Amar Ujala Samvad 2023: हॉकी खिलाड़ी गुरजीत कौर बोलीं- मौका देने से देश का नाम रोशन करेंगी बेटियां
गुरजीत ने बताया कि आज भी 2018 एशियन गेम्स में दागे गोल मेरे जेहन में आज भी ताजा हैं। मैच से पहले कोच द्वारा दी गई नसीहत को ध्यान में रखकर अगले दिन मैदान में उतरी और गोल पोस्ट को ही निशाना मानकर खेलना शुरू किया और फिर एक के बाद एक गोल दागे।
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हॉकी को देश का राष्ट्रीय खेल कहा जाता है। इसमें पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्र की खिलाड़ी गुरजीत कौर ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने अमर उजाला संवाद में दर्शकों के रूबरू होते हुए कहा कि महिलाएं भी जिंदगी में कुछ पाना चाहती हैं इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों को उन्हें जिंदगी में सबकुछ करने देना चाहिए। इससे न केवल वे जिंदगी में सफल होंगी बल्कि वे देश का नाम भी रोशन करेंगी।
गुरजीत कौर ने कहा कि मैं अमृतसर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र अजनाला के पास गांव मैदी कलां से हूं। वहां लड़कियों को ज्यादा आजादी नहीं थी।बचपन में उन्हें और उनकी बड़ी बहन प्रदीप कौर को पिता सतनाम सिंह और माता हरजिंदर कौर ने पढ़ने के लिए छात्रावास में डाल दिया। वहां पर बच्चों को खेलते देखकर पिताजी से खेल में दाखिला कराने को कहा। इस पर पिताजी ने कहा कि जो अच्छा लगता है, वे दोनों बहनें कर सकती हैं। इसके बाद हॉकी मनपसंद लगी क्योंकि हॉकी में फन और एक्टिविटी ज्यादा थी। इस पर हॉकी को चुन लिया।
2018 में एशियन गेम्स में दागे आठ गोल आज भी याद
गुरजीत ने बताया कि आज भी 2018 एशियन गेम्स में दागे गोल मेरे जेहन में आज भी ताजा हैं। मैच से पहले कोच द्वारा दी गई नसीहत को ध्यान में रखकर अगले दिन मैदान में उतरी और गोल पोस्ट को ही निशाना मानकर खेलना शुरू किया और फिर एक के बाद एक गोल दागे। टूर्नामेंट में कुल आठ गोल दागे तो लोगों ने पलकों पर बैठा लिया। आज भी उसी प्रदर्शन को बनाए रखने को लेकर पूरी मेहनत करती हूं। मैदान में उतरने के दौरान दिमाग में बस टीम को जिताना ही लक्ष्य होता है।
ड्रैग फ्लिकर बनना चुनौती का काम
हॉकी में नार्मल पुश करना आसान है लेकिन ड्रैग फ्लिकर बनना बहुत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इसके लिए अलग तकनीक होती है। 2007 से 2010 तक लगातार तीन साल ड्रैग फ्लिकर बनने के लिए अभ्यास किया। आज भी भारतीय हॉकी टीम के रूपिंदर पाल सिंह से ट्रेनिंग लेती हूं जिन्हें ड्रैग फ्लिकिंग में महारत हासिल है। वे चंडीगढ़ में रहते हैं, उनसे दो सत्र में प्रशिक्षण ले लिया है लेकिन अभी और सुधार के लिए उनसे और प्रशिक्षण लेना है।
जमीनी स्तर पर खिलाड़ी निकालने के लिए हो काम
प्रदेश सरकार ने खिलाड़ियों को उनकी खेल के हिसाब से जो नौकरी देने का फैसला किया है, वह सराहनीय है। इससे प्रदेश के हजारों खिलाड़ियों के मन में आस जागी है क्योंकि खेल के बाद अगर खिलाड़ी को परिवार पालने के लिए नौकरी मिल जाए तो वह देश के लिए और बेहतर खेल सकता है। वहीं सरकार को पढ़ने वाले बच्चों को भी नौकरी देने की योजना बनानी चाहिए। खिलाड़ियों को टूर्नामेंट, हॉस्टल, ग्राउंड, कोच की सुविधा देने चाहिए। ऐसा करने से और खिलाड़ी निकलेंगे। गांवों में छोटे स्तर पर टूर्नामेंट नहीं हो रहे हैं। ऐसे टूर्नामेंट कराने से नया टैलेंट उभरकर सामने आएगा।
बच्चों को दी नसीहत
कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को सिर्फ पढ़ाई करने के लिए दबाव न डाले बल्कि बच्चों की रुचि के अनुसार उन्हें खेलों में डालें। ऐसा करने से उनका विकास होगा। वहीं बच्चों को भी चाहिए कि वे देर रात तक मोबाइल देखने के बजाय जल्दी सो कर सुबह मैदान में जाकर पसीना बहाएं।