खालसा की रिपोर्ट प्रकाशित करने पर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस को उसका लैपटॉप एक कुएं से मिला था, जिसमें पत्रिका का सारा रिकॉर्ड था। वह खालिस्तान समर्थक पत्रिका फतेहनामा के लिए भी आतंकवादियों के समर्थन में लेख लिखता रहा है।
दमदमी टकसाल के तीन प्रमुख ग्रुपों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ पपलप्रीत की काफी निकटता है। वह सिख यूथ फ्रंट बना कर 1984 के दंगा पीड़ितों के लिए भी आवाज उठाता रहा है। शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के यूके विंग के हस्तक्षेप से उसे युवा विंग के चीफ आर्गेनाइजर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद उसने सिख यूथ फ्रंट को भंग कर शिअद (अमृतसर) में मिला दिया था।
सरबत खालसा में आतंकी का बयान पढ़ने पर दर्ज हुआ था देशद्रोह का केस
इसके बाद नेवर फॉरगेट 84 वेबसाइट के लिए काम करता रहा। पीड़ित परिवारों के फोटो व आर्टिकल लिखता रहा। इसके बाद उसने विदेश से चल रहे आवाज-ए-कौम पोर्टल और ई-पेपर के लिए भी काम करना शुरू कर दिया। बाद में भिडरांवाले के परिवार के साथ मिलकर भी मीडिया का काम संभालता रहा।
वर्ष 2015 में जेल में बंद आतंकवादी नारायण सिंह चौड़ा का बयान पपलप्रीत सिंह ने सरबत खालसा के दौरान स्टेज से पढ़ा था। इसके बाद उस पर देशद्रोह का केस दर्ज हुआ था। गांव के कुछ युवाओं के साथ विवाद को लेकर भी उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। काफी समय तक पपलप्रीत अंडर ग्राउंड रहा। अमृतपाल के वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख बनने के बाद उसकी सभी गतिविधियों को पपलप्रीत ही संचालित कर रहा था।
पपलप्रीत पुलिस ने शमशीर-ए-दस्त नाम की एक पत्रिका में बब्बर खालसा की रिपोर्ट प्रकाशित करने पर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस को उसका लैपटॉप एक कुएं से मिला था, जिसमें पत्रिका का सारा रिकॉर्ड था। वह खालिस्तान समर्थक पत्रिका फतेहनामा के लिए भी आतंकवादियों के समर्थन में लेख लिखता रहा है।
दमदमी टकसाल के तीन प्रमुख ग्रुपों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ पपलप्रीत की काफी निकटता है। वह सिख यूथ फ्रंट बना कर 1984 के दंगा पीड़ितों के लिए भी आवाज उठाता रहा है। शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के यूके विंग के हस्तक्षेप से उसे युवा विंग के चीफ आर्गेनाइजर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद उसने सिख यूथ फ्रंट को भंग कर शिअद (अमृतसर) में मिला दिया था।
सरबत खालसा में आतंकी का बयान पढ़ने पर दर्ज हुआ था देशद्रोह का केस
इसके बाद नेवर फॉरगेट 84 वेबसाइट के लिए काम करता रहा। पीड़ित परिवारों के फोटो व आर्टिकल लिखता रहा। इसके बाद उसने विदेश से चल रहे आवाज-ए-कौम पोर्टल और ई-पेपर के लिए भी काम करना शुरू कर दिया। बाद में भिडरांवाले के परिवार के साथ मिलकर भी मीडिया का काम संभालता रहा।
वर्ष 2015 में जेल में बंद आतंकवादी नारायण सिंह चौड़ा का बयान पपलप्रीत सिंह ने सरबत खालसा के दौरान स्टेज से पढ़ा था। इसके बाद उस पर देशद्रोह का केस दर्ज हुआ था। गांव के कुछ युवाओं के साथ विवाद को लेकर भी उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। काफी समय तक पपलप्रीत अंडर ग्राउंड रहा। अमृतपाल के वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख बनने के बाद उसकी सभी गतिविधियों को पपलप्रीत ही संचालित कर रहा था।