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Chandigarh News: नोटा की जिद पर अड़े अकाली पार्षद हरदीप ने मारी पलटी, भाजपा को दिया वोट
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चंडीगढ़। मेयर चुनाव में नोटा (किसी को भी वोट नहीं) का विकल्प नहीं होने पर वॉकआउट की बात कह चुके अकाली दल के पार्षद हरदीप सिंह ने मंगलवार को पलटी मार ली। हरदीप सिंह ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में भाजपा को वोट दिया। जब उनसे इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक साथ आ सकते हैं तो वह भाजपा को वोट क्यों नहीं दे सकते। चुनाव के दौरान अकाली दल के पार्षद का जब वोट देने का नंबर आया तो उन्होंने डीसी से नोटा को लेकर सवाल किया। हरदीप सिंह ने कुछ दिन पहले डीसी विनय प्रताप सिंह को एक ज्ञापन दिया था और मेयर चुनाव में नोटा का विकल्प देने की मांग की थी। इस सवाल पर डीसी ने सदन में कहा कि निगम चुनाव के संबंधित नियम बनाने में डीसी ऑफिस की कोई भूमिका नहीं होती। अगर पार्षद चाहते हैं कि मेयर चुनाव में नोटा का विकल्प होना चाहिए तो पार्षदों को इस संबंध में नियम बनाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजना चाहिए।
यह सुनने के बाद हरदीप सिंह वोट डालने के लिए आगे आए। बाद में पता चला कि उन्होंने तीनों पदों पर भाजपा के उम्मीदवार को वोट दिया है। दरअसल, भाजपा को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में 16-16 वोट मिले। भाजपा के पास 14 पार्षद हैं। एक वोट सांसद किरण खेर का रहा और अकाली दल के पार्षद हरदीप सिंह ने भी भाजपा के उम्मीदवारों को वोट किया। इस पर हरदीप सिंह ने कहा कि जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक साथ आ सकते हैं तो वह भाजपा को वोट क्यों नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर छोड़ दिया था इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया।
निगम जाने वाले सभी रास्ते रहे बंद, चार-स्तरीय जांच के बाद प्रवेश
मेयर चुनाव को लेकर मंगलवार को भारी सुरक्षा बल तैनात रहे। निगम कार्यालय की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया गया था। आरएलए के सामने की पार्किंग को भी खाली करा दिया गया था। कई थानों की पुलिस तैनात रही। चार स्तरीय जांच के बाद कर्मचारियों को निगम के अंदर जाने दिया जा रहा था। नगर निगम के अंदर जाने वाले एक-एक व्यक्ति की वीडियोग्राफी की गई। अंदर जाने के बाद गेट पर ताला लगा दिया गया था। इससे कर्मचारियों को खासा परेशानी हुई। आरएलए के अंदर भी मंगलवार को ज्यादा लोग काम नहीं करा पाए।
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पूरे चुनाव प्रक्रिया की हुई वीडियोग्राफी : डीसी
डीसी विनय प्रताप सिंह ने सदन में कहा कि पूरे चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जा रही है। अगर कोई भी पार्षद वीडियोग्राफी की कॉपी की मांग करेगा तो उसे मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा यहां पर जो भी वोटिंग होगी, उसे सील करके प्रशासन के ट्रेजररी ऑफिस में एक साल तक के लिए रखा जाएगा। यह बैलेट पेपर अगले मेयर चुनाव तक के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं या अगर इस बीच कोई याचिका अदालत में दायर होती है तो केस का फैसला आने तक यह बैलेट पेपर सुरक्षित रखे जाते हैं। इसके अलावा संतुष्टि के लिए अगर कोई पार्षद चाहे तो बैलेट बॉक्स की सील पर अपने हस्ताक्षर भी कर सकता है।
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यह सुनने के बाद हरदीप सिंह वोट डालने के लिए आगे आए। बाद में पता चला कि उन्होंने तीनों पदों पर भाजपा के उम्मीदवार को वोट दिया है। दरअसल, भाजपा को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में 16-16 वोट मिले। भाजपा के पास 14 पार्षद हैं। एक वोट सांसद किरण खेर का रहा और अकाली दल के पार्षद हरदीप सिंह ने भी भाजपा के उम्मीदवारों को वोट किया। इस पर हरदीप सिंह ने कहा कि जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक साथ आ सकते हैं तो वह भाजपा को वोट क्यों नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर छोड़ दिया था इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया।
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निगम जाने वाले सभी रास्ते रहे बंद, चार-स्तरीय जांच के बाद प्रवेश
मेयर चुनाव को लेकर मंगलवार को भारी सुरक्षा बल तैनात रहे। निगम कार्यालय की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया गया था। आरएलए के सामने की पार्किंग को भी खाली करा दिया गया था। कई थानों की पुलिस तैनात रही। चार स्तरीय जांच के बाद कर्मचारियों को निगम के अंदर जाने दिया जा रहा था। नगर निगम के अंदर जाने वाले एक-एक व्यक्ति की वीडियोग्राफी की गई। अंदर जाने के बाद गेट पर ताला लगा दिया गया था। इससे कर्मचारियों को खासा परेशानी हुई। आरएलए के अंदर भी मंगलवार को ज्यादा लोग काम नहीं करा पाए।
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पूरे चुनाव प्रक्रिया की हुई वीडियोग्राफी : डीसी
डीसी विनय प्रताप सिंह ने सदन में कहा कि पूरे चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जा रही है। अगर कोई भी पार्षद वीडियोग्राफी की कॉपी की मांग करेगा तो उसे मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा यहां पर जो भी वोटिंग होगी, उसे सील करके प्रशासन के ट्रेजररी ऑफिस में एक साल तक के लिए रखा जाएगा। यह बैलेट पेपर अगले मेयर चुनाव तक के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं या अगर इस बीच कोई याचिका अदालत में दायर होती है तो केस का फैसला आने तक यह बैलेट पेपर सुरक्षित रखे जाते हैं। इसके अलावा संतुष्टि के लिए अगर कोई पार्षद चाहे तो बैलेट बॉक्स की सील पर अपने हस्ताक्षर भी कर सकता है।