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#हिंदीहैंहम: हिंदी देश की आवाज, लोगों में बांट रही प्रेम, आत्मविश्वास जगाएं, जरूर देगी रोजगार
Sat, 29 Aug 2020 02:09 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 29 Aug 2020 02:09 PM IST
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Hindi Hai Hum
- फोटो : अमर उजाला
पूरा देश हिंदी के जरिए आगे बढ़ रहा है। यह भाषा देश की आवाज है। देश के कुछ हिस्सों में इसे लेकर प्रदर्शन किए गए लेकिन वे नाममात्र के रहे हैं। हिंदी को लेकर किसी का विरोध नहीं है। यह भाषा प्रेम बांट रही है। यह बात विशेषज्ञों ने कही। उनका कहना है कि हिंदी बोलने व पढ़ने वाले लोग अपने में आत्मविश्वास नहीं जगा पाते हैं। यदि उनमें आत्मविश्वास इस भाषा के प्रति बढ़ जाए तो हिंदी किसी को बेरोजगार नहीं रहने देगी क्योंकि इसका क्षेत्र बढ़ रहा है।
हर भाषा में समय-समय पर बदलाव होता है। नए शब्द आते हैं और उनका शब्दकोष बनता है। ऐसे ही हिंदी के विशेषज्ञ भी समय-समय पर भाषा के शब्दों को नया रूप दें। साथ ही विद्यार्थियों को इसमें पारंगत करें।
- दीपिका शर्मा, हिंदी विशेषज्ञ पीयू
अंग्रेजी भी एक भाषा है और हिंदी भी। देश में हिंदी का अपना अलग महत्व है। यह लोगों को जोड़े रखती है। साथ ही नौकरियां भी दे रही है। सिविल सेवा से लेकर अनुवादक तक की नौकरी इसके जरिये मिल रही है। हिंदी समृद्ध हो रही है।
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- योगिता शर्मा, हिंदी विशेषज्ञ पीयू
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हर भाषा में समय-समय पर बदलाव होता है। नए शब्द आते हैं और उनका शब्दकोष बनता है। ऐसे ही हिंदी के विशेषज्ञ भी समय-समय पर भाषा के शब्दों को नया रूप दें। साथ ही विद्यार्थियों को इसमें पारंगत करें।
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- दीपिका शर्मा, हिंदी विशेषज्ञ पीयू
अंग्रेजी भी एक भाषा है और हिंदी भी। देश में हिंदी का अपना अलग महत्व है। यह लोगों को जोड़े रखती है। साथ ही नौकरियां भी दे रही है। सिविल सेवा से लेकर अनुवादक तक की नौकरी इसके जरिये मिल रही है। हिंदी समृद्ध हो रही है।
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- योगिता शर्मा, हिंदी विशेषज्ञ पीयू
हिंदी से हमें मिलती है दुनिया में पहचान
हिंदी वह भाषा है, जिससे हमें अपने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पहचान मिलती है। आज हिंदी के क्षेत्र में कई अवसर सामने आ रहे हैं। ऐसे में हमें हिंदी बोलने में शर्म नहीं करनी चाहिए। बल्कि इस भाषा के माध्यम से हमें अपनी आवाज उठानी चाहिए।
- वरूण वैद, वित्तीय सेवा सलाहकार
हिंदी हमारी मातृ भाषा है। भले ही हम किसी भी मंच पर पहुंच जाए, लेकिन हमें अपनी भाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए। यह भाषा हमें अधिकारी से लेकर देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने तक का मौका देती है। इतना ही नहीं सभी ग्रंथ भी हिंदी में हैं। यह भाषा हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति से जोड़ती है।
- गीताजंलि बाली, एडवोकेट
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। इसे प्रोत्साहित करना सबसे जरूरी है। वास्तव में हिंदी का आधार स्कूल ही बनता है। हिंदी में बोलचाल के साथ ही हिंदी में लिखना-पढ़ना भी हो तो ज्यादा अच्छा होगा। जितनी शुद्ध हिंदी बोली जाएगी, उतनी शुद्ध लिखी भी जाएगी। हमें एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। हम जितना इसका सम्मान करेंगे, उतना ही हमको सम्मान मिलेगा। हमको हिंदी को बढ़ावा देने के लिए इसके साथ ज्यादा से ज्यादा बच्चों को जोड़ना होगा।
- अंजू बिष्ट, हिंदी अध्यापिका
- वरूण वैद, वित्तीय सेवा सलाहकार
हिंदी हमारी मातृ भाषा है। भले ही हम किसी भी मंच पर पहुंच जाए, लेकिन हमें अपनी भाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए। यह भाषा हमें अधिकारी से लेकर देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने तक का मौका देती है। इतना ही नहीं सभी ग्रंथ भी हिंदी में हैं। यह भाषा हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति से जोड़ती है।
- गीताजंलि बाली, एडवोकेट
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। इसे प्रोत्साहित करना सबसे जरूरी है। वास्तव में हिंदी का आधार स्कूल ही बनता है। हिंदी में बोलचाल के साथ ही हिंदी में लिखना-पढ़ना भी हो तो ज्यादा अच्छा होगा। जितनी शुद्ध हिंदी बोली जाएगी, उतनी शुद्ध लिखी भी जाएगी। हमें एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। हम जितना इसका सम्मान करेंगे, उतना ही हमको सम्मान मिलेगा। हमको हिंदी को बढ़ावा देने के लिए इसके साथ ज्यादा से ज्यादा बच्चों को जोड़ना होगा।
- अंजू बिष्ट, हिंदी अध्यापिका
हिंदी का प्रचार-प्रसार करना आवश्यक है। अब जो वक्त आ गया है, उसमें हिंदी में अपभ्रंश की स्थिति है। अच्छी बात यह है कि जिस प्रकार से अंग्रेजी के टूटे-फूटे शब्दों का प्रयोग मैसेज में किया जाता है, वैसी स्थिति हिंदी में नहीं है। मैंने कई साहित्य पढ़े हैं और हिंदी को गहराई से जाना है। मुझे लगता है कि हिंदी के शब्दों में जो भाव होता है, वह किसी और भाषा में नहीं। मैं अपने स्कूल में हिंदी को ज्यादा से ज्यादा प्रमोट करने को कहता हूं।
- संदीप सरदाना, मानव मंगल स्कूल सेक्टर-11, पंचकूला
- संदीप सरदाना, मानव मंगल स्कूल सेक्टर-11, पंचकूला