पीओके में एयर स्ट्राइक के बाद पठानकोट में अलर्ट, पुलिस के साथ सेना भी तैनात, चप्पे-चप्पे पर नजर
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पीओके में एयर स्ट्राइक के बाद पंजाब के पठानकोट स्थित भारत-पाक सीमा पर तनाव है। तनाव को देखते हुए पठानकोट में नाकों पर पुलिस के साथ सेना के जवानों को भी तैनात कर दिया गया है। जीरो लाइन पर स्थित पंजाब के गांवों में कुछ हद तक दहशत का माहौल है। सेना ने सीमावर्ती क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ा दी हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मंगलवार शाम सीमावर्ती एरिया के गांवों में पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की।
डीसी रामबीर, एसएसपी विवेकशील सोनी, एसडीम अर्शदीप सिंह और एडीसी ने ग्राउंड जीरो के आस-पास के गांवों में स्थिति का जायजा लिया। जम्मू कश्मीर से आने और जाने वाले हर वाहन की गहनता से तलाशी ली जा रही है। वहीं तनाव के माहौल में लोगों को सतर्क रहने की सलाह सेना और जिला प्रशासन ने दी है।
कथलौर नाका इंचार्ज दलबीर कुमार का कहना है कि एयर स्ट्राइक के बाद बने हालात और संवेदनशील क्षेत्र होने के चलते अलर्ट किया गया है। इस पुल से गुजर रहे हर वाहन की तलाशी लेने के सख्त आदेश हैं। वहीं डीसी ने अधिकारियों से बैठक कर हाई अलर्ट रहने और स्टेशन न छोड़ने के आदेश दिए हैं। वहीं गुरुवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पठानकोट के सीमावर्ती गांवों का दौरा कर सकते हैं। इस बात की संभावना अधिकारियों ने जताई है।
अधिकारियों के साथ बैठक में डीसी ने कहा कि सीमा पर माहौल तनावपूर्ण है, ऐसे में सभी विभागों के जिलाधिकारी अपने विभागीय अधिकारियों को चौकस रहने को कहें। माहौल सामान्य होने तक कोई अधिकारी स्टेशन नहीं छोड़ेगा। वहीं बैठक में शामिल सूत्रों का कहना है कि डीसी ने 2016 में खाली कराए गांवों को दोबारा सतर्क रहने का आदेश दिया है।
इस दौरान अधिकारियों को आपात स्थिति के लिए तैयार रहने का आदेश दिया गया है। भारत-पाकिस्तान जीरो लाइन पर स्थित पंजाब के आखिरी गांव सिंबल स्कोल टिंडा और अन्य गांव में लोग एयर स्ट्राइक के बारे में बातें करते दिखाई दिए। सुरजीत सिंह, पवन सिंह और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद लोगों को यहां से पलायन करना पड़ा था, क्योंकि पाकिस्तान की ओर से पड़ोसी राज्य जम्मू और कश्मीर को निशाना बनाकर जो गोलीबारी की जाती है। उसकी चपेट में इस क्षेत्र के कुछ गांव भी आ जाते हैं।
ग्रामीणों ने एयर स्ट्राइक पर खुशी जाहिर की। लोग इसका जश्न भी मना रहे हैं लेकिन सीमा पर पैदा हुए हालात को लेकर वह चिंतित भी दिखाई दे रहे हैं। एसडीम पठानकोट अर्शदीप सिंह ने बताया कि प्रशासन की ओर से सीमावर्ती गांव की स्थिति पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है। सभी विभागों को सतर्क रहने को कहा गया है।
2016 में 3 घंटे में खाली कराए गए थे गांव
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत-पाक के बीच तनाव को देखते हुए 29 सितंबर 2016 में रातोंरात प्रशासन ने सीमा पर स्थित 10 किमी. एरिया के गांवों को खाली कराया गया था। इस दौरान 102 गांवों को खाली कराया गया था। इनमें बमियाल, अनियाल, भखड़ी, चंक्क अमीर, गोहलां, जनियाल, घेर, मनवाल, मंगवाल,सरोटा, दनवाल, पलाह, चोजकी चक्क, स्कोल, कोट-भटटियां, बलोतर, कोटली-जवाहर, ढींढा, मुट्ठी, समराला, फतेहपुर, मस्तपुर, भगवानपुर, अबोर, रतड़वां, रमकालंवा, किल्लपुर, गाजीबाड़वां,खुदाईपुर, बसाऊबाड़वां, आदम बाड़वां, जौनपुर, फरवाल, दतियाल, शेखपुर-मंजीरी, पहाड़ीपुर,लसियान, माखनपुर, अखवाड़ा, एमां सैदां, जैदपुर, झड़ोली, उधीपुर एमां सहित नरोट जैमल सिंह ब्लाक शामिल थे।