दिल्ली में भाजपा क्या हारी, अकाली दल ने भी मुंह फेरा, नेताओं ने गिनाए हार के गई कारण
पंजाब में दशकों से मजबूत गठबंधन के तौर पर राजनीति करते रहे अकाली दल और भाजपा के बीच दिल्ली के चुनाव ने फूट डाल दी है। मंगलवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही अकाली दल का अपने सहयोगी के प्रति रवैया एकदम उलट और हैरान करने वाला सामने आया। अकाली नेताओं ने साफ कर दिया कि दिल्ली में न तो मोदी कार्ड चला और न ही भाजपा की कोई चुनावी रणनीति ही कारगर साबित हुई।
पार्टी ने भाजपा के दिग्गज नेताओं की गलत और अशिष्ट बयानबाजी को भी भाजपा की हार का जिम्मेदार ठहराया। अकाली नेताओं ने कहा कि भाजपा की चुनाव संबंधी रणनीति पूरी तरह फेल हो गई, क्योंकि पार्टी ने राष्ट्रीय एजेंडे को राज्य चुनाव में भुनाने की कोशिश की, जिसका कोई लाभ नहीं मिल सका। इसके अलावा भाजपा दिल्ली में आप के विकास के मुद्दे के जवाब में आप की कमियां भी उजागर नहीं कर सकी।
शिअद के सीनियर नेता प्रो. प्रेम सिंह चंदू माजरा ने दिल्ली चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा को इस हार से सबक लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गठबंधन पार्टी होने के कारण वह इतना ही कहेंगे कि हर जगह भाजपा का गुजरात कार्ड खेलना उचित नहीं है। दिल्ली के लिए भाजपा को अलग रणनीति बनानी चाहिए थी, जिसमें पार्टी पूरी तरह नाकाम रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को अब ठोस मंथन की जरूरत है। शिअद के एक अन्य सीनियर नेता हरचरण सिंह बैंस ने कहा कि इस चुनाव में भाजपा की रणनीति ही पूरी तरह गलत थी। भाजपा के नेता लोगों को गोली मारने के बयान दे रहे थे, जो दिल्ली के लोगों को नागवार गुजरे। इसके अलावा, भाजपा के दिग्गज नेताओं के अपनी वाहवाही वाले बयान भी नुकसानदेह साबित हुए। उन्होंने कहा कि अकाली दल को यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में काम किए। अगर काम न किए होते तो आप को इतनी बड़ी जीत नहीं मिलती।
वरिष्ठ नेता महेश इंद्र सिंह ग्रेवाल ने कहा कि दिल्ली में बिजली, पानी, मेडिकल और शिक्षा की बेहतर सेवाओं के कारण लोगों ने आम आदमी पार्टी को फिर से चुना। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े इन मूलभूत मुद्दों को लेकर न भाजपा और न कांग्रेस ही कोई जवाब ढूंढ सकी और दोनों पार्टियों को हार का सामना करना पड़ा।
ग्रेवाल ने कहा कि समय के साथ चलना और खुद को बदलना बहुत जरूरी है लेकिन भाजपा ने इससे सबक नहीं लिया। ग्रेवाल ने हैरानी जताते हुए कहा कि जिस राज्य में लोकसभा की एक भी सीट जो पार्टी न जीत सके और विधानसभा की सभी सीटें जीत जाए, तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। इससे भाजपा को सबक लेने की जरूरत है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दे अलग-अलग होते हैं और उनके अनुसार ही रणनीति बनानी पड़ती है।
अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दलजीत सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि दिल्ली में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी का गुपचुप तरीके से साथ दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब में तो पहले से ही आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक दूसरे की कमियों को छुपाते रहे हैं और पंजाब के लोग यह बखूबी जानते भी हैं। इसी वजह से उन्हें नहीं लगता कि पंजाब में दिल्ली के चुनावी नतीजों का कोई असर पड़ेगा और पंजाब के लोग आम आदमी पार्टी को कोई तवज्जो नहीं देने वाले।