पीजीआई: एंबुलेंस रैकेट से छुटकारा मिलते ही बढ़ी मरीजों की परेशानी
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पीजीआई में प्राइवेट ट्रांसपोर्टरों के फर्जी एंबुलेंस रैकेट से छुटकारा मिलने के बाद मरीजों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। पीजीआई ने जिन एनजीओ की एंबुलेंस और मोर्चरी वैन को अधिकृत किया है, उनके रेट तय नहीं हैं। कोई किलोमीटर के हिसाब से रुपये ले रहा है तो किसी ने जगहों के हिसाब से रेट तय कर दिए हैं। कोई छोटी गाड़ी के लिए बड़ी गाड़ी के रुपये वसूल रहा है। रेट पर कोई भी लगाम नहीं है। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। इस बारे में पीजीआई ने सभी एनजीओ से आग्रह किया था कि वे आपस में रेट तय कर लें। सभी मरीजों से एक जैसा ही रेट लेंगे, ताकि किसी को दिक्कत न आए।
लाइफ लाइन एनजीओ ने रेट फिक्स किए लाइफ लाइन एनजीओ ने ट्राइसिटी के रेट फिक्स कर दिए हैं। चंडीगढ़ के किसी भी कोने में जाने के लिए 300, मोहाली के लिए 400, पंचकूला के लिए 400, जीरकपुर के लिए 500, डेराबस्सी के लिए 700, बरवाला के लिए 800, रायपुररानी के लिए 900, खरड़ के लिए 600, कुराली के लिए 800, मोरिंडा के लिए 800, पिंजौर के लिए 700 और कालका के लिए 800 रुपये फिक्स कर दिया है। मोर्चरी वैन के लिए चंडीगढ़ 350 रुपये, मोहाली 500, पंचकूला 500, जीरकपुर 600, डेराबस्सी 800, बरवाला 900, रायपुररानी 1000, खरड़ 700, कुराली 900, मोरिंडा 900, पिंजौर 800 और कालका 900 रुपये फिक्स किए हैं।
इनके रेट अलग तरह के श्री माता मनसा देवी सेवक दल के रेट अलग हैं और लाइफ लाइन एनजीओ के मुकाबले कम हैं। माता मनसा सेवक दल जीरकपुर के लिए 400 रुपये ले रही है, जबकि लाइफ लाइन एनजीओ 500 रुपये, डेराबस्सी के लिए सेवक दल 450 रुपये ले रही है जबकि लाइफ लाइन एनजीओ 700 रुपये। कालका के लिए सेवक दल नौ रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से रुपये ले रही है। किलोमीटर और गाड़ी धुलवाई मिलाकर करीब 600 रुपये रेट पड़ता है, लेकिन लाइफ लाइन एनजीओ फिक्स रेट 800 रुपये ले रही है। यूटी रेडक्रॉस 30 किमी तक 300 रुपये। यदि उसके बाद गाड़ी जाती है तो नौ रुपये किलोमीटर व एसी गाड़ी के लिए दस रुपये किमी रेट लेती है।
गाड़ियों में भी खेल श्री माता मनसा देवी सेवक दल के अश्विनी खन्ना का कहना है कि रेट में तो अंतर है, साथ ही गाड़ियों में भी खेल किया जा रहा है। लाइफ लाइन एनजीओ के पास सभी छोटी गाड़ियां हैं, लेकिन रेट बड़ी गाड़ियों के हिसाब से वसूले जा रहे हैं। जब बड़ी गाड़ियों के रेट वसूले जा रहे हैं तो मरीजों को बड़ी गाड़ियां देनी चाहिए, लेकिन मरीजों को इस बात की जानकारी नहीं होती और वे ठगे जा रहे हैं।
सुशील कुमार, ट्रांसपोर्ट इंचार्ज, रेडक्रॉस ने बताया कि इस बारे में जानकारी मिली है, लेकिन किसी ने शिकायत नहीं दी है। जब तक कोई लिखित शिकायत नहीं आती, तब तक कोई कदम नहीं उठाया जा सकता।
पीएन सिंगला, प्रेसिडेंट, लाइफलाइन ने बताया कि हमने जो रेट दिए हैं, वे रेडक्रॉस के मुताबिक ही हैं। सभी रेट नार्मल हैं। हमारा काम जनता की सेवा करना है तो रेट कैसे ज्यादा ले सकते हैं।
अश्विनी खन्ना, श्री माता मनसा देवी सेवक दल ने बताया कि इसका समाधान यही है कि सभी के रेट सामान होने चाहिए। पीजीआई की ओर से कहा भी गया, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।