{"_id":"6421c73303ba988cc1892e4005a304b2","slug":"ambala-dc-saket-kumar-say-police-commissionerate-is-unconstitutional","type":"story","status":"publish","title_hn":"असंवैधानिक है पुलिस कमिश्नरेटः डीसी साकेत कुमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
असंवैधानिक है पुलिस कमिश्नरेटः डीसी साकेत कुमार
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 07 May 2014 02:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा सरकार द्वारा अंबाला और पंचकूला जिलों को मिलाकर पुलिस कमिश्नरी गठित करने की अधिसूचना को अंबाला के उपायुक्त डॉ. साकेत कुमार ने असंवैधानिक और अवैध ठहराया है। इस बाबत उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि पुलिस कमिश्नरी गठित करने की अधिसूचना सीरआरपीसी के प्रावधानों के विरुद्ध है।
विज्ञापन
अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) पीके गुप्ता को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, ‘मैंने जब अंबाला के उपायुक्त/जिलाधीश के पद पर ज्वाइन किया तो गृह विभाग की 9 अगस्त, 2011 को जारी अधिसूचना देखकर दंग रह गया।
विज्ञापन
इस अधिसूचना के मुताबिक पुलिस आयुक्त को सीआरपीसी की धारा 107 से 122 तक और 124, 133, 144 की शक्तियां दी गई हैं। स्थानीय पुलिस इस अधिसूचना को हरियाणा पुलिस एक्ट की धारा 8 (2) के साथ पढ़ रही है। यानी जिलाधीश सीआरपीसी के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करेंगे।’
विज्ञापन
पत्र में लिखा- ऐसे हैं अधिसूचना असंवैधानिक
डीसी साकेत कुमार ने पुलिस कमिश्नरी की अधिसूचना को असंवैधानिक और अवैध घोषित करने का कारण लिखा है कि- ‘सीआरपीसी की धारा 20 (5) के अनुसार, सब या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां केवल ‘मेट्रोपोलिटन एरिया’ में पुलिस आयुक्त को दी जा सकती हैं।
सीआरपीसी की धारा 8 के तहत मेट्रोपोलिटन एरिया की परिभाषा भी स्पष्ट लिखी हुई है। वह शहर जिसकी आबादी 10 लाख या ज्यादा हो। न अंबाला (शहर) और न अंबाला (ग्रामीण) मेट्रोपोलिटन एरिया की परिभाषा में आते हैं। इस क्षेत्र में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नहीं बैठता इसलिए यह अधिसूचना सीआरपीसी के प्रावधानों के विरुद्ध है।
भारतीय संविधान केआर्टिकल 254 के अनुसार एक राज्य का कानून केंद्र के कानून से ऊपर नहीं हो सकता। आपराधिक प्रक्रिया शेड्यूल 7 में कनकरेंट लिस्ट (समवर्ती सूची) में है। हरियाणा सरकार की यह अधिसूचना इसकी उल्लंघना करती है इसलिए इसे दुरुस्त करने की जरूरत है।
कार्यकारी मजिस्ट्रेट को सीआरपीसी के जरिए शक्तियां मिलती हैं। यहां तक कि मेट्रोपोलिटन एरिया में पुलिस आयुक्त जिलाधीश के साथ-साथ अपनी शक्तियां इस्तेमाल कर सकते हैं। सीआरपीसी जिलाधीश को मेट्रोपोलिटन एरिया और राज्य में कहीं भी शक्तियां इस्तेमाल करने पर रोक नहीं लगाती है। इसलिए हरियाणा पुलिस एक्ट की धारा 8(2) सीआरपीसी और संविधान के खिलाफ है।’
डीसी ने की अधिसूचना रद करने की सिफारिश
डीसी ने सिफारिश करते हुए कहा है कि-
- 9 अगस्त, 2011 की असंवैधानिक और अवैध अधिसूचना को तुरंत प्रभाव से संशोधित किया जाए या रद किया जाए।
- आर्म्स एक्ट और शेड्यूल में सात अन्य एक्ट की शक्तियां तुरंत वापस की जाएं जिन्हें गलती से निषेध कर दिया गया है।
- हरियाणा पुलिस एक्ट 2008 जल्दबाजी में बनाया गया और कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रोल को ध्यान में नहीं रखा गया और न ही सलाह ली गई।
- जिलाधीश की संस्था पर जानबूझकर विजय हासिल करने का प्रयास किया गया है।
- पुलिस सीआरपीसी की धारा 107, 151 में किसी आरोपी को गिरफ्तार करती है। आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है ताकि उसे सुना जा सके। अगर पुलिस उसे (आरोपी) पकड़ेगी और पुलिस अधिकारी ही उसे सुनकर खुद ही 107, 151 के तहत आदेश पारित करेंगे तो इससे प्राकृतिक न्याय का कानून लागू नहीं हुआ।
- सिविल प्रशासन पुलिस और पब्लिक के बीच मानवीय पहलू रखता है। इस प्रकार की प्रणाली के उदाहरण पुलिस और जनता के बीच हो रहे झगड़े दिल्ली या अन्य स्थानों पर देखे जा सकते हैं। इसलिए हरियाणा पुलिस एक्ट के प्रावधानों की स्टडी की जाए और पुलिस एक्ट रद्द किया जाए।
कोट
हां, अंबाला के उपायुक्त का पत्र मिला है। पत्र में उठाया मुद्दा विचाराधीन है।
पीके गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग, हरियाणा