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अपराजिता: संवाद में बोली महिलाएं- खुद से करनी होगी शुरुआत, तभी मिलेगी घरेलू हिंसा से आजादी

Wed, 26 Feb 2020 11:24 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 26 Feb 2020 11:24 AM IST
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Amar Ujala Aparajita Samvad on Woman Empowerment
संवाद में हिस्सा लेने आई महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
घरेलू हिंसा नई बात नहीं है। इसे महिलाओं ने जितना सहा, ये उतना ही बढ़ता गया। आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। अगर एक महिला को उसे अपने घर में ही सम्मान नहीं मिल पा रहा तो बाकी दुनिया जीतने की सोच बेमानी है। इसे रोकना है तो महिलाओं को ही खुद आगे आकर इसके खिलाफ खड़ा होना होगा। इसकी शुरुआत हर महिला अपने से करे, दूसरे से उम्मीद न करें।
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अब नारी को किसी भी स्तर पर कमजोर समझने का ख्याल छोड़ना होगा। जरूरत है महिलाओं को अपनी शक्ति पहचानने और उसे दिखाने की। सहने की प्रवृत्ति को छोड़कर विरोध करने की आदत डालनी होगी।  खुद अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगी तो कारवां बनता जाएगा। यह बातें शहर की महिलाओं ने मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित अपराजिता संवाद में कहीं।
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अशिक्षा से हिंसा ही शुरुआत: मोनिका अरोड़ा
वुमन पावर सोसाइटी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मोनिका अरोड़ा ने कहा कि महिला हिंसा के कई तरीके हैं। अशिक्षा से ही हिंसा की शुरुआत होती है। एक महिला को पहले अपने घर और उसके बाद ससुराल में प्रताड़ित होना पड़ता है। अच्छी नौकरी के बाद भी उसे प्रताड़ित किया जाता है। घरेलू हिंसा से बचने का शिक्षा ही इसका एकमात्र उपाय है। लड़का हो या लड़की दोनों को ही शिक्षित और संस्कारी बनाएं।
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शारीरिक और मानसिक रूप से होना होगा मजबूत: ममता सिंगला

कैंसर स्पेशलिस्ट डा. ममता सिंगला ने कहा कि घरेलू हिंसा के खिलाफ महिलाओं को शिक्षित करना ही इसे रोकने का सबसे आसान और मजबूत तरीका है। घरेलू हिंसा जैसे मामलों पर काबू के लिए विरोध की नीति को भी समाहित करना होगा, क्योंकि हर चीज में की गई हामी कई बार हमारे लिए नुकसानदेह साबित हो जाती है। घरेलू हिंसा के खिलाफ महिलाओं को मिलकर आवाज बुलंद करनी होगी।

विरोध और ना कहते कि आदत डालनी होगी: रेनू अरोड़ा
चार्टर्ड अकाउंटेंट और लेखिका रेनू अरोड़ा ने अपनी कविता के माध्यम से महिला हिंसा पर कुठाराघात किया। कहा कि आज के शिक्षित दौर में भी महिला हिंसा के बढ़ते मामलों के लिए ओछी मानसिकता जिम्मेदार है। उनका कहना है कि सदियों से महिलाएं चुपचाप अत्याचार सहती आई हैं, इसलिए अब भी ये जारी है। अब विरोध और ना कहने की आदत डालनी होगी लेकिन ध्यान इस बात का भी रहे कि कहीं उसकी आंच में हमारा परिवार न जल जाए।

बहू को बेटी बनाएं फिर देखें कमाल: बेला मनोज मोदी
गृहणी बेला मनोज मोदी ने कहा कि बेटी और बहू के बीच अंतर कर लोग अपने घर की शांति को भंग कर देते हैं। सबसे पहले इनके बीच की खाई को पाटना होगा। जिस दिन बेटी ने सास को मां और सास ने बहू को बेटी का दर्जा दे दिया, उसी दिन आधे से ज्यादा घरेलू विवाद शुरू होने से पहले ही समाप्त हो जाएंगे। महिलाओं को अपने मान-सम्मान की रक्षा खुद करनी होगी।

बच्चों को शुरू से दें समानता की शिक्षा: सरबजीत कौर

वुमन पावर संस्था की नेशनल ब्रांड एंबेसडर सरबजीत कौर ने कहा कि बदलाव की शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी होगी। यदि बच्चों को शुरू से लड़का और लड़की में समानता की शिक्षा दी जाएगी तो भविष्य में किसी प्रकार की समस्या पैदा ही नहीं होगी। औरत मां, पत्नी और बेटी के रूप में हर घर की शान होती है। अगर औरत ठान ले तो दुनिया की कोई ताकत उसे नहीं झुका सकती।

जन्म से ही बेटियों पर क्यों लगती हैं बंदिशें: वीना सोफत
पंचकूला एमडीसी निवासी वीना सोफत ने कहा कि आखिर बेटियों पर जन्म के बाद से ही बंदिशें क्यों लगने लगती हैं। संस्कार और घर की इज्जत के नाम पर उन्हें ही क्यों अपनी इच्छाओं को दबाने को कहा जाता है। शादी के बाद ससुराल वालों की तरफ से, बच्चा न होने पर, लड़की पैदा होने पर या कई अन्य तरीकों से एक लड़की को प्रताड़ित किया जाता है। ऐसी स्थिति में हार मानने की बजाय महिला को मजबूती से खड़ा होना होगा।

बेटियों को भी मिले बराबरी का दर्जा: काजल मंगलमुखी
वुमन पावर की ट्रांसजेंडर विंग की अध्यक्ष काजल मंगलमुखी ने कहा कि हर इंसान को बराबर अधिकार मिलना चाहिए। अगर हम घरेलू हिंसा पर रोक के उपाय की बात करें तो वहां औरत को अपने अधिकारों के लिए स्वयं खड़ा होना पड़ेगा। शादी जैसे अहम फैसले में लड़की की भी पसंद और नापसंद पूछी जानी चाहिए। बेटी को जन्म देने पर उसे उलाहना नहीं सम्मान देना होगा। हमें बेटियों को बराबरी का दर्जा देना होगा।

पुलिस थाने हों महिला फ्रेंडली: विर्मला सोढी

सेक्टर चार पंचकूला निवासी विर्मला सोढी ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा के कानून में बदलाव लाकर उन्हें सख्त बनाना होगा। साथ ही कानून को लागू करने में कोई कोताही न बरती जाए। क्योंकि लापरवाही से ही अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। थाने में मदद की गुहार लेकर जाने वाली महिलाओं को सीमा विवाद में उलझाने की बजाय उन्हें तत्काल मदद मिलनी चाहिए। पुलिस थानों को महिला फ्रेंडली बनाना होगा।

हिंसात्मक लोगों को अस्वीकार करना सीखें: कविता संधू
वुमन पावर की हरियाणा महिला सेल की उपप्रधान कविता संधू का कहना है कि महिलाओं को ऐसे लोगों को अस्वीकार करना सीखना होगा, जिनकी नजर में उनका कोई सम्मान नहीं। उन्हें अपने साथ होने वाले वाले हर अत्याचार के खिलाफ लड़ना होगा तभी घरेलू हिंसा पर लगाम लग सकता है। यही नहीं बेटियों को इस तरह तैयार करना होगा कि वह अपने साथ होने वाले अत्याचार पर खुलकर बोल सकें और लड़ाई लड़ सकें।

अपने अधिकारों के लिए हमें लड़ना होगा: लतिका रंधावा
हरियाणा ट्रांसजेंडर सेल की राज्य अध्यक्ष लतिका रंधावा ने कहा कि जिंदगी संघर्ष का नाम है। किसी भी प्रकार की हिंसा होने पर खुलकर विरोध करने से ही बात बनेगी। हमें अपने अपने अधिकारों के प्रति सजग होना होगा और उनके लिए लड़ना होगा। इसके साथ ही परिवार को भी अपने सभी बच्चों के लिए समान रूप से सपोर्टिव होना चाहिए।

अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी रखें: हरजोत कौर

मोहाली की हरजोत कौर ने कहा कि महिलाओं को अपने खिलाफ हो रही हिंसा का डटकर मुकाबला करना होगा। इसके लिए जरूरी है महिलाएं पहले खुद को शिक्षित करें और अपने अधिकारों के बारे में जानें। अगर बात न सुलझे तो कानून की मदद लेने से हिचके नहीं। कानूनी अधिकारों की भी जानकारी रखें, ताकि समय आने पर उसका प्रयोग कर सकें।

लड़कों को ऐसे संस्कार दें कि लड़कियों की इज्जत करें: कमलजीत कौर
पंजाब की राज्य प्रवक्ता कमलजीत कौर ने कहा कि बेटा और बेटी के भेदभाव वाला कॉन्सेप्ट खत्म होना चाहिए। एक मां को बेटा और बेटी दोनों ही बच्चों का एक समान पालन-पोषण करना होगा। असमानता और फर्क की खाई को शुरू होने देने की नौबत ही नहीं आने दें। ऐसे संस्कार दें कि लड़के लड़कियों की इज्जत करें। उन्हें अपने से कम न समझें। तभी समाज से घरेलू हिंसा की बुराई दूर होगी।
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