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जत्थेदार ने माना, यहां के सिखों की अनदेखी हुई

Thu, 31 Jul 2014 02:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 31 Jul 2014 02:17 PM IST
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Akal Takhat Jatthedar Gyani Gurbachan Singh about HSGMC

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने स्वीकार किया है कि हरियाणा के सिखों की अनदेखी के कारण ही हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी बनी। जत्थेदार के इस बयान के बाद एसजीपीसी विवाद में नया उबाल पैदा हो गया है।

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अब तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के लिए अलग कमेटी बनाने के मामले में हरियाणा की कांग्रेस सरकार के साथ वहां के कुछ सिख नेताओं को जिम्मेदार मानते रहे हैं।
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तलवंडी साबो में बुधवार को एक धार्मिक समागम में शिरकत करने आए जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने बातचीत में यह माना कि यह सच्चाई है कि हरियाणा के सिखों को अनदेखा किया गया इसीलिए उन्होंने अलग गुरुद्वारा समिति की मांग की।
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उनका कहना है कि वे भी चाहते हैं कि हरियाणा के सिखों को उनका हक मिलना चाहिए लेकिन इसके लिए एसजीपीसी में दरार पैदा करने की साजिश गलत है। सिख कौम का फ़ायदा इसी में है कि वे एक झंडे के नीचे इकट्ठे रहें।

कौम में किसी तरह का विवाद नहीं होने देना चाहते

Akal Takhat Jatthedar Gyani Gurbachan Singh about HSGMC

सिख सम्मेलन रद्द करने के लिए हुक्मनामा जारी करने के बारे में उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख़्त साहब के जत्थेदार का पहला फर्ज होता है कि वह कौम में किसी तरह का विवाद न होने दे और कौम को आपसी जंग से बचाए।

वे अपना यही काम कर रहे हैं। हरियाणा के सिख नेताओं और एसजीपीसी में आपसी जंग व विवाद रोकने के लिए ही हुक्मनामे जारी किए गए।

अकाल तख्त की तरफ से हरियाणा के सिखों को ऐसे गुरुद्वारों का प्रबंध न संभालने के हुक्मनामे के बारे में उन्होंने कहा कि एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश झींडा एक सुलझे हुए और समझदार नेता हैं। वे इस हुक्मनामे पर ज़रूर अमल करेंगे।

झींडा तनखैया हैं, इसलिए रोका गया माथा टेकने से

Akal Takhat Jatthedar Gyani Gurbachan Singh about HSGMC

जब उनको पूछा गया कि अगर झींडा सुलझे हुए सिख नेता हैं तो उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब पर नतमस्तक होने से क्यों रोका गया तो जत्थेदार ने कहा कि सिख मर्यादा के अनुसार कोई भी सिख या किसी भी धर्म का इंसान श्री हरमंदिर साहिब में तो माथा टेक सकता है लेकिन कोई पतित या तनख़ैया सिख श्री अकाल तख्त साहिब पर जाकर माथा नहीं टेक सकता।

झींडा को तनख़ैया करार दिया हुआ है इसलिए उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब में माथा नहीं टेकने दिया गया। इस मौके पर उनके साथ तख्त श्री केशगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल्ल सिंह और शिरोमणि पंथ अकाली बूढ़ा दल के प्रमुख बाबा बलबीर सिंह भी मौजूद थे।

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