लॉकडाउन का असर: हरियाणा में सबसे शुद्ध हुई अंबाला, कैथल, यमुनानगर, मानेसर की आबोहवा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लॉकडाउन की वजह से भले ही आमजन कई तरह की दुश्वारियों को सह रहा है। इन सारी परिस्थितियों के बावजूद सुखद पहलू यह भी है कि हरियाणा के बाशिंदे अब तक के इतिहास में सबसे शुद्ध हवा में सांस ले रहे हैं। इस समय हर जिले में आबोहवा अपेक्षाकृत काफी बेहतर है। अंबाला, कैथल, यमुनानगर और मानेसर की तो हवा अब तक के इतिहास में सबसे शुद्ध दर्ज की गई है।
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पर्यावरणविद और प्रदूषण विभाग के वैज्ञानिक भी खासे उत्साहित हैं, जिसके चलते हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने अपने वैज्ञानिकों और तकनीकी स्टाफ को इन दिनों एक खास अभियान में लगा दिया है। ये वैज्ञानिक इन दिनों मौजूदा परिवेश में वायु, जल और ध्वनि तीनों तरह के प्रदूषण की सैंपलिंग, पैरामीटर और एक्यूरेसी संबंधी डाटा एकत्रित करने में जुटे हुए हैं। मौजूदा परिस्थितियों में शोध करने व इनके आधार पर बेस डाटा तैयार किया जा रहा है।
बोर्ड के सदस्य सचिव एस. नारायणन ने बताया कि इन दिनों वायु और ध्वनि के साथ-साथ भूजल की स्थिति भी अपेक्षाकृत स्वच्छ है। लिहाजा वैज्ञानिकों की टीम ग्राउंड वाटर का सैंपल भी ले रही है। उनके अनुसार एक तरह से ये डाटा आने वाले समय में एक तरह से बेंचमार्क सरीखे होगा। जो भविष्य में एकेडमिक व डिपार्टमेंटल इत्यादि स्टेज पर विभिन्न तरह के परीक्षणों और शोध के लिए बेस बनेगा। इन दिनों कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन की वजह से सड़कों पर वाहनों की संख्या बहुत कम है। फैक्ट्रियां बंद पड़ी है। ईट-भटठे बंद पड़े हैं।
4 शहर में सबसे बेहतर, 16 में संतोषजनक, 3 नियंत्रित हवा
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से हरियाणा स्टेट पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को उपलब्ध करवाए गए एयर क्वालिटी इंडेक्स के तहत 4 शहरों अंबाला (39 एयर क्वालिटी इंडेक्स ), कैथल (48), यमुनानगर (37) और मानेसर (45) में वायु गुणवत्ता अच्छी दर्ज हुई है। जबकि बहादुरगढ़ (97), बल्लभगढ़ (67), भिवानी (71), धारूहेड़ा (72), फतेहाबाद (73), हिसार ( 90), जींद (84), करनाल ( 55), कुरुक्षेत्र ( 60), मेवात (63), नारनौल, पलवल (63), सिरसा (76), सोनीपत (95), रोहतक (62) और पंचकूला (69) स्टेशन के अंतर्गत आने वाले इलाकों में वायु की गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई है। इनके अलावा फरीदाबाद (176), गुरुग्राम (138) और पानीपत (130) स्टेशन के अंतर्गत आने वाले इलाकों में वायु गुणवत्ता नियंत्रित दर्ज की गई है।
वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर प्रभाव का मानक
- 0-50 एयर क्वालिटी इंडेक्स (अच्छा) - सेहत पर बहुत ही कम असर
- 51-100 ( संतोषजनक) - संवेदनशील लोगों की श्वास प्रणाली पर हल्का असर
- 101-200 ( नियंत्रित) - फेफड़ों अस्थमा और दिल की बीमारी वाले लोगों की श्वास प्रणाली पर असर
- 201-300 ( खराब) - लंबी बीमारी वाले लोगों की श्वास प्रणाली पर असर
- 301- 400 (बहुत खराब) - सांस लेने में दिक्कत शुरू होना
- 401-500 (कष्टदायक) - स्वस्थ लोगों पर भी बीमारियों की जनक बनने वाली आबोहवा का गंभीर प्रभाव
जलने लगे गेहूं के अवशेष, एक दिन में ही बदली आबोहवा, फिजा में अब घुलने लगा धुंआ
हरियाणा में जहां पिछले करीब सवा महीने से जिलों की आबोहवा अच्छी बनी हुई थी। वहीं अब किसानों द्वारा गेहूं के फाने जलाने के बाद एक ही दिन में फिजा में धुआं घुलने लगा है। इसे लेकर पर्यावरण वैज्ञानिक और प्रदूषण विभाग के अफसर भी हैरान है। 30 अप्रैल शाम को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने हरियाणा की आबोहवा संबंधी जो रिपोर्ट हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को भेजी वो वाकई चौंकाने वाली थी।
एक ही दिन में स्थिति इतनी खराब हो जाएगी ऐसी कल्पना करना बेहद मुश्किल है। खेतों में गेहूं की फसल काटने के बाद किसानों ने खेतों में ही फाने जलाने शुरू कर दिए हैं। जिससे एक बार फिर से फिजा में प्रदूषण की सतह बननी शुरू हो गई है। हरियाणा के विभिन्न शहरों की 30 अप्रैल को वायु गुणवत्ता यदि देखें तो स्थिति अब बदतर होनी शुरू हो गई।