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अकाली दल लौंगोवाल ने थामा कांग्रेस का हाथ, घोषणा आज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 22 Mar 2014 12:13 AM IST
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पीपीपी के बाद अकाली दल लौंगोवाल ने भी कांग्रेस से हाथ मिला लिए हैं। दोनों पार्टियों के बीच चुनावी समझौते पर सहमति गत वीरवार को दिल्ली में हुई एक बैठक के दौरान बनी। इसकी औपचारिक घोषणा आज चंडीगढ़ में होगी।
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ हुई बैठक में अकाली दल लौंगोवाल सुप्रीमो सुरजीत सिंह बरनाला, अध्यक्ष सुरजीत कौर बरनाला, प्रधान महासचिव बलदेव सिंह मान आदि शामिल थे।
इस दौरान कांग्रेस व अकाली दल लौंगोवाल के बीच गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया। दल की अध्यक्ष सुरजीत कौर बरनाला ने फोन पर हुई बातचीत में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वह प्रदेश की सभी सीटों पर एक गठबंधन के रूप में काम करेंगे।
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उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता गठबंधन उम्मीदवारों की जीत के लिए पूरा जोर लगा देंगे। इसकी औपचारिक घोषणा पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा के साथ शनिवार को होने वाली संयुक्त प्रेस वार्ता में की जाएगी।
इसमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला खुद मौजूद रहेंगे। इससे पहले मनप्रीत सिंह बादल की अगुवाई वाली पीपीपी, कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुकी है।
इस समझौते के तहत मनप्रीत सिंह बादल गठबंधन उम्मीदवार के रूप में बठिंडा सीट पर शिअद उम्मीदवार हरसिमरत कौर बादल के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। अब अकाली दल लौंगोवाल का इसके साथ आना कांग्रेस के लिए राहत भरा है।
सिंगला को मिलेगा फायदा
अकाली दल लौंगोवाल का संगरूर लोकसभा क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। इसका सीधा फायदा वहां से कांग्रेस प्रत्याशी विजय इंद्र सिंगला को मिलेगा, इसमें कोई दो राय नहीं। पीपीपी कार्यकर्ता पहले ही उनका समर्थन कर रहे हैं। अब अकाली दल लौंगोवाल समर्थक भी सिंगला के समर्थन में उतर आएंगे।
वैसे शिअद प्रत्याशी सुखदेव सिंह ढींडसा और बरनाला परिवार के बीच पहले से ही समीकरण परस्पर विरोधी रहे हैं। ऐसे में अकाली दल लौंगोवाल का उनके खिलाफ जाना ढींडसा को कितना नुकसान पहुंचाएगा, आने वाले समय में ही पता चलेगा।
साझा मोर्चा तार-तार
अकाली दल लौंगोवाल के इस फैसले से साझा मोर्चा का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। 2012 के विधानसभा चुनाव में अस्तित्व में आया साझा मोर्चा पीपीपी, माकपा, भाकपा और अकाली दल लौंगोवाल पर आधारित था। पीपीपी के कांग्रेस के साथ समझौते के साथ ही माकपा व भाकपा ने इससे अलग होने की घोषणा कर दी थी। अब अकाली दल लौंगोवाल के कांग्रेस के साथ जाने से इसका अस्तित्व ही खत्म हो गया है।
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दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ हुई बैठक में अकाली दल लौंगोवाल सुप्रीमो सुरजीत सिंह बरनाला, अध्यक्ष सुरजीत कौर बरनाला, प्रधान महासचिव बलदेव सिंह मान आदि शामिल थे।
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इस दौरान कांग्रेस व अकाली दल लौंगोवाल के बीच गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया। दल की अध्यक्ष सुरजीत कौर बरनाला ने फोन पर हुई बातचीत में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वह प्रदेश की सभी सीटों पर एक गठबंधन के रूप में काम करेंगे।
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उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता गठबंधन उम्मीदवारों की जीत के लिए पूरा जोर लगा देंगे। इसकी औपचारिक घोषणा पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा के साथ शनिवार को होने वाली संयुक्त प्रेस वार्ता में की जाएगी।
इसमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला खुद मौजूद रहेंगे। इससे पहले मनप्रीत सिंह बादल की अगुवाई वाली पीपीपी, कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुकी है।
इस समझौते के तहत मनप्रीत सिंह बादल गठबंधन उम्मीदवार के रूप में बठिंडा सीट पर शिअद उम्मीदवार हरसिमरत कौर बादल के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। अब अकाली दल लौंगोवाल का इसके साथ आना कांग्रेस के लिए राहत भरा है।
सिंगला को मिलेगा फायदा
अकाली दल लौंगोवाल का संगरूर लोकसभा क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। इसका सीधा फायदा वहां से कांग्रेस प्रत्याशी विजय इंद्र सिंगला को मिलेगा, इसमें कोई दो राय नहीं। पीपीपी कार्यकर्ता पहले ही उनका समर्थन कर रहे हैं। अब अकाली दल लौंगोवाल समर्थक भी सिंगला के समर्थन में उतर आएंगे।
वैसे शिअद प्रत्याशी सुखदेव सिंह ढींडसा और बरनाला परिवार के बीच पहले से ही समीकरण परस्पर विरोधी रहे हैं। ऐसे में अकाली दल लौंगोवाल का उनके खिलाफ जाना ढींडसा को कितना नुकसान पहुंचाएगा, आने वाले समय में ही पता चलेगा।
साझा मोर्चा तार-तार
अकाली दल लौंगोवाल के इस फैसले से साझा मोर्चा का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। 2012 के विधानसभा चुनाव में अस्तित्व में आया साझा मोर्चा पीपीपी, माकपा, भाकपा और अकाली दल लौंगोवाल पर आधारित था। पीपीपी के कांग्रेस के साथ समझौते के साथ ही माकपा व भाकपा ने इससे अलग होने की घोषणा कर दी थी। अब अकाली दल लौंगोवाल के कांग्रेस के साथ जाने से इसका अस्तित्व ही खत्म हो गया है।