जहरीली हुई हरियाणा के 13 शहरों की आबोहवा, सिरसा देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर
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हरियाणा में चार अक्तूबर के बाद से शुष्क चल रहा मौसम शुक्रवार को करवट लेने वाला है। इससे पहले देश के 108 शहरों में सिरसा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित पाई गई। सिरसा में सूचकांक मूल्य बीते 24 घंटे में 21 अंक बढ़कर 342 दर्ज किया। बताया जा रहा है कि औद्योगिक प्रदूषण के अलावा पराली के धुएं और सर्द-शुष्क मौसम से भी हरियाणा के 13 शहरों की हवा बद से बदतर हो गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से शाम चार बजे जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक में दिल्ली में जहां प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 की मात्रा 284 पाई गई। वहीं सिरसा में देश में सर्वाधिक 342 दर्ज की गई। सिरसा की हवा बेहद खराब तो प्रदेश के 12 जिलों की हवा खराब श्रेणी में पाई गई। राहत की बात यह है कि करनाल और यमुनानगर में वायु प्रदूषण का स्तर पहले से घटा है। हालांकि दिवाली पर पटाखे चलने के बाद हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका है।
मानसून के विदा होने के बाद पहली बार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है। इसके चलते 18 अक्तूबर को अंबाला समेत प्रदेश के उत्तरी जिलों और उनके आसपास के इलाकों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश वायु प्रदूषण से राहत दे सकती है।
स्काईमेट के विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी हलचलों की सक्रियता बढ़ने से हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मैदानी इलाकों में बारिश और पहाड़ों में बर्फबारी से दिन और रात का तापमान गिर सकता है। इसके साथ ही मौसम सर्द होता जाएगा।
मुंह पर कपड़ा बांधे नजर आए लोग
शुक्रवार शाम को करवा चौथ के मौके पर बाजारों में निकले शहरवासी अपने मुंह पर कपड़ा बांधे नजर आए। फसली अवशेष को जलाने के कारण धुआं उठने से प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। हालांकि अभी धान की कटाई में तेजी नहीं आई है। दीपावली पर पटाखों और फसली अवशेष जलाने पर वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो सकती है।
| शहर | वायु गुणवत्ता सूचकांक (पीएम 2.5) |
| सिरसा | 342 |
| हिसार | 297 |
| जींद | 295 |
| गुरुग्राम | 279 |
| करनाल | 261 |
| पानीपत | 261 |
| पलवल | 260 |
| रोहतक | 259 |
| मानेसर | 252 |
| फरीदाबाद | 245 |
| यमुनानगर | 240 |
| बहादुरगढ़ | 229 |
| सोनीपत | 217 |
न जलाएं पराली, फसली अवशेष का करें प्रबंधन
अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों में धान की पराली व अन्य फसलों के अवशेषों को न जलाएं। फसलों के अवशेष का उचित प्रबंधन करें। धुएं व गैस का चैंबर बनने से सांस, त्वचा और आंखों की बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है। धुएं के कारण राजमार्गों पर दुर्घटना होने का डर रहता है। आसपास के क्षेत्रों में भी आग लगने का खतरा रहता है। मिट्टी में मित्र कीटों में कमी हो जाने के कारण उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। पशुओं के चारे में कमी आती है।