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Chandigarh News: स्पार्टाथलॉन रेस पूरी करने के लिए 60 घंटे तक नही सोये अमित सिंगला
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चंडीगढ़। स्पार्टाथलॉन रेस पूरी करने के लिए अमित सिंगला 60 घंटे तक नही सोये। यह दुनिया की सबसे कठिन अल्ट्रामैराथन में से एक है। यह दौड़ एथेंस से स्पार्टा तक 246 किलोमीटर की दूरी तय की। इसे तय करने में 34 घंटे 34 मिनट का समय लगा। लगातार चलने के कारण उन्हें तीन बार कपड़े चेंज करने पड़े। उन्होंने कहा कि इस रेस के लिए 60 घंटे बिना सोए रहे।
यह बात अमित सिंगला ने सेक्टर 10 के होटल माउंट व्यू में प्रेसवार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इस रेस के लिए 75 पॉइंट थे। उन्हें नियम के अनुसार पार किया।
उन्होंने कहा कि वे अपने व्यावसायिक दायित्वों, पारिवारिक जीवन और दौड़ने के जुनून के बीच संतुलन बनाते हुए इस रेस की तैयारी में 2,700 किलोमीटर से अधिक दौड़ का अभ्यास किया। उन्होंने कहा कि अभ्यास के लिए सुखना लेक पर रात रात भर दौड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे चंडीगढ़ से शिमला तक भी दौड़ कर गए हैं।
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पीईसी चंडीगढ़ और यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन (अमेरिका) के पूर्व छात्र अमित सिंगला वर्तमान में इन्फोसिस में एसोसिएट पार्टनर हैं। उन्हें बिजनेस कंसल्टिंग में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
दुनियाभर से आए 400 से अधिक प्रतिभागियों में से केवल आधे ही इस कठिन रेस को पूरा कर पाए। अमित का यह उपलब्धि उन्हें स्पार्टाथलॉन के इतिहास में अब तक के केवल 11 भारतीयों की विशिष्ट सूची में शामिल करती है जिन्होंने यह कारनामा किया है।
अमित सिंगला ने कहा कि यह दौड़ सिर्फ सहनशक्ति की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और जज्बे की परीक्षा थी। हर किलोमीटर ने मेरी मानसिक शक्ति को शरीर से ज्यादा परखा। फिनिश लाइन पर भारतीय तिरंगा लेकर पहुंचना मेरे जीवन का सबसे गर्व का क्षण था।
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यह बात अमित सिंगला ने सेक्टर 10 के होटल माउंट व्यू में प्रेसवार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इस रेस के लिए 75 पॉइंट थे। उन्हें नियम के अनुसार पार किया।
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उन्होंने कहा कि वे अपने व्यावसायिक दायित्वों, पारिवारिक जीवन और दौड़ने के जुनून के बीच संतुलन बनाते हुए इस रेस की तैयारी में 2,700 किलोमीटर से अधिक दौड़ का अभ्यास किया। उन्होंने कहा कि अभ्यास के लिए सुखना लेक पर रात रात भर दौड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे चंडीगढ़ से शिमला तक भी दौड़ कर गए हैं।
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पीईसी चंडीगढ़ और यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन (अमेरिका) के पूर्व छात्र अमित सिंगला वर्तमान में इन्फोसिस में एसोसिएट पार्टनर हैं। उन्हें बिजनेस कंसल्टिंग में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
दुनियाभर से आए 400 से अधिक प्रतिभागियों में से केवल आधे ही इस कठिन रेस को पूरा कर पाए। अमित का यह उपलब्धि उन्हें स्पार्टाथलॉन के इतिहास में अब तक के केवल 11 भारतीयों की विशिष्ट सूची में शामिल करती है जिन्होंने यह कारनामा किया है।
अमित सिंगला ने कहा कि यह दौड़ सिर्फ सहनशक्ति की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और जज्बे की परीक्षा थी। हर किलोमीटर ने मेरी मानसिक शक्ति को शरीर से ज्यादा परखा। फिनिश लाइन पर भारतीय तिरंगा लेकर पहुंचना मेरे जीवन का सबसे गर्व का क्षण था।