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Hindi News ›   Chandigarh ›   Amendment in Act necessary to protect women lawyers from physical harassment at workplace, says High Court

Highcourt: महिला वकीलों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए एक्ट में हो संशोधन, मंत्रालय को नोटिस

Tue, 19 Mar 2024 11:37 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 19 Mar 2024 11:37 AM IST
सार

एडवोकेट कनु शर्मा व अन्य ने एडवोकेट जगतार सिंह सिद्घू के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में 2000 महिला वकील हैं और 700 पूरी तरह से एक्टिव हैं। बार एसोसिएशन में महिला वकीलों को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए कोई कमेटी नहीं है।

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Amendment in Act necessary to protect women lawyers from physical harassment at workplace, says High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कानून में चूक के चलते महिला वकीलों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाने में बाधा पड़ने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। अदालत ने नियोक्ता की परिभाषा बदलने पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय व कानून एवं न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट कनु शर्मा व अन्य ने एडवोकेट जगतार सिंह सिद्घू के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में 2000 महिला वकील हैं और 700 पूरी तरह से एक्टिव हैं। बार एसोसिएशन में महिला वकीलों को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए कोई कमेटी नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सहित हरियाणा व पंजाब में मौजूद सभी बार एसोसिएशन में एक एडहॉक कमेटी गठित करने का आदेश दिया जाए। 
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हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि हाईकोर्ट में इसके लिए कमेटी मौजूद है और ऐसे में वकील उनके पास जा सकते हैं। यह कमेटी इतनी शक्तिशाली है कि जजों के खिलाफ शिकायतें तक सुनी जाती हैं। इस पर याची पक्ष ने कहा कि वकीलों का मामला अलग है और वे इस कमेटी के पास एक्ट के अनुसार शिकायत नहीं कर सकते।
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हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि एक्ट के अनुसार नियोक्ता और कर्मचारी की स्थिति में ही ऐसा किया जा सकता है और न तो बार एसोसिएशन वकीलों की नियोक्ता है और न ही वकील कर्मचारी। यह कानून की खामी है जिसके चलते इस प्रकार की कमेटी गठित करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। इसके लिए सबसे पहले एक्ट में संशोधन करना जरूरी है, ताकि उचित आदेश जारी किए जा सकें। इस मामले का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने अब महिला एवं बाल विकास मंत्रालय व कानून एवं न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए इस बारे में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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