हरियाणा के 10 जिले बने गैस चैंबरः एनसीआर में बंद रहेंगे निर्माण, स्टोन क्रेशर और हॉट मिक्स प्लांट
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दिवाली के पांच दिन बाद हरियाणा में वायु प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्थिति तक पहुंच गया है। शुक्रवार को प्रदेश के दस शहर दोपहर 12 बजे तक गैस चैंबर बने रहे। इन शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 रिकॉर्ड किया गया।
प्रदेश में वायु प्रदूषण का यह स्तर इस वर्ष में अब तक का सर्वाधिक है। उधर, देश की राजधानी दिल्ली में स्वास्थ्य आपात काल लागू होने के बाद प्रदूषण फैलाने वालों पर हरियाणा में सख्ती बरती गई है।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई तरह की पाबंदियों के आदेश जारी किये हैं। इसके तहत फरीदाबाद और गुरुग्राम में पांच नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। इस दौरान रात में भी निर्माण कार्य नहीं होगा। वहीं, हरियाणा के एनसीआर जिलों में हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रेशर भी बंद रहेंगे।
फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत, पानीपत और बहादुरगढ़ में सभी कोयला और अन्य ईंधन आधारित उद्योग, जिन्होंने अभी तक खुद को नेचुरल गैस और जैव अवशिष्ट ईंधन पर कनर्वट नहीं किया है, वे भी पांच नवंबर तक बंद रहेंगे। बोर्ड ने हरियाणा में पूरी सर्दियां किसी भी सूरत में पटाखे नहीं जलाने के आदेश हैं।
वहीं, शुक्रवार को प्रदेश के अधिकांश शहरों में स्मॉग का असर रहा। पिछले पांच दिनों से धुंध और बादलों के चलते धूप खुलकर नहीं निकल रही है। ग्रुरुग्राम में सुबह आठ बजे दृश्यता महज 250 मीटर ही रह गई थी। ऐसे में वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है।
आज राहत मिलने की उम्मीद
शनिवार को वायु प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद है। रोहतक सहित कुछ शहरों में शुक्रवार शाम तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी हुई। मौसम विभाग ने शनिवार को हरियाणा सहित दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं के साथ कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना जताई है। अरब सागर में आए चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ के चलते बूंदाबांदी के साथ ही सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल तेज होगी और वायु प्रदूषण छंट सकता है।
इन शहरों में 500 रहा एक्यूआई
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार हरियाणा के 10 शहरों में दोपहर 12 बजे तक एक्यूआई 500 दर्ज किया गया। इन शहरों में बल्लभगढ़, भिवानी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, जींद, कैथल, मानेसर, पानीपत और सिरसा शामिल हैं।
मंद हवा और बारिश नहीं होने से बढ़ी समस्या
दिवाली के बाद भले ही पटाखे नहीं चले, लेकिन पराली जलना, फैक्ट्रियों व वाहनों का धुआं जैसी प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियां जारी हैं। दूसरी ओर तापमान कम होने और नमी बढ़ जाने से धूल, धुआं नमी के साथ मिलकर वातावरण में तैर रहे हैं। इससे स्मॉग की स्थिति भी बनी हुई है। जबकि सामान्य दिनों में धूल, धुआं वातावरण से बाहर चले जाते हैं।
- प्रो. नरसी बिश्नोई, डीन ऑफ रिसर्च, जीजेयू, हिसार और सदस्य, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड