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23 साल से पुलिस कर रही थी शराब की निगरानी, अब नष्ट की गईं 71 हजार बोतलें, किराया भी देना होगा

Tue, 17 Dec 2019 10:36 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Tue, 17 Dec 2019 10:36 PM IST
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Alcohol seized 23 years ago destroyed in Rohtak
जेसीबी से शराब की गई नष्ट।

बंसीलाल सरकार में हुई शराबबंदी के दौरान 390 केसों में पकड़ी शराब को सोमवार को पुलिस विभाग की ओर से नष्ट कर दिया गया है। इस कार्रवाई में करीब सात घंटे का समय लगा। इससे पहले सुबह करीब 10 बजे 23 साल से जब्त शराब के गोदाम में बनी जहरीली गैस से दो पुलिस कर्मी बेसुध हो गए। 

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इसके बाद डीएसपी हेडक्वार्टर ने गोदाम की दोनों ओर से दीवार तुड़वाकर गैस को निकाला। इसके बाद दो जेसीबी की मदद से डीएसपी गोरखपाल और ड्यूटी मजिस्ट्रेअ तहसीलदार कनाब सिंह लाकड़ा की मौजूदगी में करीब 71 हजार शराब की बोतलों को नष्ट करवाया गया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा ने भी मौके का दौरा किया। 
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जानकारी के अनुसार 1996 से 1998 में पुलिस की ओर से 653 मामलों में यह शराब जब्त की गई थी। अदालत की ओर से 390 मामलों में एनओसी ली गई। इससे 1998 में नष्ट करना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस शराब को बागड़ सिनेमा के पास रेडक्रास के भवन में बनाए मालखाना में रखा गया था। इसमें जिला पुलिस की ओर से थाना शहर, थाना सिविल लाइन, थाना सदर, कलानौर, सांपला व थाना महम के अंतर्गत जब्त शराब की 70,871 बोतल, 630 अध्धे, 3516 पव्वे, 235395 थैली व 3972 किलो लाहण शामिल था। 

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पुलिस को 25 लाख रुपये देना है रेडक्रास को किराया

पुलिस की ओर से पकड़ी गई शराब के दौरान अदालत की ओर से लगभग आठ करोड़ रुपया का जुर्माना वसूला गया है। उस दौरान अदालत की ओर से एक बोतल शराब पर एक हजार रुपया जुर्माना हुआ करता था। रेडक्रास के जिस भवन में शराब को रखा गया है।

उसका किराया 25 लाख रुपये से ऊपर बनता है। पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से मांगे जाने वाले बिल को मुख्यालय भेजा जाएगा। वहां से आने वाली स्वीकृत के बाद प्रशासन को उसका भुगतान किया जाएगा। 
 
शराब पकड़ने जाने के बाद जिले में तैनात रहे 18 आईपीएस अधिकारी 
पुलिस व प्रशासन की ओर से हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। यह सवाल अब भी खड़ा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार 23 साल के दौरान इन थानों में तैनात रहने वाले कुछ थाना प्रभारी की मौत भी हो चुकी है। कुछ मालखाना मुंशी रिटायर हो गए हैं। शराब बंदी के बाद अब तक 18 आईपीएस अधिकारी जिले में तैनात रहे हैं। 

यहां तैनात रहने वाले चार आईपीएस अधिकारी तो डीजी रैंक तक पहुंच गए हैं। वहीं, दूसरी ओर रेडक्रास की ओर से भी अपने भवन को खाली कराने व किराया वसूलने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। रेडक्रास की ओर से किराये को लेकर पत्र तो आता था, मगर उसकी भी खानापूर्ति हो रही थी। 
 

शराब बंदी के दौरान पकड़ी गई शराब की बोतलों को अदालत से अनुमति लेकर नियमानुसार नष्ट किया गया है। रेडक्रास के भवन का जो भी किराया होगा। उसे मुख्यालय भेजा जाएगा। मिलने वाली अनुमति के अनुसार उसका भुगतान होगा।  - राहुल शर्मा , पुलिस अधीक्षक।

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