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एक और गबन: चंडीगढ़ में डीजीपी आवास पर एट होम कार्यक्रम के बनाए गए थे फर्जी बिल, कैसे हुआ खुलासा

Thu, 24 Apr 2025 02:09 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 24 Apr 2025 02:09 AM IST
सार

एट होम कार्यक्रम के दौरान ढाई लाख रुपये से अधिक का खर्च दिखाया गया था। संबंधित फर्म ने इस खर्च का बिल 2,97,985 रुपये का बनाकर पुलिस विभाग को स्वीकृति के लिए भेजा।

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Allegations of embezzlement through fake bills in the At Home program at DGP residence
fake bill scam - फोटो : Istock

विस्तार

साल 2021 में पुलिस वीक के दौरान तत्कालीन डीजीपी के सरकारी आवास स्थित कैंप ऑफिस में आयोजित एट होम कार्यक्रम में भी लाखों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक आईपीएस अधिकारी के इशारे पर टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए फर्जी बिल तैयार करवाए गए।
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शिकायत के अनुसार, एट होम कार्यक्रम के दौरान ढाई लाख रुपये से अधिक का खर्च दिखाया गया था। संबंधित फर्म ने इस खर्च का बिल 2,97,985 रुपये का बनाकर पुलिस विभाग को स्वीकृति के लिए भेजा। हालांकि, तत्कालीन सेक्शन ऑफिसर ने बिना टेंडर के ढाई लाख से अधिक के खर्च पर आपत्ति जताई और पुलिस अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा।
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पकड़े जाने के डर से तत्कालीन एसएसपी मुख्यालय ने सेक्शन ऑफिसर के स्पष्टीकरण का जवाब देने के बजाय निचले स्तर के एक अधिकारी को उसी बिल को जनरल फाइनेंशियल रूल्स (जीएफआर) 155 के अनुसार मैनेज करने का निर्देश दिया। इसके बाद, खर्च की राशि को ढाई लाख से नीचे दिखाने के लिए एक और फर्जी बिल तैयार किया गया।
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शिकायतकर्ता सेवानिवृत्त हवलदार जगजीत सिंह ने इस संबंध में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को सबूत के तौर पर दस्तावेज और बिल सौंपे हैं। पहले बिल में जहां चार टेंट लगाने का खर्च 1,54,470 रुपये दर्शाया गया था, वहीं मैनेज किए गए बिल में केवल दो टेंट दिखाकर इस राशि को 1,07,100 रुपये कर दिया गया। मूल बिल 2,97,985 रुपये का था, जिसे बदलकर 2,49,641 रुपये का बना दिया गया।

तत्कालीन अधीक्षक ने किया था खुलासा

इस फर्जीवाड़े का खुलासा स्वयं तत्कालीन अधीक्षक (खरीद शाखा, पुलिस मुख्यालय) ने संबंधित फाइल में किया था। उन्होंने लिखा था कि वरिष्ठ अधिकारी और प्रभारी विविध भंडार के आपसी विचार-विमर्श के बाद 2,97,000 रुपये के पुराने बिल को 2,49,000 रुपये से बदल दिया गया है।

क्या कहते हैं जीएफआर नियम

जीएफआर नियम 155 के अनुसार, यदि किसी वस्तु की कीमत 2.5 लाख रुपये से अधिक है और वह गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर उपलब्ध नहीं है, तो स्थानीय खरीद समिति स्थानीय बाजार से खरीद कर सकती है। हालांकि, यदि राशि ढाई लाख से अधिक है, तो खरीद केवल बोली या निविदा के माध्यम से ही की जाएगी। इस मामले में टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
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