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Hindi News ›   Chandigarh ›   Akal Takht sent a letter to Sukhbir

Chandigarh News: अकाल तख्त ने सुखबीर को भेजा पत्र, 15 दिन में पेश होकर दें स्पष्टीकरण

Sat, 20 Jul 2024 09:09 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jul 2024 09:09 PM IST
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Akal Takht sent a letter to Sukhbir
-सख्त धार्मिक सजा सजा से अकाली दल के लिए पैदा होगा नया राजनीतिक संकट
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर बादल को श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश होने के लिए विधिपूर्वक समन भेज दिया है।

जत्थेदार अकाल तख्त साहिब ने सुखबीर बादल को 15 दिन के भीतर श्री अकाल तख्त पर निजी तौर पर पेश होकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। इस समय सुखबीर बादल परिवार के साथ चाहे विदेश में गए हुए है, लेकिन अकाल तख्त साहिब की ओर से सुखबीर को पेशी के सम्मन और बागी ग्रुप की ओर से लगाए गए आरोपी का पत्र भी भेजा गया है।
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एक जुलाई को अकाली दल बादल के बागी ग्रुप के सदस्यों द्वारा पूर्व अकाली सरकार के दौरान, पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल की अगुवाई में हुई गलतियों व गुनाह के लिए माफीनामा श्री अकाल तख्त पर दिया गया था। माफीनामे में अलग अलग पंथक व धार्मिक गलतियों के लिए सुखबीर को बागियों ने दोषी ठहराया था। बागियों ने कहा था कि वह भी इस गलतियों के लिए जिम्मेदार है साथ में ही अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल भी पूरी तरह जिम्मेदार है। इसी के चलते शुक्रवार को जत्थेदार ने सुखबीर बादल से इस संदर्भ में स्पष्टीकरण देने की हिदायत दी है।
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बागी ग्रुप के नेताओं ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को पार्टी नेतृत्व की ओर से गत समय दौरान की गई गलतियों संबंधी माफी पत्र सौंप कर अकाली दल की लीडरशिप के लिए नई समस्या खड़ी कर दी है। यह समस्या आने वाले समय में अकाली दल की मौजूदा लीडरशिप के लिए बड़ी चुनौती बनने जा रही है।जिस से उभरना अकाली दल के लिए आसान नहीं दिखाई दे रहा है।


सुखबीर सिंह बादल अपने सियासी प्रभाव का उपयोग करने का आरोप
जत्थेदार को सौंपे पत्र में बागी नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल अपने सियासी प्रभाव का उपयोग शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और तख्त साहिबों के जत्थेदार पर डाल कर अपने स्वार्थों की पूर्ति करते रहे हैं। शिअद के विरोधी पंथक जत्थेबंदियां और विपक्षी पार्टियां भी यह आरोप लगाती रही है कि शिअद नेतृत्व तख्तों व एसजीपीसी के कामों में हस्तक्षेप करता है। जिस आरोप को हमेशा ही पहले प्रकाश सिंह बादल और अब सुखबीर सिंह बादल नकारते रहे है । अकाली नेतृत्व हमेशा कहता रहा है कि, अकाली दल कभी भी तख्त साहिबों के जत्थेदारों और एसजीपीसी के कामों में हस्तक्षेप नहीं करता। शिअद के नेताओं के इस झूठ को बागी अकालियों के पत्र ने दुनिया और सिख पंथ के समक्ष बेनकाब कर दिया है। इससे बाहर निकलना अब अकाली दल की लीडरशिप के लिए निकट भविष्य में आसान नहीं होगा। वहीं, अगर अकाल तख्त साहिब की ओर से सुखबीर बादल को पेशी के दौरान सख्त धार्मिक सजा सुनाए जाने के साथ साथ उनसे अकाली दल के अध्यक्ष पद से भी त्यागपत्र मांग लिया जाता है, तो अकाली दल बादल नेतृत्व के लिए और गंभीर राजनीतिक संकट पैदा हो जाएगा।
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