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अमरनाथ यात्रा पूरी कर लौटे चंडीगढ़ को दो दोस्तों ने सुनाई व्यथा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Sat, 23 Jul 2016 12:56 AM IST
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amarnath yatri vinod panjeta or pramod bansal
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अमरनाथ यात्रा के दौरान दिक्कतों के अलावा कुछ भी नहीं हैं। आर्मी और सीआरपीएफ के सुरक्षा घेरे में गाडि़यां बढ़ रही हैं। यह कहना है बिजनेसमैन विनोद पंजेटा का। विनोद पंजेटा 12 जुलाई को अमरनाथ यात्रा के लिए चंडीगढ़ से अपने दोस्तों के साथ निजी कार से गए थे। सब कुछ ठीक रहता तो वे 16 जुलाई को लौट आते लेकिन बंद और कर्फ्यू के कारण तीन दिन अतिरिक्त बीताना पड़ा। वे 19 जुलाई को लौटे। तीन दिनों में उनकी परेशानी काफी बढ़ गई।
जम्मू के कैंप में यात्रियों की संख्या बढ़ जाने पर वे होटल में रुके। दिन में एक किलोमीटर भी कार नहीं चली। रात में ही यात्रा हो रही है। सुरक्षा बलों के पहरे में। दिन में समय काटना मुश्किल है। जेएंडके पुलिस हेल्पफुल नहीं। वे तो रास्ता तक नहीं बताते। रात में जागना पड़ता। बड़ी मुश्किल हुई है। इस बार के अमरनाथ यात्रा में। पैसे और समय की भी बर्बादी हुई। रास्ते में कई बड़े क्षतिग्रस्त वाहन दिख रहे थे।
दिन की यात्रा खत्म...
अमर नाथयात्रा से लौटे सेक्टर-11 चंडीगढ़ निवासी बिजनेसमैन प्रमोद बंसल ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के लिए अब दिन की यात्रा नहीं है। रात को ही चलना है वह भी आर्मी और अर्द्ध सैनिक बलों की भारी सुरक्षा के बीच। सुरक्षा बलों के प्रोटेक्शन में ही गाडि़यां रात में निकलती हैं। रात में इसलिए कि दिन में गाडि़यों पर पत्थर न बरसे। हर दूसरे दिन तीन से पांच हजार यात्री यात्रा के लिए छोड़े जा रहे हैं। बड़ी संख्या में भक्तों ने यात्रा का इरादा छोड़ दिया है। श्रीनगर एयरपोर्ट से रात में ही सुरक्षा के बीच बालटाल के लिए वाहनों के काफिला के साथ ही जाना हो रहा है। सुरक्षा बल रोड क्लीयर कराते हैं तब यात्रा शुरू होती है।
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प्रमोद बंसल का कहना हैकि सावन के शुरूआत में अन्य वर्षों में हर रोज करीब 15 हजार यात्री अमरनाथ यात्रा के लिए जाते थे। खुशी और उल्लास का माहौल होता था। अब डर के साये में अमरनाथ यात्रा हो रही है। बालटाल में भंडारा कमेटियों की ओर से लगाई गई शिविर में भी भक्तों की कमी महसूस हो रही है। यात्री कम होने से भंडारा कमेटियां भी चिंतित है। जेएंडके में कर्फ्यू के कारण यह स्थिति हो रही है।
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जम्मू के कैंप में यात्रियों की संख्या बढ़ जाने पर वे होटल में रुके। दिन में एक किलोमीटर भी कार नहीं चली। रात में ही यात्रा हो रही है। सुरक्षा बलों के पहरे में। दिन में समय काटना मुश्किल है। जेएंडके पुलिस हेल्पफुल नहीं। वे तो रास्ता तक नहीं बताते। रात में जागना पड़ता। बड़ी मुश्किल हुई है। इस बार के अमरनाथ यात्रा में। पैसे और समय की भी बर्बादी हुई। रास्ते में कई बड़े क्षतिग्रस्त वाहन दिख रहे थे।
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दिन की यात्रा खत्म...
अमर नाथयात्रा से लौटे सेक्टर-11 चंडीगढ़ निवासी बिजनेसमैन प्रमोद बंसल ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के लिए अब दिन की यात्रा नहीं है। रात को ही चलना है वह भी आर्मी और अर्द्ध सैनिक बलों की भारी सुरक्षा के बीच। सुरक्षा बलों के प्रोटेक्शन में ही गाडि़यां रात में निकलती हैं। रात में इसलिए कि दिन में गाडि़यों पर पत्थर न बरसे। हर दूसरे दिन तीन से पांच हजार यात्री यात्रा के लिए छोड़े जा रहे हैं। बड़ी संख्या में भक्तों ने यात्रा का इरादा छोड़ दिया है। श्रीनगर एयरपोर्ट से रात में ही सुरक्षा के बीच बालटाल के लिए वाहनों के काफिला के साथ ही जाना हो रहा है। सुरक्षा बल रोड क्लीयर कराते हैं तब यात्रा शुरू होती है।
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प्रमोद बंसल का कहना हैकि सावन के शुरूआत में अन्य वर्षों में हर रोज करीब 15 हजार यात्री अमरनाथ यात्रा के लिए जाते थे। खुशी और उल्लास का माहौल होता था। अब डर के साये में अमरनाथ यात्रा हो रही है। बालटाल में भंडारा कमेटियों की ओर से लगाई गई शिविर में भी भक्तों की कमी महसूस हो रही है। यात्री कम होने से भंडारा कमेटियां भी चिंतित है। जेएंडके में कर्फ्यू के कारण यह स्थिति हो रही है।