पंजाब: फतेह किट खरीद व वैक्सीन विवाद पर पहली बार बोले अमरिंदर सिंह, कहा- राजनीति से प्रेरित हैं घोटाले के आरोप
पंजाब में आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल ने राज्य सरकार पर फतेह किट खरीद में अनियमितता का आरोप लगाया। वहीं भाजपा के कई केंद्रीय मंत्रियों ने केंद्र सरकार से मिलने वाली कोरोना वैक्सीन को महंगे दामों पर निजी अस्पताल को बेचने का आरोप लगा चुके हैं। इन दोनों मुद्दों पर पंजाब में राजनीति भी गरमा गई है। शिरोमणि अकाली दल ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन करना भी शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी ने स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू से इस्तीफा तक मांग लिया है। अब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया।
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विपक्षी दलों की ओर से कुछ निजी अस्पतालों को वैक्सीन सप्लाई करने और फतेह किटों की खरीद के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया और सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोगों की अनमोल जान बचाने में जुटी है। महामारी से मुनाफा कमाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
सीएम ने कहा कि शिअद और आप की नजर 2022 के विधानसभा चुनाव पर है, इसलिए ये अपने चुनावी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए बेवजह शोर मचा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी गलत काम में प्रदेश सरकार की शमूलियत नहीं है और जंग जैसे आपात मौकों पर असाधारण फैसले लेने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि सभी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया गया और आपात फैसले भी संकट से निपटने के उद्देश्य से लिए गए। उन्होंने कहा कि कथित घोटालों के बारे में मीडिया रिपोर्ट सनसनी से अधिक कुछ भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सभी फैसले लोगों के हित में लिए गए हैं और पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मामलों पर वे अपने अधिकारियों के साथ सौ फीसदी खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सभी सही कदम उठाए गए और विपक्ष का शोर-शराबा उनकी सरकार के नेक इरादों को कमजोर नहीं कर सकता।
निजी अस्पतालों को टीके मुहैया कराना समय की जरूरत थी: कैप्टन
कैप्टन ने कहा कि कुछ निजी अस्पतालों को 40000 अतिरिक्त डोज मुहैया करवाना समय की जरूरत थी, ताकि 18-45 आयु वर्ग में गैर-प्राथमिकता समूहों को भी टीकाकरण करवाने के कुछ विकल्प दिए जा सकें। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को उसी कीमत पर टीके दिए गए, जिस कीमत पर उन्हें निर्माताओं से खरीदना था।
उन्होंने कहा कि यह फैसला इस कारण लिया गया था, क्योंकि शुरू में पंजाब में केवल दो निजी अस्पताल ही थे, जो केंद्र सरकार की ओर से आरक्षित 25 प्रतिशत कोटे में से टीके खरीदने में कामयाब रहे थे। उन्होंने कहा कि विदेश जाने वाले विद्यार्थियों और अन्यों को तुरंत टीकाकरण की जरूरत थी और वह भुगतान करने के लिए तैयार थे, इसलिए राज्य सरकार ने आपातकालीन उपाय के तौर पर ये टीके निजी अस्पतालों में उपलब्ध कराने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले को सही भावना से नहीं देखा जा रहा था, इसलिए इसे वापस ले लिया गया। फतेह किटों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सराहनीय है कि स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना लहर के शिखर के दौरान भी समय पर सप्लाई को सुनिश्चित किया। इन किटों में पल्स ऑक्सीमीटर भी उपलब्ध करवाए गए, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कोई सप्लाई न मिलने के कारण इसकी कमी थी। वास्तव में पंजाब अन्य राज्यों की अपेक्षा कम मूल्य पर इसे खरीदने में कामयाब रहा। कैप्टन ने कहा कि मेरी सरकार ने हमेशा लोगों की जिंदगी बचाने को प्राथमिकता दी है और महामारी के दौरान राजनीतिक करना और गलत जानकारी फैलाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।