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दिवाली के बाद गैस चैंबर बना हरियाणा, पंजाब की अबोहवा में कम खुला प्रदूषण

Tue, 29 Oct 2019 01:16 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक/पटियाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक/पटियाला Published by: ajay kumar Updated Tue, 29 Oct 2019 01:16 AM IST
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Air pollution increases in Haryana after Diwali, Relief in punjab
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

दिवाली की रात प्रदेश में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। आतिशबाजी के चलते पूरे हरियाणा की हवा जहरीली हो गई। सिरसा में स्थिति सबसे अधिक खराब रही। यहां दिवाली की रात वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 1098 पहुंच गया। हालांकि, सोमवार को स्थिति में काफी सुधार आया और एक्यूआई घटकर 392 के पास आ गया। प्रदेश के अन्य जिलों की भी कमोबेश यही स्थिति रही। 

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दिवाली की रात हिसार, जींद, रोहतक, भिवानी, यमुनानगर, अंबाला आदि जिलों में एक्यूआई 500 तक पहुंच गया। राहत की बात यह रही कि सोमवार दोपहर बाद वातावरण में सुधार होने से एक्यूआई 300 से 400 के बीच रहा, लेकिन यह स्थिति भी बहुत खराब मानी जाती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार इस स्थिति में सामान्य व्यक्ति को भी सांस की बीमारी हो सकती है। एक्यूआई 100 तक ही अच्छा माना जाता है। इससे अधिक होने पर स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने लगता है। 
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गैस चैंबर बना हरियाणा 
हरियाणा पिछले एक सप्ताह से गैस चैंबर (धुएं की चादर) बना हुआ है। पराली और वाहनों का धुआं, कूड़े में आग लगाने, नमी और अब आतिशबाजी के चलते वातावरण में सफेद धुएं की चादर छाई हुई है, जो सुबह व शाम के वक्त और गहरी हो जाती है। इन दिनों में वातावरण में नमी मौजूद है और तापमान भी कम है। 

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इस वजह से धूल और धुएं के कण वातावरण में ऊपर नहीं जा पाते और नीचे ही रह जाते हैं, जिससे वातावरण में धुएं की चादर बन जाती है। जानकारों के अनुसार धुएं की चादर से सिर्फ तेज हवा या बारिश ही छुटकारा दिला सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अभी बारिश के कोई आसार नहीं है। ऐसे में आगामी दिनों में प्रदेश में समस्या बढ़ सकती है। 

जमकर हुई आतिशबाजी, देर रात तक छूटे पटाखे
दिवाली पर सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के दिशा-निर्देशों की परवाह नहीं करते हुए लोगों ने जमकर पटाखे छोड़े। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी, लेकिन दिवाली के दिन लोगों ने जमकर सामान्य पटाखे छोड़े। जिससे प्रदेश की हवा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई।

दिवाली पर छह बजे से देर रात दो बजे तक पटाखे छूटते रहे। वातावरण पर पटाखों का असर रात से ही दिखने लगा था। रात से ही धुंध छाने लगी थी और प्रदूषण भी बढ़ने लगा था। 

दिवाली की रात सिरसा का एयर क्वालिटी इंडेक्स 1098 था। सोमवार को यह नीचे आया। प्रदूषण कम होने में अभी समय लगेगा। आतिशबाजी के कारण प्रदूषण बढ़ा है। - सुनील श्योराण, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, हिसार।

प्रदेश के प्रमुख शहरों की 28 की शाम चार बजे की स्थिति 

जिला  एक्यूआई 
अंबाला 385
भिवानी 377
फरीदाबाद 358
गुरुग्राम 373
हिसार 370
जींद 373
कुरुक्षेत्र 392
नारनौल 342
पानीपत 366
रोहतक 329
सिरसा 392
यमुनानगर 342

    एक्यूआई का यह है पैमाना 
 
51-100  संतोषजनक
101-200 ठीक-ठाक 
201-300 खराब 
301-400 बहुत खराब
401-500 भीषण

पंजाबियों ने दी ग्रीन दिवाली को तरजीह, हवा में कम घुला प्रदूषण

पंजाबियों ने इस बार ग्रीन दिवाली को तरजीह दी, जिससे हवा में प्रदूषण कम घुला। पंजाब पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से किए जा रहे एयर क्वालिटी सर्वे में यह खुलासा हुआ है। वहीं सरकार के दावों के विपरीत राज्यभर में दिवाली पर 2231 जगहों पर पराली जलाई गई।

पीपीसीबी के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. चरनजीत सिंह ने बताया कि अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, खन्ना, पटियाला, बठिंडा. मंडी गोबिंदगढ़ व रोपड़ में लगे हवा प्रदूषण मापक यंत्र के आधार पर दिवाली वाले दिन पंजाब का औसतन हवा गुणवत्ता सूचक अंक 210 रिकॉर्ड किया गया। 

यह पिछले साल के औसतन 234 के मुकाबले 10.25 प्रतिशत और 2017 के औसतन 328 के मुकाबले 36 प्रतिशत कम है। वहीं दिवाली पर भी कुल 2231 जगहों पर पराली को आग लगाने की घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। इसके बावजूद दिवाली वाले दिन हवा गुणवत्ता सूचक अंक में गुणात्मक सुधार बहुत ही उत्साहजनक रहा है। 

पीपीसीबी चेयरमैन प्रो. एसएस मरवाहा ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों में, सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में पटाखों न चलाने को लेकर चलाई गई जागरूकता मुहिम का रोल अहम रहा।

उन्होंने बताया कि 2018 में हवा में औसतन पार्टीकुलेट मैटर (धूल के कण) .10 277 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5  126 माइकोग्राम प्रति घनमीटर के मुकाबले इस साल यह 212 और 117 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकॉर्ड किए गए। जो 23.46 और 7.14 प्रतिशत कम है। 

2017 के मुकाबले यह 52 प्रतिशत और 48 प्रतिशत कम है। चेयरमैन ने कहा कि देर शाम 8 बजे से रात 10 बजे तक ही पटाखे चलाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों ने भी पिछले कई सालों से चले आ रहे रुझान के अनुसार इस साल भी पंजाबियों ने ग्रीन दिवाली मनाने को तरजीह दी है।

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